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दो महीने में निस्तारित किए 464 मुकदमें
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पंद्रह दंपती में साथ रहने के लिए सुलह कराई
अमर उजाला ब्यूरो
बागपत। परिवार न्यायालय में पारिवारिक प्रकरणों की तेजी से सुनवाई हुई है। दो माह में 464 मामले निस्तारित किए गए।
कोरोना महामारी के चलते अदालत बंद चल रही थीं। इससे फाइलों की संख्या बढ़ती गई। डीजीसी सुनील पंवार ने बताया कि जनवरी में अदालत खुलने के बाद प्रकरणों की सुनवाई शुरू हुई। न्यायाधीश विकास कुमार ने तेजी के साथ प्रकरणों का निस्तारण शुरू कराया। दोनों पक्षों को बुलाकर मामलों का निपटारा कराया। जनवरी और फरवरी में ही 464 केस का निस्तारण हो गया। अधिकतर मामले दंपति के बीच कहासुनी, मारपीट या तलाक से संबंधित थे। भरण पोषण के लिए भी वाद दायर किए गए थे।
साथ रहने के लिए राजी हुए
डीजीसी सुनील पंवार ने बताया कि परिवार न्यायालय में लंबित मुकदमों में 15 परिवार साथ रहने पर राजी हुए। इन दंपती के बीच मुकदमें सुलह समझौते के आधार पर निपटाए गए।
पति करता था गुस्सा
बागपत निवासी युवक और शामली निवासी उसकी पत्नी के बीच मामूली कहासुनी के बाद मामला इतना बढ़ा कि तलाक की नौबत आ गई। परिवार न्यायालय में दोनों की काउंसलिंग हुई। महिला का कहना था कि पति गुस्सा करता है तथा मारपीट करने की धमकी देता है। अदालत में पति ने व्यवहार में सुधार करने का आश्वासन दिया। इसके बाद पत्नी साथ रहने के लिए राजी हो गई।
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रोज पहुंचते हैं आठ नए मुकदमें
जिले के विभिन्न थानों से प्रतिदिन परिवार न्यायालय में औसतन सात से आठ मुकदमे पहुंचते हैं। वर्तमान में अदालत में दो हजार 575 मुकदमों की सुनवाई चल रही है।
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अमर उजाला ब्यूरो
बागपत। परिवार न्यायालय में पारिवारिक प्रकरणों की तेजी से सुनवाई हुई है। दो माह में 464 मामले निस्तारित किए गए।
कोरोना महामारी के चलते अदालत बंद चल रही थीं। इससे फाइलों की संख्या बढ़ती गई। डीजीसी सुनील पंवार ने बताया कि जनवरी में अदालत खुलने के बाद प्रकरणों की सुनवाई शुरू हुई। न्यायाधीश विकास कुमार ने तेजी के साथ प्रकरणों का निस्तारण शुरू कराया। दोनों पक्षों को बुलाकर मामलों का निपटारा कराया। जनवरी और फरवरी में ही 464 केस का निस्तारण हो गया। अधिकतर मामले दंपति के बीच कहासुनी, मारपीट या तलाक से संबंधित थे। भरण पोषण के लिए भी वाद दायर किए गए थे।
साथ रहने के लिए राजी हुए
डीजीसी सुनील पंवार ने बताया कि परिवार न्यायालय में लंबित मुकदमों में 15 परिवार साथ रहने पर राजी हुए। इन दंपती के बीच मुकदमें सुलह समझौते के आधार पर निपटाए गए।
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पति करता था गुस्सा
बागपत निवासी युवक और शामली निवासी उसकी पत्नी के बीच मामूली कहासुनी के बाद मामला इतना बढ़ा कि तलाक की नौबत आ गई। परिवार न्यायालय में दोनों की काउंसलिंग हुई। महिला का कहना था कि पति गुस्सा करता है तथा मारपीट करने की धमकी देता है। अदालत में पति ने व्यवहार में सुधार करने का आश्वासन दिया। इसके बाद पत्नी साथ रहने के लिए राजी हो गई।
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रोज पहुंचते हैं आठ नए मुकदमें
जिले के विभिन्न थानों से प्रतिदिन परिवार न्यायालय में औसतन सात से आठ मुकदमे पहुंचते हैं। वर्तमान में अदालत में दो हजार 575 मुकदमों की सुनवाई चल रही है।