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मनमोहन सिंह की बेटी प्रोफेसर उपिंद्र ने जाना सिनौली का इतिहास

Sun, 17 Mar 2019 01:23 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 17 Mar 2019 01:23 AM IST
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मनमोहन सिंह की बेटी प्रोफेसर उपिंद्र ने जाना सिनौली का इतिहास
बड़ौत /बागपत। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की बेटी और अशोका यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर उपिंद्र कौर और इतिहासकार नयन ज्योति लहरी ने सिनौली पहुंचकर इतिहास के विषय में जानकारी हासिल की। अब तक साइट से मिली कामयाबी के विषय में जाना। रथ, महिला के कंकाल, आभूषण और यहां मिल रहे मृदभांड़ की कालक्रम की संभावना पर जानकारी जुटाई।
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अशोका यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर उपिंद्र देश की बड़ी इतिहासकार हैं। शनिवार को वह अपनी साथी प्रोफेसर नयन ज्योति लहरी और यूनिवर्सिटी के तीस छात्रों के दल के साथ सिनौली पहुंचीं। पुरातत्व विभाग के निदेशक एसके मंजुल ने टीम को साइट का भ्रमण कराया और तीसरे चरण के उत्खनन में अब तक यहां मिली सफलता की जानकारी दी। दूसरे चरण की खुदाई में मिले रथ, तलवार और शाही ताबूत की जानकारी दी। तीसरे चरण में महिला का कंकाल, सोने के आभूषण, दो दीवार, पत्थर की भट्टी के विषय में जानकारी जुटाई गई। प्रोफेसर उपिंद्र कौर करीब डेढ़ घंटे तक शोध दल और नयन ज्योति लहरी के साथ सिनौली में रही, इस बीच पुलिस और प्रशासन को उनके आने की जानकारी नहीं मिली। इससे पहले भी वह साल 2006 में सिनौली का भ्रमण कर चुकी है। शहजाद राय शोध संस्थान के निदेशक अमित राय जैन का कहना है कि सिनौली से निकले पुरावशेष इतिहास की परतें खोलेंगे, यही वजह है कि यह दुनिया के इतिहासकारों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
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शोध दल के छात्राओं के लिए बना आकर्षण
बागपत। सिनौली में तीसरे चरण की खुदाई में मिल रहे महत्वपूर्ण पुरावेशष के चलते विभिन्न यूनिवर्सिटी के शोध छात्राओं के लिए सिनौली आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यही नहीं इतिहास के प्रोफेसर और लेखक भी यहां का दौरा कर चुके हैं।
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उत्खनन जारी, धनुष मिलने का लग रहा अनुमान
बागपत। तीसरे चरण की खुदाई जारी है। यहां पर कॉपर के कुछ टुकड़े धनुष की आकृति में मिले हैं। माना जा रहा है कि लकड़ी गल जाने के कारण टुकड़े ही बच गए थे। पुरातत्व विभाग का अनुमान है कि इस दौर में भी धनुष का प्रयोग किया गया होगा, इस पर शोध किया जा रहा है।
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