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चाचा से मिली प्रेरणा और जुनून से मिला सोना
Updated Mon, 23 Jul 2018 12:52 AM IST
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बागपत। गांगनौली के सचिन राठी की कामयाबी में प्रेरणा चाचा संजय पहलवान की है। शौक से शुरू की गई कुश्ती को जुनून की हद तक प्यार करने वाले सचिन का कहना है कि तीन साल पहले कांस्य पदक मिलने पर वह अपने आप से नाखुश था, लेकिन इस बाद सोना जीतने के बाद बेहद खुशी हुई। परिवार और कोच ने सहयोग किया।
गांगनौली गांव के कुश्ती के अखाड़े से शुरू किए गए अभ्यास से दिलेर सचिन राठी ने जूनियर एशियन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता है। अक्तूबर माह में होने वाली सीनियर विश्व चैंपियनशिप के लिए भी सचिन का चयन हो चुका है। परिवार में खुशी का माहौल है। सचिन का कहना है कि उसके चाचा संजय पहलवानी करते थे। सेना में रहे, उन्हीं से कुश्ती की जानकारी मिली। गांव के अखाड़े में गया तो खलीफा ने हौंसला बढ़ाया। धीरे-धीरे बारीकियां सीखी और चाचा की सलाह पर ही दिल्ली की राह पकड़ी। भाई मनोज कुमार, संजीव कुमार, प्रवीण कुमार ने सहयोग किया। इसके बाद उसकी कामयाबी का सिलसिला शुरू हो गया। साल 2015 में उसने एशियन कुश्ती में कांस्य पदक जीता था, तब ऐसा लगा कि प्रदर्शन कुछ कमजोर रहा है, लेकिन इस बार सोने के तमगे पर दांव लगाया। सचिन कहता है कि सेमीफाइनल का मुकाबला जोरदार रहा। ईरान के पहलवान से उसकी कड़ी टक्कर हुई।
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गांगनौली गांव के कुश्ती के अखाड़े से शुरू किए गए अभ्यास से दिलेर सचिन राठी ने जूनियर एशियन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता है। अक्तूबर माह में होने वाली सीनियर विश्व चैंपियनशिप के लिए भी सचिन का चयन हो चुका है। परिवार में खुशी का माहौल है। सचिन का कहना है कि उसके चाचा संजय पहलवानी करते थे। सेना में रहे, उन्हीं से कुश्ती की जानकारी मिली। गांव के अखाड़े में गया तो खलीफा ने हौंसला बढ़ाया। धीरे-धीरे बारीकियां सीखी और चाचा की सलाह पर ही दिल्ली की राह पकड़ी। भाई मनोज कुमार, संजीव कुमार, प्रवीण कुमार ने सहयोग किया। इसके बाद उसकी कामयाबी का सिलसिला शुरू हो गया। साल 2015 में उसने एशियन कुश्ती में कांस्य पदक जीता था, तब ऐसा लगा कि प्रदर्शन कुछ कमजोर रहा है, लेकिन इस बार सोने के तमगे पर दांव लगाया। सचिन कहता है कि सेमीफाइनल का मुकाबला जोरदार रहा। ईरान के पहलवान से उसकी कड़ी टक्कर हुई।
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