{"_id":"5adce5c14f1c1b330a8b6017","slug":"41524426177-baghpat-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"वैदिक संस्कार के प्रचार में समर्पित कर दिया जीवन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वैदिक संस्कार के प्रचार में समर्पित कर दिया जीवन
Updated Mon, 23 Apr 2018 01:12 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दोघट (बागपत)।
प्रोफेसर बलजीत सिंह आर्य का जन्म 80 वर्ष पहले दिल्ली राज्य के नरेला में एक सामाजिक रूप से प्रतिष्ठित और संस्कार युक्त परिवार में हुआ था। प्रोफेसर बलजीत सिंह की माता भगवानी देवी ने अपने दयालु और धार्मिक आदि गुणों के कारण क्षेत्र में एक ऊंचा स्थान पा लिया था। ऐसे संस्कारवान कुल में जन्में बलजीत आर्य पर पारिवारिक गुणों और संस्कारों का प्रभाव बचपन से ही दिखाई देने लग गया था।
प्रोफेसर बलजीत आर्य की प्राथमिक शिक्षा गांव के ही प्राथमिक स्कूल में हुई। उर्दू भाषा के माध्यम से प्राइमरी की परीक्षा पास की। बड़ौत के जाट कॉलेज से इंटर की परीक्षा पास करने के बाद बीएससी कृषि की परीक्षा पास की। 1961 में एशिया के प्रसिद्ध संस्थान भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली पूसा आईएआरआई नई दिल्ली में एमएससी कृषि प्रसार में प्रवेश लेकर 1963 में पास की। 18 अक्तूबर 1963 को बलजीत आर्य ने जाट वैदिक कॉलेज बड़ौत के कृषि प्रसार विभाग में प्रवक्ता पद का कार्यभार संभाला। सितंबर 1974 में आरके आर्य डिग्री कॉलेज नवा शहर के प्राचार्य पद का कार्य भार संभाल लिया। सितंबर 1978 में फिर से जाट वैदिक कॉलेज बड़ौत में प्रवक्ता पद पर नियुक्त हो गए। युवा बलदेव स्वामी वेदानंद ग्राम बासौली, युवा कर्मपाल स्वामी ग्राम कादी खेड़ा मुजफ्फरनगर, युवा राजेंद्र स्वामी देवव्रत ग्राम सरूरपुर कलां और युवा ओमपाल स्वामी ओमवेश ग्राम गूंगा खेड़ी बागपत ने प्रोफेसर आर्य के समर्पित जीवन से प्रेरित होकर अपना संपूर्ण जीवन समाज सुधार और वैदिक संस्कृति के प्रचार के लिए समर्पित कर दिया और ये समाज सुधार का बहुत बड़ा कार्य कर रहे हैं।
सामाजिक सेवा के क्षेत्र में किए कार्य
दोघट। यदि प्रोफेसर बलजीत आर्य द्वारा किए कार्यों पर चर्चा करें तो एक मोटी किताब लिखी जा सकती है। यह सहज ही विश्वास नहीं होता कि साधारण सा दिखने वाला एक व्यक्ति समाज निर्माण के इतने बडे़ कार्य कर सकता है। समाज निर्माण का कोई पक्ष इनसे अछूता नहीं रहा है। ़ युवा वर्ग के लिए सैकड़ों युवा चरित्र एवं संस्कार निर्माण शिविरों का आयोजन किया। इनमें देश की महान विभूतियां पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह, स्वामी कल्याण देव ने शिविरों में आकर शिविर में शामिल युवाओं को आशीर्वाद दिया। अखिल भारतीय वेद मंडल के बैनर तले शराब बंदी को लेकर क्षेत्र में साइकिल यात्री निकाली। साथ ही महिला सम्मान के लिए बेटी बचाओ, दहेज हटाओ, बेटी पढ़ाओ सम्मेलन का आयोजन किया। स्वतंत्रता की बलिवेदी पर हंसते अपने प्राणों की आहुति देने वाले शहीदों की याद पर शहीद सम्मेलन व शहीद स्मृतियों और शहीद दिवसों का आयोजन कराया। ग्रामीणों क्षेत्र के युवाओं की प्रतिभा निखारने में उन्होंने सैकड़ों कार्यक्रमों का आयोजन किया है। उन्होंने वर्ष 2017 में चौधरी चरण सिंह समाज सुधार मंच का गठन किया। मच के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्र में वैदिक संस्कृति, महिला शिक्षा, शराब बंदी आदि के प्रति लोगों को जागरूक कर रहे हैं।
विज्ञापन
पुरस्कार अवार्ड से अलंकृत
* आर्य ने 1958 में मेरठ मंडल कुश्ती प्रतियोगिता में अपने वजन में प्रथम स्थान प्राप्त किया।
* 1959 और 1960 में आगरा विवि की कुश्ती प्रतियोगिता में अपने वजन में प्रथम स्थान प्राप्त किया।
* 1997 में इंडियन सोसाइटी आफ एक्सटेंशन एजूकेशन नई दिल्ली ने जोनल नेशनल फैलो अवार्ड से सम्मानित किया।
* 1998 में चौधरी चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय हिसार में उत्कृष्ट सेवाओं के लिए सम्मानित किया।
* 1999 मे दिल्ली में केन्द्रीय आर्य युवक परिषद ने राष्ट्रीय आर्य युवक रत्न के पुरस्कार से नवाजा।
* 1999 में एक वेद सामाजिक सम्मान समारोह में मारुति कार भेंट कर सम्मानित किया।
* चौधरी चरण सिंह विवि मेरठ के आर्य सीनेट के सदस्य एकडेमिक कौंसिल सदस्य और रिसर्च डिग्री कमेटी के वर्षों तक संयोजक रहे।
विज्ञापन
प्रोफेसर बलजीत सिंह आर्य का जन्म 80 वर्ष पहले दिल्ली राज्य के नरेला में एक सामाजिक रूप से प्रतिष्ठित और संस्कार युक्त परिवार में हुआ था। प्रोफेसर बलजीत सिंह की माता भगवानी देवी ने अपने दयालु और धार्मिक आदि गुणों के कारण क्षेत्र में एक ऊंचा स्थान पा लिया था। ऐसे संस्कारवान कुल में जन्में बलजीत आर्य पर पारिवारिक गुणों और संस्कारों का प्रभाव बचपन से ही दिखाई देने लग गया था।
प्रोफेसर बलजीत आर्य की प्राथमिक शिक्षा गांव के ही प्राथमिक स्कूल में हुई। उर्दू भाषा के माध्यम से प्राइमरी की परीक्षा पास की। बड़ौत के जाट कॉलेज से इंटर की परीक्षा पास करने के बाद बीएससी कृषि की परीक्षा पास की। 1961 में एशिया के प्रसिद्ध संस्थान भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली पूसा आईएआरआई नई दिल्ली में एमएससी कृषि प्रसार में प्रवेश लेकर 1963 में पास की। 18 अक्तूबर 1963 को बलजीत आर्य ने जाट वैदिक कॉलेज बड़ौत के कृषि प्रसार विभाग में प्रवक्ता पद का कार्यभार संभाला। सितंबर 1974 में आरके आर्य डिग्री कॉलेज नवा शहर के प्राचार्य पद का कार्य भार संभाल लिया। सितंबर 1978 में फिर से जाट वैदिक कॉलेज बड़ौत में प्रवक्ता पद पर नियुक्त हो गए। युवा बलदेव स्वामी वेदानंद ग्राम बासौली, युवा कर्मपाल स्वामी ग्राम कादी खेड़ा मुजफ्फरनगर, युवा राजेंद्र स्वामी देवव्रत ग्राम सरूरपुर कलां और युवा ओमपाल स्वामी ओमवेश ग्राम गूंगा खेड़ी बागपत ने प्रोफेसर आर्य के समर्पित जीवन से प्रेरित होकर अपना संपूर्ण जीवन समाज सुधार और वैदिक संस्कृति के प्रचार के लिए समर्पित कर दिया और ये समाज सुधार का बहुत बड़ा कार्य कर रहे हैं।
विज्ञापन
सामाजिक सेवा के क्षेत्र में किए कार्य
दोघट। यदि प्रोफेसर बलजीत आर्य द्वारा किए कार्यों पर चर्चा करें तो एक मोटी किताब लिखी जा सकती है। यह सहज ही विश्वास नहीं होता कि साधारण सा दिखने वाला एक व्यक्ति समाज निर्माण के इतने बडे़ कार्य कर सकता है। समाज निर्माण का कोई पक्ष इनसे अछूता नहीं रहा है। ़ युवा वर्ग के लिए सैकड़ों युवा चरित्र एवं संस्कार निर्माण शिविरों का आयोजन किया। इनमें देश की महान विभूतियां पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह, स्वामी कल्याण देव ने शिविरों में आकर शिविर में शामिल युवाओं को आशीर्वाद दिया। अखिल भारतीय वेद मंडल के बैनर तले शराब बंदी को लेकर क्षेत्र में साइकिल यात्री निकाली। साथ ही महिला सम्मान के लिए बेटी बचाओ, दहेज हटाओ, बेटी पढ़ाओ सम्मेलन का आयोजन किया। स्वतंत्रता की बलिवेदी पर हंसते अपने प्राणों की आहुति देने वाले शहीदों की याद पर शहीद सम्मेलन व शहीद स्मृतियों और शहीद दिवसों का आयोजन कराया। ग्रामीणों क्षेत्र के युवाओं की प्रतिभा निखारने में उन्होंने सैकड़ों कार्यक्रमों का आयोजन किया है। उन्होंने वर्ष 2017 में चौधरी चरण सिंह समाज सुधार मंच का गठन किया। मच के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्र में वैदिक संस्कृति, महिला शिक्षा, शराब बंदी आदि के प्रति लोगों को जागरूक कर रहे हैं।
विज्ञापन
पुरस्कार अवार्ड से अलंकृत
* आर्य ने 1958 में मेरठ मंडल कुश्ती प्रतियोगिता में अपने वजन में प्रथम स्थान प्राप्त किया।
* 1959 और 1960 में आगरा विवि की कुश्ती प्रतियोगिता में अपने वजन में प्रथम स्थान प्राप्त किया।
* 1997 में इंडियन सोसाइटी आफ एक्सटेंशन एजूकेशन नई दिल्ली ने जोनल नेशनल फैलो अवार्ड से सम्मानित किया।
* 1998 में चौधरी चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय हिसार में उत्कृष्ट सेवाओं के लिए सम्मानित किया।
* 1999 मे दिल्ली में केन्द्रीय आर्य युवक परिषद ने राष्ट्रीय आर्य युवक रत्न के पुरस्कार से नवाजा।
* 1999 में एक वेद सामाजिक सम्मान समारोह में मारुति कार भेंट कर सम्मानित किया।
* चौधरी चरण सिंह विवि मेरठ के आर्य सीनेट के सदस्य एकडेमिक कौंसिल सदस्य और रिसर्च डिग्री कमेटी के वर्षों तक संयोजक रहे।