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बच्चें देश की धरोहर व भविष्य है- अरूण मुनि
Updated Mon, 14 Aug 2017 01:04 AM IST
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बच्चे देश की धरोहर और भविष्य है- अरुण मुनि
बड़ौत। जैन स्थानक नया बाजार में बाल दिवस के आयोजन पर धर्मसभा में जैन संत अरुण मुनि ने कहा कि बच्चे देश की धरोहर है और देश का भविष्य होते हैं।
उन्होंने कहा कि बच्चे कुम्हार के कच्चे घड़े के सामान होते है। चलते हुए चाक पर कुम्हार उन्हें कुछ भी रूप दे सकता है। मगर जब वे पक जाते हैं। फिर उन्हें बदलना संभव नहीं होता। बच्चे परमात्मा के नजदीक होते हैं, क्योंकि वे झूठ से परे होते हैं। यदि आपको पढ़ने के लिये अच्छा साहित्य न मिले, सत्संग सुनने को न मिले तो बच्चों के पास चले जाओ। बच्चों में आपकी सहजता मिलेगी। बच्चे झूठ नहीं बोलते, उन्हें झूठ बोलना बड़े ही सिखाते हैं। जिसके घर में बच्चे नहीं, उससे घर नहीं कहा जा सकता। आज के बच्चों की परवरिश करना आसान काम नहीं। बच्चों को बुजुर्गों की सेवा करना, उनके चरण स्पर्श करना आदि की प्रेरणा देनी चाहिए। इससे पूर्व अमन मुनि ने भी विचार रखे। धर्मसभा में शिखरचंद जैन, अजित प्रसाद, डीके जैन, विनय कुमार, हंस कुमार जैन, दीपक जैन, प्रवीण जैन, नरेशचंद, शैलबाला, इंद्राणी, मैमो देवी, संतोष, उर्मिला, पूनम, गीता, बीना आदि उपस्थित रहें।
हर संप्रदाय में शास्त्रों की पूज्यता होती है - सुंदर सागर महाराज
बड़ौत। आचार्य सुुंदर सागर महाराज में विहर्श सभागार में धर्मसभा में कहा कि हर संप्रदाय में कोई न कोई ऐसा शास्त्र होता है, जिसकी पूज्यता हो। हिंदू संप्रदाय में श्रीमद्भागवत गीता है। गीता में नारायण-कृष्ण का जीवन दर्शन है। गीता में हिंदुत्व का निचौड़ है। वसुदेव देवकी के पुत्र श्रीकृष्ण ने उस समय गीता का उपदेश दिया जब महाभारत का युद्ध हो रहा था। वास्तव में दोनों का उद्देश्य तब याद आना चाहिए जब लड़ाई हो रही हो। क्रोध आते समय वस्तु के स्वरूप का विचार करों। इस अवसर पर मंगलाचरण ब्रह्मचारी विकास जैन ने किया। धर्मसभा में मदनलाल, प्रमोद, अशोक, वरदान, अतुल, प्रदीप आदि उपस्थित रहे।
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बड़ौत। जैन स्थानक नया बाजार में बाल दिवस के आयोजन पर धर्मसभा में जैन संत अरुण मुनि ने कहा कि बच्चे देश की धरोहर है और देश का भविष्य होते हैं।
उन्होंने कहा कि बच्चे कुम्हार के कच्चे घड़े के सामान होते है। चलते हुए चाक पर कुम्हार उन्हें कुछ भी रूप दे सकता है। मगर जब वे पक जाते हैं। फिर उन्हें बदलना संभव नहीं होता। बच्चे परमात्मा के नजदीक होते हैं, क्योंकि वे झूठ से परे होते हैं। यदि आपको पढ़ने के लिये अच्छा साहित्य न मिले, सत्संग सुनने को न मिले तो बच्चों के पास चले जाओ। बच्चों में आपकी सहजता मिलेगी। बच्चे झूठ नहीं बोलते, उन्हें झूठ बोलना बड़े ही सिखाते हैं। जिसके घर में बच्चे नहीं, उससे घर नहीं कहा जा सकता। आज के बच्चों की परवरिश करना आसान काम नहीं। बच्चों को बुजुर्गों की सेवा करना, उनके चरण स्पर्श करना आदि की प्रेरणा देनी चाहिए। इससे पूर्व अमन मुनि ने भी विचार रखे। धर्मसभा में शिखरचंद जैन, अजित प्रसाद, डीके जैन, विनय कुमार, हंस कुमार जैन, दीपक जैन, प्रवीण जैन, नरेशचंद, शैलबाला, इंद्राणी, मैमो देवी, संतोष, उर्मिला, पूनम, गीता, बीना आदि उपस्थित रहें।
हर संप्रदाय में शास्त्रों की पूज्यता होती है - सुंदर सागर महाराज
बड़ौत। आचार्य सुुंदर सागर महाराज में विहर्श सभागार में धर्मसभा में कहा कि हर संप्रदाय में कोई न कोई ऐसा शास्त्र होता है, जिसकी पूज्यता हो। हिंदू संप्रदाय में श्रीमद्भागवत गीता है। गीता में नारायण-कृष्ण का जीवन दर्शन है। गीता में हिंदुत्व का निचौड़ है। वसुदेव देवकी के पुत्र श्रीकृष्ण ने उस समय गीता का उपदेश दिया जब महाभारत का युद्ध हो रहा था। वास्तव में दोनों का उद्देश्य तब याद आना चाहिए जब लड़ाई हो रही हो। क्रोध आते समय वस्तु के स्वरूप का विचार करों। इस अवसर पर मंगलाचरण ब्रह्मचारी विकास जैन ने किया। धर्मसभा में मदनलाल, प्रमोद, अशोक, वरदान, अतुल, प्रदीप आदि उपस्थित रहे।
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