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कोयले के दाम बढ़ने से ईंट भट्ठों पर ताला
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बागपत-बड़ौत रोड स्थित ईंट का भट्टा
- फोटो : BAGHPAT
बागपत। कोयले के दाम बढ़ने से इस बार ईंट भट्ठे नहीं चले है। पहले कोयला पहले दस हजार रुपये प्रति टन मिल रहा था, वह अचानक 24 हजार रुपये टन पहुंच गया है। इतना महंगा कोयला खरीदकर ईंट बनाने से डेढ़ हजार रुपये प्रति हजार तक का इजाफा होगा। इसलिए अभी ईंट निर्माता समिति ने सरकार से कोयले के दाम कम करने की मांग उठाई है। कहा गया है कि महंगे कोयले के कारण बागपत के करीब 450 और यूपी और हरियाणा के एनसीआर क्षेत्र के करीब 2456 ईंट भट्ठे बंद है।
बागपत में करीब 450 ईंट भट्ठे है। उत्तर प्रदेश व हरियाणा के एनसीआर क्षेत्र में शामिल जिलों में करीब 2456 भट्ठे है। यह सभी भट्ठे जिगजैग तकनीक पर आधारित है, जिनमें कोयले के सहारे ईंटों को बनाया जाता है। पिछले साल तक कोयला दस हजार रुपये टन मिलता था, वहीं अब कोयले के दाम करीब 24 हजार रुपये टन हो गए है। इस तरह करीब ढाई गुना की बढ़ोतरी कोयले में हुई है। हर साल फरवरी में शुरू होने वाले भट्ठे अभी तक बंद पड़े है।
ईंटों के दाम 1500 रुपये प्रति हजार तक बढ़ जाएंगे
ईंट निर्माता संघ के पदाधिकारियों के अनुसार बागपत व अन्य जिलों से दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, फरीदाबाद में ईंट सप्लाई ज्यादा होती है। जिस तरह से कोयले के दाम ढाई गुना तक बढ़ गए है, उससे तो ईंट के दाम में काफी बढ़ोतरी हो जाएगी। अभी तक 4000-4500 रुपये की एक हजार ईंट है, उसमें डेढ़ हजार रुपये तक की बढ़ोतरी हो जाएगी। ऐसे में मकान बनाना काफी महंगा हो जाएगा।
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बागपत में 4500 और एनसीआर में ढाई लाख मजदूरों को नहीं मिला काम
बागपत में 450 ईंट भट्ठों के चलने पर करीब 45 हजार मजदूर काम करते है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के 2456 ईंट भट्ठों पर करीब ढाई लाख मजदूर काम करते है। भट्ठे बंद रहने से इन मजदूरों को अभी तक काम नहीं मिला है। जबकि जनवरी में ईंट पथाई का काम शुरू हो जाता था। ऐसे में इन मजदूरों के सामने भी परिवार का गुजारा चलाने की समस्या खड़ी हो सकती है।
भट्ठे नहीं चलाएंगे या ईंटों के रेट बढ़ाएंगे
कोयले के दाम बढ़ने से जिस तरह के हालात पैदा हो गए है, उससे भट्ठा संचालकों के पास दो ही रास्ते बचे है। एक ईंट भट्ठे नहीं चलाए जाएं और दूसरा यह है कि ईंटों के दाम बढ़ाए जाएं। इसे लेकर ही राष्ट्रीय संघ के पदाधिकारी बातचीत कर रहे है। - नीरज नैन, जिला महामंत्री, ईंट निर्माण संघ
--
सरकार को ईंट निर्माता संघ ने पत्र लिखा
ईंट निर्माता संघ के राष्ट्रीय महामंत्री ओमबीर सिंह भाटी ने बताया कि खदानों से कोयला बंगाल से होकर आता है। ट्रकों में कोयला आने नहीं दिया जा रहा है, जिससे बड़ी समस्या खड़ी हो रही है। अगर ट्रेन से कोयला मंगवाया जाता है तो उसके लिए लंबी प्रक्रिया है। रुपये भी ज्यादा जमा करने पड़ते है, जो ईंट भट्ठा मालिकों के लिए संभव नहीं है। यूएसए से आने वाला कोयला करीब साढ़े चौबीस हजार रुपये टन पड़ रहा है। इस समस्या के समाधान के लिए भारत सरकार को पत्र लिखा गया है। अगर कोयला के दाम को लेकर कोई फैसला नहीं होता है तो भट्ठे चलाना संभव नहीं है।
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बागपत में करीब 450 ईंट भट्ठे है। उत्तर प्रदेश व हरियाणा के एनसीआर क्षेत्र में शामिल जिलों में करीब 2456 भट्ठे है। यह सभी भट्ठे जिगजैग तकनीक पर आधारित है, जिनमें कोयले के सहारे ईंटों को बनाया जाता है। पिछले साल तक कोयला दस हजार रुपये टन मिलता था, वहीं अब कोयले के दाम करीब 24 हजार रुपये टन हो गए है। इस तरह करीब ढाई गुना की बढ़ोतरी कोयले में हुई है। हर साल फरवरी में शुरू होने वाले भट्ठे अभी तक बंद पड़े है।
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ईंटों के दाम 1500 रुपये प्रति हजार तक बढ़ जाएंगे
ईंट निर्माता संघ के पदाधिकारियों के अनुसार बागपत व अन्य जिलों से दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, फरीदाबाद में ईंट सप्लाई ज्यादा होती है। जिस तरह से कोयले के दाम ढाई गुना तक बढ़ गए है, उससे तो ईंट के दाम में काफी बढ़ोतरी हो जाएगी। अभी तक 4000-4500 रुपये की एक हजार ईंट है, उसमें डेढ़ हजार रुपये तक की बढ़ोतरी हो जाएगी। ऐसे में मकान बनाना काफी महंगा हो जाएगा।
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बागपत में 4500 और एनसीआर में ढाई लाख मजदूरों को नहीं मिला काम
बागपत में 450 ईंट भट्ठों के चलने पर करीब 45 हजार मजदूर काम करते है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के 2456 ईंट भट्ठों पर करीब ढाई लाख मजदूर काम करते है। भट्ठे बंद रहने से इन मजदूरों को अभी तक काम नहीं मिला है। जबकि जनवरी में ईंट पथाई का काम शुरू हो जाता था। ऐसे में इन मजदूरों के सामने भी परिवार का गुजारा चलाने की समस्या खड़ी हो सकती है।
भट्ठे नहीं चलाएंगे या ईंटों के रेट बढ़ाएंगे
कोयले के दाम बढ़ने से जिस तरह के हालात पैदा हो गए है, उससे भट्ठा संचालकों के पास दो ही रास्ते बचे है। एक ईंट भट्ठे नहीं चलाए जाएं और दूसरा यह है कि ईंटों के दाम बढ़ाए जाएं। इसे लेकर ही राष्ट्रीय संघ के पदाधिकारी बातचीत कर रहे है। - नीरज नैन, जिला महामंत्री, ईंट निर्माण संघ
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सरकार को ईंट निर्माता संघ ने पत्र लिखा
ईंट निर्माता संघ के राष्ट्रीय महामंत्री ओमबीर सिंह भाटी ने बताया कि खदानों से कोयला बंगाल से होकर आता है। ट्रकों में कोयला आने नहीं दिया जा रहा है, जिससे बड़ी समस्या खड़ी हो रही है। अगर ट्रेन से कोयला मंगवाया जाता है तो उसके लिए लंबी प्रक्रिया है। रुपये भी ज्यादा जमा करने पड़ते है, जो ईंट भट्ठा मालिकों के लिए संभव नहीं है। यूएसए से आने वाला कोयला करीब साढ़े चौबीस हजार रुपये टन पड़ रहा है। इस समस्या के समाधान के लिए भारत सरकार को पत्र लिखा गया है। अगर कोयला के दाम को लेकर कोई फैसला नहीं होता है तो भट्ठे चलाना संभव नहीं है।