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नहीं मिल रहे यात्री, बड़ौत डिपो ने 24 बसें सरेंडर की
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नहीं मिल रहे यात्री, बड़ौत डिपो ने 24 बसें सरेंडर की
बागपत। कोरोना वायरस के कारण रोडवेज बसों का संचालन घाटे का सौदा साबित हो रहा है। अधिकांश यात्री बसों में सफर करने के बजाए निजी वाहनों से सफर करना पसंद कर रहे है। यही वजह है कि अनलॉक वन के साथ शुरू हुई बड़ौत डिपो की बसों में 24 का सरेंडर कर दिया गया है। अब केवल 38 बसों को संचालन जिले में विभिन्न रूटों पर किया जा रहा है।
बड़ौत डिपो में 124 बसें संचालित है। इनमें 77 बसें परिवहन निगम और 47 बसें अनुबंधित है। अनलॉक वन के साथ ही कई रूटाें पर बसों का संचालन किया गया था। एक तो बसों का अंतरराज्यीय संचालन न होने के कारण और दूसरे कोरोना महामारी के चलते यात्री बसों में सफर करने से परहेज कर रहे है। इसी कारण फिलहाल 24 बसों को सरेंडर कर दिया गया है। वर्तमान में बड़ौत डिपो से विभिन्न रूटों पर 38 बसों का संचालन किया जा रहा है। इनमें 26 बस निगम और 12 बस अनुबंधित संचालित की जा रही है।
14 लाख से चार लाख पहुंची कमाई
बागपत। एआरएम योगेंद्र पाल ने बताया कि बड़ौत डिपो से बसों का मुख्य संचालन दिल्ली में कश्मीरी गेट तथा उत्तराखंड में हरिद्वार है। दोनों ही स्थानों पर बसों का संचालन नहीं हो रहा है। इसके कारण यात्री बसों में काफी कम संख्या में सफर कर रहे है। डिपो की आय 14 लाख रुपये से घटकर चार लाख रुपये रह गई है।
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प्राइवेट बस संचालकों के लिए मुश्किल हालात
बागपत। जिले में मेरठ से बागपत-बड़ौत वाया छपरौली-टांडा तक तथा अमीनगर सराय से बड़ौत व मुरादनगर तक प्राइवेट बसों का संचालन किया जाता है। कोरोना महामारी फैलने के बाद लॉकडाउन में बसों का संचालन बंद कर दिया गया था। शासन ने रोडवेज बसों के संचालन को अनुमति दे दी है, मगर अभी तक प्राइवेट बसों के संचालन के लिए अनुमति नहीं मिली है। इससे प्राइवेट बस संचालक से लेकर चालक व परिचालकों पर रोजी-रोटी का संकट गहरा गया है। मेरठ-बागपत प्राइवेट बस यूनियन के संरक्षक प्रबंधक हिम्मत सिंह ने बताया कि जिले में 69 प्राइवेट बसों का संचालन किया जाता है। इन बसों पर लगभग 207 चालक, परिचालक व हेल्पर तथा 20 एजेंट तैनात है। बसों का संचालन बंद होने के कारण बस संचालक, चालक, परिचालक व हेल्पर भूखमरी की कगार पर है। शासन का निर्देश न मिलने तक बसों का संचालन नहीं किया जाएगा।
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बागपत। कोरोना वायरस के कारण रोडवेज बसों का संचालन घाटे का सौदा साबित हो रहा है। अधिकांश यात्री बसों में सफर करने के बजाए निजी वाहनों से सफर करना पसंद कर रहे है। यही वजह है कि अनलॉक वन के साथ शुरू हुई बड़ौत डिपो की बसों में 24 का सरेंडर कर दिया गया है। अब केवल 38 बसों को संचालन जिले में विभिन्न रूटों पर किया जा रहा है।
बड़ौत डिपो में 124 बसें संचालित है। इनमें 77 बसें परिवहन निगम और 47 बसें अनुबंधित है। अनलॉक वन के साथ ही कई रूटाें पर बसों का संचालन किया गया था। एक तो बसों का अंतरराज्यीय संचालन न होने के कारण और दूसरे कोरोना महामारी के चलते यात्री बसों में सफर करने से परहेज कर रहे है। इसी कारण फिलहाल 24 बसों को सरेंडर कर दिया गया है। वर्तमान में बड़ौत डिपो से विभिन्न रूटों पर 38 बसों का संचालन किया जा रहा है। इनमें 26 बस निगम और 12 बस अनुबंधित संचालित की जा रही है।
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14 लाख से चार लाख पहुंची कमाई
बागपत। एआरएम योगेंद्र पाल ने बताया कि बड़ौत डिपो से बसों का मुख्य संचालन दिल्ली में कश्मीरी गेट तथा उत्तराखंड में हरिद्वार है। दोनों ही स्थानों पर बसों का संचालन नहीं हो रहा है। इसके कारण यात्री बसों में काफी कम संख्या में सफर कर रहे है। डिपो की आय 14 लाख रुपये से घटकर चार लाख रुपये रह गई है।
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प्राइवेट बस संचालकों के लिए मुश्किल हालात
बागपत। जिले में मेरठ से बागपत-बड़ौत वाया छपरौली-टांडा तक तथा अमीनगर सराय से बड़ौत व मुरादनगर तक प्राइवेट बसों का संचालन किया जाता है। कोरोना महामारी फैलने के बाद लॉकडाउन में बसों का संचालन बंद कर दिया गया था। शासन ने रोडवेज बसों के संचालन को अनुमति दे दी है, मगर अभी तक प्राइवेट बसों के संचालन के लिए अनुमति नहीं मिली है। इससे प्राइवेट बस संचालक से लेकर चालक व परिचालकों पर रोजी-रोटी का संकट गहरा गया है। मेरठ-बागपत प्राइवेट बस यूनियन के संरक्षक प्रबंधक हिम्मत सिंह ने बताया कि जिले में 69 प्राइवेट बसों का संचालन किया जाता है। इन बसों पर लगभग 207 चालक, परिचालक व हेल्पर तथा 20 एजेंट तैनात है। बसों का संचालन बंद होने के कारण बस संचालक, चालक, परिचालक व हेल्पर भूखमरी की कगार पर है। शासन का निर्देश न मिलने तक बसों का संचालन नहीं किया जाएगा।