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कोर्ट ने विवाद को संज्ञान में लिया, 15 को होंगे बयान
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खेकड़ा (बागपत)।
बिजली संविदा लाइन मैन कर्मियों और बिजली विभाग के अधिकारियों के बीच चल रहे विवाद को विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी कोर्ट ने संज्ञान में लिया । इस परिवाद के तहत 15 मार्च को कोर्ट में बयान होंगे।
खेकड़ा नगर स्थित बिजलीघर में कार्यरत संविदा कर्मियों और बिजली विभाग के अधिकारियों के बीच गत वर्ष अक्टूबर माह में विवाद हुआ। आरोप था कि अधिकारी उपभोक्ताओं से अवैध धन वसूली कराने का दबाव डालते हैं ना करने पर जाति सूचक शब्दों से अपमानित करते हैं, नौकरी से निकालने व झूठा पुलिस केस बनाने की धमकी भी देते हैं। प्रकरण में विभागीय अधिकारियों के ओडियो और वीडियो भी सोशल मीडिया पर आए । तब नगर के समाजसेवी संगठन व कार्यकर्ताओं ने संविदा कर्मियों के लिए मुहिम भी चलाई । बाद में इनमें छह लाइन मैन को अधिकारियों ने नौकरी से निकाल दिया। संविदा कर्मी तभी इस मामले को लेकर कोर्ट चले गए । अब इस मामले में विशेष न्यायाधीश एससी /एसटी एवं प्रभारी द्वितीय अपर न्यायाधीश ने प्रार्थी के प्रार्थना पत्र को परिवाद के रूप में दर्ज कर लिया है। कोर्ट ने माना कि प्रार्थना पत्र में वर्णित तथ्यों के अवलोकन से स्पष्ट है कि प्रार्थी के पास परिवाद के संबंध में पर्याप्त साक्ष्य है। पक्षों के बयान के लिए 15 मार्च को कोर्ट में उपस्थित होने के आदेश दिए हैं।
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बिजली संविदा लाइन मैन कर्मियों और बिजली विभाग के अधिकारियों के बीच चल रहे विवाद को विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी कोर्ट ने संज्ञान में लिया । इस परिवाद के तहत 15 मार्च को कोर्ट में बयान होंगे।
खेकड़ा नगर स्थित बिजलीघर में कार्यरत संविदा कर्मियों और बिजली विभाग के अधिकारियों के बीच गत वर्ष अक्टूबर माह में विवाद हुआ। आरोप था कि अधिकारी उपभोक्ताओं से अवैध धन वसूली कराने का दबाव डालते हैं ना करने पर जाति सूचक शब्दों से अपमानित करते हैं, नौकरी से निकालने व झूठा पुलिस केस बनाने की धमकी भी देते हैं। प्रकरण में विभागीय अधिकारियों के ओडियो और वीडियो भी सोशल मीडिया पर आए । तब नगर के समाजसेवी संगठन व कार्यकर्ताओं ने संविदा कर्मियों के लिए मुहिम भी चलाई । बाद में इनमें छह लाइन मैन को अधिकारियों ने नौकरी से निकाल दिया। संविदा कर्मी तभी इस मामले को लेकर कोर्ट चले गए । अब इस मामले में विशेष न्यायाधीश एससी /एसटी एवं प्रभारी द्वितीय अपर न्यायाधीश ने प्रार्थी के प्रार्थना पत्र को परिवाद के रूप में दर्ज कर लिया है। कोर्ट ने माना कि प्रार्थना पत्र में वर्णित तथ्यों के अवलोकन से स्पष्ट है कि प्रार्थी के पास परिवाद के संबंध में पर्याप्त साक्ष्य है। पक्षों के बयान के लिए 15 मार्च को कोर्ट में उपस्थित होने के आदेश दिए हैं।
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