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बिन पुरूषार्थ के जनवाणी सुनना व समझना संभव नहीं है-सुंदर सागर महाराज
Updated Sun, 23 Jul 2017 11:51 PM IST
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बिना पुरुषार्थ के जनवाणी सुनना और समझना संभव नहीं : आचार्य
बड़ौत (बागपत)। आचार्य सुंदर सागर महाराज ने कहा जनवाणी सुनने के लिए पुरुषार्थ करना होता है, बिना पुरुषार्थ के जनवाणी को सुनने और समझना संभव नहीं है। रविवार को विहर्ष सभागार मेें आयोजित धर्मसभा में उन्होंने कहा जैन शासन मेें वक्ता की परिणामिका के साथ श्रोताओं का वर्णन आता है, आचार्य वीरसैन स्वामी ने धवला पुस्तक में 17 प्रकार के श्रोताओं का वर्णन किया है, जैसे न पानी पीती है और न ही पीने देती है, सारे पानी को गंदा कर देती है, एक सुरों का उसी प्रकार का होता है, जो स्वयं उपदेश सुनता है और न ही सुनने देता है और सच्चे ज्ञान में दोष लगाता है। एक श्रोता हंस के समान होता है, वह ज्ञान मेें ज्ञानी जनों में साधु के प्रति उनकी साधना मेें जिनेंद्र प्रभु के चरणों में अत्यंत प्रति कोर रखता है, जैसे हंस की चोंच में ऐसी वशिष्ठ शक्ति होती है, वह दूध ग्रहण कर लेती है और पानी छोड़ देता है, उसी प्रकार ज्ञानी श्रोता तथ्य की बात को ग्रहण कर लेता है और कस्साय को बढ़ाने वाली बातों को छोड़ देता है, अपने कल्याण कर लेता है। इस मौके पर सुप्रिय जैन ने भजन प्रस्तुत करें। सुधर्म सागर ने 12 भावनाओं का चित्रण कराया। इसमेें मदनलाल, प्रमोद कुमार, अशोक कुमार, वरदान जैन, संदीप, शशि, सुनील, अतुल आदि रहे।
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बड़ौत (बागपत)। आचार्य सुंदर सागर महाराज ने कहा जनवाणी सुनने के लिए पुरुषार्थ करना होता है, बिना पुरुषार्थ के जनवाणी को सुनने और समझना संभव नहीं है। रविवार को विहर्ष सभागार मेें आयोजित धर्मसभा में उन्होंने कहा जैन शासन मेें वक्ता की परिणामिका के साथ श्रोताओं का वर्णन आता है, आचार्य वीरसैन स्वामी ने धवला पुस्तक में 17 प्रकार के श्रोताओं का वर्णन किया है, जैसे न पानी पीती है और न ही पीने देती है, सारे पानी को गंदा कर देती है, एक सुरों का उसी प्रकार का होता है, जो स्वयं उपदेश सुनता है और न ही सुनने देता है और सच्चे ज्ञान में दोष लगाता है। एक श्रोता हंस के समान होता है, वह ज्ञान मेें ज्ञानी जनों में साधु के प्रति उनकी साधना मेें जिनेंद्र प्रभु के चरणों में अत्यंत प्रति कोर रखता है, जैसे हंस की चोंच में ऐसी वशिष्ठ शक्ति होती है, वह दूध ग्रहण कर लेती है और पानी छोड़ देता है, उसी प्रकार ज्ञानी श्रोता तथ्य की बात को ग्रहण कर लेता है और कस्साय को बढ़ाने वाली बातों को छोड़ देता है, अपने कल्याण कर लेता है। इस मौके पर सुप्रिय जैन ने भजन प्रस्तुत करें। सुधर्म सागर ने 12 भावनाओं का चित्रण कराया। इसमेें मदनलाल, प्रमोद कुमार, अशोक कुमार, वरदान जैन, संदीप, शशि, सुनील, अतुल आदि रहे।