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शिक्षा को इस्लाम में प्राथमिकत दी- मौलाना
Updated Thu, 26 Jul 2018 01:32 AM IST
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बड़ौत (बागपत)।
मरकजी मस्जिद फूंसवाली बड़ौत के इमाम और जमीयत उलेमा-ए-हिन्द के जिला महासचिव मौलाना आरिफ उल हक ने कहा कि शिक्षा को इस्लाम में प्राथमिकता दी और शिक्षा ग्रहण करना हर मुसलमान का कर्त्तव्य है
टांडा गांव में स्थित मदरसा दारुल उलूम मुज्जफरिया के प्रांगण में दीनी तालीम के कार्यक्रम का आयोजन किया। इसकी शुरुआत कलाम पाक की तिलावत के साथ हुई। इसमें मदरसे की छात्राओं का दीनी तकरीर में मुकाबला हुआ। इसमें मुख्य अतिथि मरकजी मस्जिद फूंसवाली बड़ौत के इमाम और जमीयत उलेमा-ए-हिन्द के जिला महासचिव मौलाना आरिफ उल हक ने कहा कि मजहबे इस्लाम में ईमान बहुत बड़ी दौलत है और दीन-ए-इस्लाम जिंदगी गुजारने का बेहतर तरीका है। दुनिया में सबसे अमन पसंद मजहब इस्लाम है और मदरसों में दी जाने वाली तालीम आपस में मोहब्बत और भाईचारे का पाठ पढ़ाने की दी जाती है। उन्होंने कहा हर व्यक्ति अपने बच्चों को दीनी तालीम के साथ साथ दुनियावी तालीम भी जरूर दे।
मदरसे के मोहतमिन मुफ़्ती शहजाद ने कहा कि मदरसों का हमारे मुल्क को आजाद कराने में बहुत योगदान रहा है । मदरसों में मजहबी तालीम के साथ साथ दुनियावी तालीम भी दी जानी चाहिए ताकि बच्चे दुनिया और आख़िरत में कामयाब हो। इस दौरान मौलाना अकरम फैयाजी, मौलाना सत्तार, मुफ़्ती रागिब, मास्टर जिसान, हाफिज शाहिद, नाजरीन, नगमा, शहजादी, अदिबा, इमराना, वशीया आदि रहे।
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मरकजी मस्जिद फूंसवाली बड़ौत के इमाम और जमीयत उलेमा-ए-हिन्द के जिला महासचिव मौलाना आरिफ उल हक ने कहा कि शिक्षा को इस्लाम में प्राथमिकता दी और शिक्षा ग्रहण करना हर मुसलमान का कर्त्तव्य है
टांडा गांव में स्थित मदरसा दारुल उलूम मुज्जफरिया के प्रांगण में दीनी तालीम के कार्यक्रम का आयोजन किया। इसकी शुरुआत कलाम पाक की तिलावत के साथ हुई। इसमें मदरसे की छात्राओं का दीनी तकरीर में मुकाबला हुआ। इसमें मुख्य अतिथि मरकजी मस्जिद फूंसवाली बड़ौत के इमाम और जमीयत उलेमा-ए-हिन्द के जिला महासचिव मौलाना आरिफ उल हक ने कहा कि मजहबे इस्लाम में ईमान बहुत बड़ी दौलत है और दीन-ए-इस्लाम जिंदगी गुजारने का बेहतर तरीका है। दुनिया में सबसे अमन पसंद मजहब इस्लाम है और मदरसों में दी जाने वाली तालीम आपस में मोहब्बत और भाईचारे का पाठ पढ़ाने की दी जाती है। उन्होंने कहा हर व्यक्ति अपने बच्चों को दीनी तालीम के साथ साथ दुनियावी तालीम भी जरूर दे।
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मदरसे के मोहतमिन मुफ़्ती शहजाद ने कहा कि मदरसों का हमारे मुल्क को आजाद कराने में बहुत योगदान रहा है । मदरसों में मजहबी तालीम के साथ साथ दुनियावी तालीम भी दी जानी चाहिए ताकि बच्चे दुनिया और आख़िरत में कामयाब हो। इस दौरान मौलाना अकरम फैयाजी, मौलाना सत्तार, मुफ़्ती रागिब, मास्टर जिसान, हाफिज शाहिद, नाजरीन, नगमा, शहजादी, अदिबा, इमराना, वशीया आदि रहे।
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