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चंद्रप्रभु भगवान की पालकी यात्रा के साथ दशलक्षण पर्व का शुभारंभ
Updated Sun, 27 Aug 2017 02:12 AM IST
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बड़ौत (बागपत)। चंद्र प्रभु भगवान की पालकी यात्रा के साथ दशलक्षण पर्व का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर जैन मंदिरों में विधि-विधान शुरू किए और जैन मंदिरों और उनके रास्तों पर बिजली की विशेष सजावट की गई।
दशलक्षण पर्व के प्रथम दिन ऐलाचार्य प्रभावना भूषण महाराज और अनुमान सागर महाराज के सानिध्य में चंद्र प्रभु भगवान की पालकी यात्रा धूमधाम से निकाली गई जो दिगंबर जैन बड़ा मंदिर से शुरू होकर हाथीखाना, गांधी चौक, लोहिया बाजार, ठाकुरद्वारा, संजय मूर्ति, नेहरू मूर्ति, घट्टा बाजार होते बड़ा जैन मंदिर में समाप्त हुई। इसमें बैंड-बाजें धार्मिक धुन बजाते चले और पालकी में चंद्रप्रभु भगवान की प्रतिमा विराजमान रही। इनकी जगह-जगह पूजा-अर्चना की गई।
बड़े जैन मंदिर में चंद्र प्रभु भगवान की प्रतिमा विराजमान की और मंदिर में जैन युवा मंच के सौजन्य तेरहदीप महामंडल विधान का शुभारंभ हुआ। पहले दिन भगवान चंद्रप्रभु का अभिषेक किया । इसके बाद नित्य नियम की पूजा की। यह विधान पंडित अमरचंद शास्त्री के निर्देशन तथा प्रेमप्रकाश जैन की संगीत की लहरियों के बीच शुरू हुआ। इस विधान में सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य प्रवीण जैन को, यज नायक अरविंद जैन, कुबेर संयम जैन, इशान इंद्र सुशील जैन को प्राप्त हुआ। विधान के शुभारंभ पर झंडारोहण अशोक जैन, दीप प्रज्ज्वलन अरुण जैन ने किया। रात्रि में बड़ा जैन मंदिर में भगवान की संगीतमय आरती उतारी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति हुई। इस मौके पर प्रवीण जैन, अतुल जैन, सुशील जैन, सुरेंद्र, अतुल जैन, अमित जैन आदि रहे।
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अपने अंदर क्षमा भावना रखे - अनुमान सागर महाराज
बड़ौत। दशलक्षण पर्व के प्रथम दिन दिगंबर जैन अतिथि भवन में अनुमान सागर महाराज ने कहा आज उत्तम क्षमा धर्म को धारण करने का दिवस है। उत्तम क्षमा का अर्थ क्षमा करना है, क्योंकि यहां उत्तम विशेष विद्यमान है।
उत्तम क्षमा धर्म की पूजा अर्चना की
बड़ौत। दशलक्षण पर्व के प्रथम दिन अजितनाथ मंदिर कमेटी के तत्वावधान में आचार्य सुंदर सागर महराज के सानिध्य में श्रद्धालुओं ने उत्तम क्षमा धर्म की पूजा की। विहर्ष सभागार सत्यवती जैन धर्मशाला में जैन श्रद्धालुओं ने भक्ति पूर्वक जिनेंद्र भगवान की अर्चना की। आचार्य सुंदर सागर महाराज ने पूजन शिविर मध्य से श्रद्धालुओं को पूजा की विधि विस्तार से समझाई। पीत वस्त्रधारी इंद्रों ने गर्म प्रासुक जल से अजितनाथ भगवान, पार्श्वनाथ भगवान और महावीर भगवान की प्रतिमा का अभिषेक किया। ब्रह्मचारिणी रीता दीदी ने विधि-विधान से देवशास्त्र गुरू देव शास्त्र, गुरू पूजन, दशलक्षण पूजन, सोलहकरण पूजा कराई। संगीतकार हरदास एंड पार्टी के मधुर भजनों पर श्रद्धालु भाव विभोर होकर नृत्य करने लगे। झंडारोहण राकेश जैन ने किया। विधान के मध्य बोलते हुए आचार्य सुंदर सागर महाराज ने कहा आज उत्तम क्षमा धर्म का दिन है। आप सभी को अपने भीतर क्षमा धारण करनी चाहिए। पूजा में प्रमोद जैन, वरदान जैन, प्रवीण जैन, मधु जैन, इंद्राणी, सरला जैन, सुनीता जैन आदि रहे। रात्रि में दशलक्षण पर्व पर विशेष आरती उतार। बाद श्यादवाद संगीत मंडल ने भजन संध्या की प्रस्तुति की ।
क्रोध का अभाव करना उत्तम क्षमा है - प्रासुक जैन शास्त्री
बड़ौत। महावीर स्वामी दिगंबर जैन प्रमागम मंदिर तीरगरान में धार्मिक जैन सभा में पंडित प्रासुक जैन शास्त्री ने दशलक्षण महा पर्व के प्रसंग में कहा उत्तम क्षमा का प्रथम दिन है। क्रोध का अभाव करना उत्तम क्षमा है। जब इस जीव को क्रोध का उदय आता है तो वह अपने परिवार का घात कर लेता है। उन्होंने कहा क्रोध मनुष्य का स्वभाव नहीं, क्रोध मनुष्य की विकारी पर्याय है। आत्मा का स्वभाव तो शांत है। प्रात:काल दशलक्षण धर्म पंचमेरू पूजन देवशास्त्र गुरू की पूजा की । सायंकाल गुरू भक्ति एवं सांस्कृतिक धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया । धर्मसभा का शुभारंभ मंदिर कमेटी के अध्यक्ष विनोद जैन एडवोकेट ने झंडारोहण से किया। इसमें प्रेमचंद जैन, सुमत प्रसाद जैन, वकील चंद जैन, सुनील जैन, भूषण कुमार जैन, भगत, विरेंद्र, राहुल जैन, प्रमोद जैन आदि रहे।
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दशलक्षण पर्व के प्रथम दिन ऐलाचार्य प्रभावना भूषण महाराज और अनुमान सागर महाराज के सानिध्य में चंद्र प्रभु भगवान की पालकी यात्रा धूमधाम से निकाली गई जो दिगंबर जैन बड़ा मंदिर से शुरू होकर हाथीखाना, गांधी चौक, लोहिया बाजार, ठाकुरद्वारा, संजय मूर्ति, नेहरू मूर्ति, घट्टा बाजार होते बड़ा जैन मंदिर में समाप्त हुई। इसमें बैंड-बाजें धार्मिक धुन बजाते चले और पालकी में चंद्रप्रभु भगवान की प्रतिमा विराजमान रही। इनकी जगह-जगह पूजा-अर्चना की गई।
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बड़े जैन मंदिर में चंद्र प्रभु भगवान की प्रतिमा विराजमान की और मंदिर में जैन युवा मंच के सौजन्य तेरहदीप महामंडल विधान का शुभारंभ हुआ। पहले दिन भगवान चंद्रप्रभु का अभिषेक किया । इसके बाद नित्य नियम की पूजा की। यह विधान पंडित अमरचंद शास्त्री के निर्देशन तथा प्रेमप्रकाश जैन की संगीत की लहरियों के बीच शुरू हुआ। इस विधान में सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य प्रवीण जैन को, यज नायक अरविंद जैन, कुबेर संयम जैन, इशान इंद्र सुशील जैन को प्राप्त हुआ। विधान के शुभारंभ पर झंडारोहण अशोक जैन, दीप प्रज्ज्वलन अरुण जैन ने किया। रात्रि में बड़ा जैन मंदिर में भगवान की संगीतमय आरती उतारी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति हुई। इस मौके पर प्रवीण जैन, अतुल जैन, सुशील जैन, सुरेंद्र, अतुल जैन, अमित जैन आदि रहे।
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अपने अंदर क्षमा भावना रखे - अनुमान सागर महाराज
बड़ौत। दशलक्षण पर्व के प्रथम दिन दिगंबर जैन अतिथि भवन में अनुमान सागर महाराज ने कहा आज उत्तम क्षमा धर्म को धारण करने का दिवस है। उत्तम क्षमा का अर्थ क्षमा करना है, क्योंकि यहां उत्तम विशेष विद्यमान है।
उत्तम क्षमा धर्म की पूजा अर्चना की
बड़ौत। दशलक्षण पर्व के प्रथम दिन अजितनाथ मंदिर कमेटी के तत्वावधान में आचार्य सुंदर सागर महराज के सानिध्य में श्रद्धालुओं ने उत्तम क्षमा धर्म की पूजा की। विहर्ष सभागार सत्यवती जैन धर्मशाला में जैन श्रद्धालुओं ने भक्ति पूर्वक जिनेंद्र भगवान की अर्चना की। आचार्य सुंदर सागर महाराज ने पूजन शिविर मध्य से श्रद्धालुओं को पूजा की विधि विस्तार से समझाई। पीत वस्त्रधारी इंद्रों ने गर्म प्रासुक जल से अजितनाथ भगवान, पार्श्वनाथ भगवान और महावीर भगवान की प्रतिमा का अभिषेक किया। ब्रह्मचारिणी रीता दीदी ने विधि-विधान से देवशास्त्र गुरू देव शास्त्र, गुरू पूजन, दशलक्षण पूजन, सोलहकरण पूजा कराई। संगीतकार हरदास एंड पार्टी के मधुर भजनों पर श्रद्धालु भाव विभोर होकर नृत्य करने लगे। झंडारोहण राकेश जैन ने किया। विधान के मध्य बोलते हुए आचार्य सुंदर सागर महाराज ने कहा आज उत्तम क्षमा धर्म का दिन है। आप सभी को अपने भीतर क्षमा धारण करनी चाहिए। पूजा में प्रमोद जैन, वरदान जैन, प्रवीण जैन, मधु जैन, इंद्राणी, सरला जैन, सुनीता जैन आदि रहे। रात्रि में दशलक्षण पर्व पर विशेष आरती उतार। बाद श्यादवाद संगीत मंडल ने भजन संध्या की प्रस्तुति की ।
क्रोध का अभाव करना उत्तम क्षमा है - प्रासुक जैन शास्त्री
बड़ौत। महावीर स्वामी दिगंबर जैन प्रमागम मंदिर तीरगरान में धार्मिक जैन सभा में पंडित प्रासुक जैन शास्त्री ने दशलक्षण महा पर्व के प्रसंग में कहा उत्तम क्षमा का प्रथम दिन है। क्रोध का अभाव करना उत्तम क्षमा है। जब इस जीव को क्रोध का उदय आता है तो वह अपने परिवार का घात कर लेता है। उन्होंने कहा क्रोध मनुष्य का स्वभाव नहीं, क्रोध मनुष्य की विकारी पर्याय है। आत्मा का स्वभाव तो शांत है। प्रात:काल दशलक्षण धर्म पंचमेरू पूजन देवशास्त्र गुरू की पूजा की । सायंकाल गुरू भक्ति एवं सांस्कृतिक धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया । धर्मसभा का शुभारंभ मंदिर कमेटी के अध्यक्ष विनोद जैन एडवोकेट ने झंडारोहण से किया। इसमें प्रेमचंद जैन, सुमत प्रसाद जैन, वकील चंद जैन, सुनील जैन, भूषण कुमार जैन, भगत, विरेंद्र, राहुल जैन, प्रमोद जैन आदि रहे।