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ईख के खेत में उड़द की फसल की कराई क्राप कटिंग
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बागपत। छपरौली क्षेत्र में किसान सह फसली खेती की राहत पर चल पडे़ हैं। रविवार को एडीओ कृषि महेश कुमार खोखर ने रठौड़ा गांव में ओम सिंह और सिलाना गांव में पीतम के ईख के खेत में उगाई जा रही उड़द की क्राप कटिंग कराई।
एडीओ कृषि ने बताया कि यहां पर उड़द की फसल का अच्छा प्रदर्शन मिला। सिलाना में पीतम के खेत में उड़द की पैदावार 18.12 क्विंटल हुई। जबकि रठौड़ा में ओम सिंह के खेत में 20.57 क्विंटल उड़द की पैदावार हुई। उन्होंने बताया कि सहफसली खेती होने के कारण फसल में कोई रोग नहीं लगा। किसी भी तरह का खाद और उर्वरक भी नहीं देना पड़ा। उन्होंने बताया कि दलहनी फसलों की जड़ों में नाइट्रोजन के बैक्टीरिया पाए जाते हैं। ये वायुमंडल से नाइट्रोजन को ग्रहण कर पौधे को देते हैं। किसानों का कहना है कि सह फसली खेती घाटे का सौदा नहीं है। यदि उड़द का हिसाब लगाया जाए तो दोनों किसानों को अतिरिक्त आय भी होगी। एडीओ कृषि ने बताया कि जिले के 45 कृषकों को उड़द का बीज वितरण किया।
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एडीओ कृषि ने बताया कि यहां पर उड़द की फसल का अच्छा प्रदर्शन मिला। सिलाना में पीतम के खेत में उड़द की पैदावार 18.12 क्विंटल हुई। जबकि रठौड़ा में ओम सिंह के खेत में 20.57 क्विंटल उड़द की पैदावार हुई। उन्होंने बताया कि सहफसली खेती होने के कारण फसल में कोई रोग नहीं लगा। किसी भी तरह का खाद और उर्वरक भी नहीं देना पड़ा। उन्होंने बताया कि दलहनी फसलों की जड़ों में नाइट्रोजन के बैक्टीरिया पाए जाते हैं। ये वायुमंडल से नाइट्रोजन को ग्रहण कर पौधे को देते हैं। किसानों का कहना है कि सह फसली खेती घाटे का सौदा नहीं है। यदि उड़द का हिसाब लगाया जाए तो दोनों किसानों को अतिरिक्त आय भी होगी। एडीओ कृषि ने बताया कि जिले के 45 कृषकों को उड़द का बीज वितरण किया।
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