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जुर्माने के बाद भी उपलब्ध कराई जाएगी सूचना : आयुक्त
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बागपत। राज्य सूचना आयुक्त नरेंद्र कुमार श्रीवास्तव की अध्यक्षता में जनपद के जन सूचना अधिकारियों व प्रथम अपीलीय अधिकारियों को एक दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया। आयुक्त ने कहा जन सूचना अधिकारियों से कहा के सूचना का अधिकार अधिनियम एक क्रांतिकारी अधिनियम है।
कलक्ट्रेट में प्रशिक्षण के दौरान आयुक्त नरेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि बिना तर्कसंगत कारणों के सूचना न देना या जानबूझकर भ्रमित सूचना देना इस सोच को बदलना होगा। बाधा उत्पन्न करने पर धारा 20 (1) के तहत 250 से 25 हजार तक का दंड में धारा 20 (2) के तहत अनुशासनिक कार्रवाई का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि धरातल पर सूचना के अधिकार अधिनियम को प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन करने के लिए अधिनियम की धारा 27 के अंतर्गत वर्ष 2015 में उत्तर प्रदेश सूचना का अधिकार नियमावली बनाई गई। सूचना आयुक्त ने कहा कि सभी जन सूचना अधिकारी अपने-अपने कार्यालय में प्रारूप 3 के अंतर्गत वर्णित आवेदन पत्र रजिस्टर आवश्यक रूप से बनाए। आवेदक की पावती आवेदक को आवश्यक रूप से भेजे। सूचना आयुक्त ने कहा कि ऐसी सूचना जिसके देने से लोक प्राधिकरण की 75 प्रतिशत और कर्मियों का 75 प्रतिशत समय सूचना एकत्रित करने में देने में लगने की संभावना है ऐसी सूचना नहीं दी जाए। विस्तृत सूचना भी नहीं दी जाएगी, जिससे कार्य प्रभावित हो। मांगी सूचना दो या दो से अधिक अन्य विभागों से संबंधित है तो ऐसी सूचना को आवेदक को इस अनुरोध के साथ वापस किया जाता है कि वह संबंधित विभाग में अलग-अलग आवेदन कर सूचना प्राप्त कर लें।
राज्य सूचना आयोग के रजिस्टार जितेंद्र मिश्रा ने बताया कि जन सूचना अधिकारी अपने उत्तर में आवश्यक रूप से प्रथम अपीलीय अधिकारी का नाम व पद नाम अवश्य लिखे। यह भी लिखे कि अगर आवेदक उनकी दी सूचना से संतुष्ट नहीं है तो वह प्रथम अपीलीय अधिकारी को अपील कर सकता है। थर्ड पार्टी से संबंधित सूचना के संबंध में निर्णय यह सूचना 40 दिन में तथा मानव अधिकार से संबंधित सूचना का निस्तारण 45 दिन में करना होता है। डीएम पवन कुमार ने सभी जन सूचना अधिकारी व अपीलीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि जो आरटीआई बुक दी गई है, उसका सभी अधिकारी अभ्यास करें और हैंडबुक के रूप में उसे इस्तेमाल करें। उन्होंने कहा सूचना देने से कोई भी संबंधित अधिकारी बचने की कोशिश नहीं करें। एसपी शैलेष कुमार पांडेय, सीडीओ पीसी जायसवाल, एडीएम अनिल कुमार मिश्रा, उप कृषि निदेशक प्रशांत कुमार, डीडीओ हुबलाल, एक्सईएन विद्युत राजीव कुमार आर्य सहित जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद रहे।
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सूचना एक बार मांगे या दस बार समय पर दी जाएगी : : राज्य सूचना आयुक्त
बागपत। राज्य सूचना आयुक्त नरेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि लोग सूचना एक बार मांगे या दस बार अधिकारी को सूचना देनी होगी। जुर्माना लगाने के बाद भी सूचना नहीं दे रहे हैं उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई निर्धारित की गई है। विभाग द्वारा दी गई सूचना से संतुष्ट नहीं होने पर बार-बार सूचना मांगी जा सकती है।
कलक्टे्रट सभागार में पत्रकारों से वार्ता करते हुए राज्य सूचना आयुक्त नरेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि कार्यशाला मुख्य उद्देश्य अधिकारियों को सुलभ और अच्छी तरह से मांगी गई सूचना का जवाब देना है। उन्होंने कहा कि सूचना का अधिकार लोगों की सुविधा के लिए बनाया गया है। जिसके तहत कोई भी व्यक्ति अधिकारियों से सूचना मांग सकता है, जो इसके नियम है उसको पूरा करना होगा। इसके लिए हर व्यक्ति स्वतंत्र है। मांगी गई सूचना का जवाब जन सूचना अधिकारी को देना होगा। चाहे वह एक बार सूचना मांगे या दस बार उसके संतुष्ट करना अधिकारी का कर्तव्य है। जिले में कोई लंबित प्रकरण इतने नहीं मिले। वैसे मंडल में करीब साढ़े चार है प्रकरण लंबित हैं। जन सूचना अधिकारी का जिस कार्यालय में रिक्त पद है, वहां अधिकारियों की नियुक्ति होगी। कहा कि अधिकारी यह न समझे जुर्माना लग गया है और अब सूचना नहीं देनी पड़ेगी। जुर्माने के बाद सूचना भी देनी पड़ेगी और उसके बाद नियमानुसार कार्रवाई भी निर्धारित है। कहा कि आम जन अधिवक्ता के माध्यम से नहीं सीधे भी सूचना मांग सकते हैं।
कई विभाग से गायब थे जन सूचना अधिकारी
आरटीआई के तहत विभिन्न विभागों में नियुक्त प्रथम अपीलीय और जन सूचना अधिकारियों को पहुंचना जरूरी थी। उन्हीं के माध्यम से सूचना आवेदक तक पहुंचाई जाती है। कार्यालय में ऐसे कई विभाग के जन सूचना अधिकारी तो जो कार्यशाला से गायब थे। उन्होंने अपने जगह ऐसे कर्मचारी को भेजा हुआ था जिसे आरटीआई के तहत कोई कार्य नहीं करना है। लिपिक कार्यशाला में बैठे हुए प्रशिक्षण ले रहे थे।
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कलक्ट्रेट में प्रशिक्षण के दौरान आयुक्त नरेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि बिना तर्कसंगत कारणों के सूचना न देना या जानबूझकर भ्रमित सूचना देना इस सोच को बदलना होगा। बाधा उत्पन्न करने पर धारा 20 (1) के तहत 250 से 25 हजार तक का दंड में धारा 20 (2) के तहत अनुशासनिक कार्रवाई का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि धरातल पर सूचना के अधिकार अधिनियम को प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन करने के लिए अधिनियम की धारा 27 के अंतर्गत वर्ष 2015 में उत्तर प्रदेश सूचना का अधिकार नियमावली बनाई गई। सूचना आयुक्त ने कहा कि सभी जन सूचना अधिकारी अपने-अपने कार्यालय में प्रारूप 3 के अंतर्गत वर्णित आवेदन पत्र रजिस्टर आवश्यक रूप से बनाए। आवेदक की पावती आवेदक को आवश्यक रूप से भेजे। सूचना आयुक्त ने कहा कि ऐसी सूचना जिसके देने से लोक प्राधिकरण की 75 प्रतिशत और कर्मियों का 75 प्रतिशत समय सूचना एकत्रित करने में देने में लगने की संभावना है ऐसी सूचना नहीं दी जाए। विस्तृत सूचना भी नहीं दी जाएगी, जिससे कार्य प्रभावित हो। मांगी सूचना दो या दो से अधिक अन्य विभागों से संबंधित है तो ऐसी सूचना को आवेदक को इस अनुरोध के साथ वापस किया जाता है कि वह संबंधित विभाग में अलग-अलग आवेदन कर सूचना प्राप्त कर लें।
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राज्य सूचना आयोग के रजिस्टार जितेंद्र मिश्रा ने बताया कि जन सूचना अधिकारी अपने उत्तर में आवश्यक रूप से प्रथम अपीलीय अधिकारी का नाम व पद नाम अवश्य लिखे। यह भी लिखे कि अगर आवेदक उनकी दी सूचना से संतुष्ट नहीं है तो वह प्रथम अपीलीय अधिकारी को अपील कर सकता है। थर्ड पार्टी से संबंधित सूचना के संबंध में निर्णय यह सूचना 40 दिन में तथा मानव अधिकार से संबंधित सूचना का निस्तारण 45 दिन में करना होता है। डीएम पवन कुमार ने सभी जन सूचना अधिकारी व अपीलीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि जो आरटीआई बुक दी गई है, उसका सभी अधिकारी अभ्यास करें और हैंडबुक के रूप में उसे इस्तेमाल करें। उन्होंने कहा सूचना देने से कोई भी संबंधित अधिकारी बचने की कोशिश नहीं करें। एसपी शैलेष कुमार पांडेय, सीडीओ पीसी जायसवाल, एडीएम अनिल कुमार मिश्रा, उप कृषि निदेशक प्रशांत कुमार, डीडीओ हुबलाल, एक्सईएन विद्युत राजीव कुमार आर्य सहित जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद रहे।
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सूचना एक बार मांगे या दस बार समय पर दी जाएगी : : राज्य सूचना आयुक्त
बागपत। राज्य सूचना आयुक्त नरेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि लोग सूचना एक बार मांगे या दस बार अधिकारी को सूचना देनी होगी। जुर्माना लगाने के बाद भी सूचना नहीं दे रहे हैं उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई निर्धारित की गई है। विभाग द्वारा दी गई सूचना से संतुष्ट नहीं होने पर बार-बार सूचना मांगी जा सकती है।
कलक्टे्रट सभागार में पत्रकारों से वार्ता करते हुए राज्य सूचना आयुक्त नरेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि कार्यशाला मुख्य उद्देश्य अधिकारियों को सुलभ और अच्छी तरह से मांगी गई सूचना का जवाब देना है। उन्होंने कहा कि सूचना का अधिकार लोगों की सुविधा के लिए बनाया गया है। जिसके तहत कोई भी व्यक्ति अधिकारियों से सूचना मांग सकता है, जो इसके नियम है उसको पूरा करना होगा। इसके लिए हर व्यक्ति स्वतंत्र है। मांगी गई सूचना का जवाब जन सूचना अधिकारी को देना होगा। चाहे वह एक बार सूचना मांगे या दस बार उसके संतुष्ट करना अधिकारी का कर्तव्य है। जिले में कोई लंबित प्रकरण इतने नहीं मिले। वैसे मंडल में करीब साढ़े चार है प्रकरण लंबित हैं। जन सूचना अधिकारी का जिस कार्यालय में रिक्त पद है, वहां अधिकारियों की नियुक्ति होगी। कहा कि अधिकारी यह न समझे जुर्माना लग गया है और अब सूचना नहीं देनी पड़ेगी। जुर्माने के बाद सूचना भी देनी पड़ेगी और उसके बाद नियमानुसार कार्रवाई भी निर्धारित है। कहा कि आम जन अधिवक्ता के माध्यम से नहीं सीधे भी सूचना मांग सकते हैं।
कई विभाग से गायब थे जन सूचना अधिकारी
आरटीआई के तहत विभिन्न विभागों में नियुक्त प्रथम अपीलीय और जन सूचना अधिकारियों को पहुंचना जरूरी थी। उन्हीं के माध्यम से सूचना आवेदक तक पहुंचाई जाती है। कार्यालय में ऐसे कई विभाग के जन सूचना अधिकारी तो जो कार्यशाला से गायब थे। उन्होंने अपने जगह ऐसे कर्मचारी को भेजा हुआ था जिसे आरटीआई के तहत कोई कार्य नहीं करना है। लिपिक कार्यशाला में बैठे हुए प्रशिक्षण ले रहे थे।