{"_id":"5c55ef60bdec2217f5587bd8","slug":"151549135712-baghpat-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मात्र चार इंच की खोदाई से प्राप्त हुई स्वर्ण निधि","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मात्र चार इंच की खोदाई से प्राप्त हुई स्वर्ण निधि
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बड़ौत (बागपत)।
शुक्रवार को बरसात एवं खराब मौसम को देखते हुए सिनौली गांव में उत्खनन कार्य पर ब्रेक लगाया गया था, लेकिन शनिवार को फिर से उत्खनन कार्य शुरू कर दिया गया।
एएसआई लालकिला संस्थान के निदेशक डॉ. संजय मंजुल भी सुबह साइट पर पहुंचे और उन्होंने ट्रेंच से निकली विशाल दीवार का भी बारीकी से अवलोकन किया। उनके निर्देशन में शनिवार को कंकाल मिलने वाले ट्रेंच के ठीक बराबर में एक अन्य ट्रेंच भी लगाया गया। इस ट्रेंच पर टीम द्वारा शुरू किए गए कार्य में मात्र चार इंच की खोदाई से ही स्वर्ण निधि प्राप्त हुई। एक ट्रेंच से टीम को मानव कंकाल के अलावा एक दर्जन से अधिक छोटे एवं बड़े पॉट के अलावा छोटी एंटीना शॉर्ड भी प्राप्त हो चुकी है, हालांकि इन्हें अभी जमीन से बाहर निकाल सुरक्षित नहीं किया जा सका है।
सूत्रों के अनुसार लगभग दो तौले वजनी यह स्वर्ण निधि पैरों या गले में पहने जाने वाले स्वर्ण भूषण से मेल खाती है। गत वर्ष यहीं से पांच स्वर्ण छल्ले/रिंग्स प्राप्त हुए थे, लेकिन इस बार स्वर्ण भूषण के रूप में यह स्वर्ण निधि मिलना अपने आप में बेहद महत्वपूर्ण है। यह कंकाल और स्वर्ण निधि हुबहू वैसी ही हैं जैसी कि 2005 की खुदाई में प्राप्त हुई थी और इनके समय का आंकलन 4500 वर्ष का आंका गया था। दूसरी तरफ प्राप्त स्वर्णनिधि के विषय में जब डॉ. संजय मंजुल से बात की तो उन्होंने कुछ भी बताने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि इस बारे में अभी कोई पुख्ता जानकारी नहीं है। उन्होंने इतना जरूर कहा कि एक ट्रेंच से दीवार के प्रमाण मिले हैं, इस दीवार को पूरी तरह से बाहर निकालने के लिए ट्रेंच की खुदाई को आगे बढ़ाया जा रहा है। दूसरी तरफ 12 साल बद श्रीराम के खेत में उत्खनन शुरू होने के बाद श्रीराम व उसका परिवार काफी उत्साहित है।
विज्ञापन
विज्ञापन
शुक्रवार को बरसात एवं खराब मौसम को देखते हुए सिनौली गांव में उत्खनन कार्य पर ब्रेक लगाया गया था, लेकिन शनिवार को फिर से उत्खनन कार्य शुरू कर दिया गया।
एएसआई लालकिला संस्थान के निदेशक डॉ. संजय मंजुल भी सुबह साइट पर पहुंचे और उन्होंने ट्रेंच से निकली विशाल दीवार का भी बारीकी से अवलोकन किया। उनके निर्देशन में शनिवार को कंकाल मिलने वाले ट्रेंच के ठीक बराबर में एक अन्य ट्रेंच भी लगाया गया। इस ट्रेंच पर टीम द्वारा शुरू किए गए कार्य में मात्र चार इंच की खोदाई से ही स्वर्ण निधि प्राप्त हुई। एक ट्रेंच से टीम को मानव कंकाल के अलावा एक दर्जन से अधिक छोटे एवं बड़े पॉट के अलावा छोटी एंटीना शॉर्ड भी प्राप्त हो चुकी है, हालांकि इन्हें अभी जमीन से बाहर निकाल सुरक्षित नहीं किया जा सका है।
विज्ञापन
सूत्रों के अनुसार लगभग दो तौले वजनी यह स्वर्ण निधि पैरों या गले में पहने जाने वाले स्वर्ण भूषण से मेल खाती है। गत वर्ष यहीं से पांच स्वर्ण छल्ले/रिंग्स प्राप्त हुए थे, लेकिन इस बार स्वर्ण भूषण के रूप में यह स्वर्ण निधि मिलना अपने आप में बेहद महत्वपूर्ण है। यह कंकाल और स्वर्ण निधि हुबहू वैसी ही हैं जैसी कि 2005 की खुदाई में प्राप्त हुई थी और इनके समय का आंकलन 4500 वर्ष का आंका गया था। दूसरी तरफ प्राप्त स्वर्णनिधि के विषय में जब डॉ. संजय मंजुल से बात की तो उन्होंने कुछ भी बताने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि इस बारे में अभी कोई पुख्ता जानकारी नहीं है। उन्होंने इतना जरूर कहा कि एक ट्रेंच से दीवार के प्रमाण मिले हैं, इस दीवार को पूरी तरह से बाहर निकालने के लिए ट्रेंच की खुदाई को आगे बढ़ाया जा रहा है। दूसरी तरफ 12 साल बद श्रीराम के खेत में उत्खनन शुरू होने के बाद श्रीराम व उसका परिवार काफी उत्साहित है।
विज्ञापन