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पुलिस ही कानून तोड़े तो कैसे और कितनी मिलेगी सजा
Updated Sun, 25 Nov 2018 01:07 AM IST
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बड़ौत (बागपत)। अमर उजाला फाउंडेशन के अनूठे अभियान अपराजिता के तहत छात्राओं को कानून की जानकारी देने के लिए पुलिस की पाठशाला का आयोजन किया। ग्रोवेल गर्ल्स स्कूल में छात्राओं को ट्रैफिक नियम और अन्य कानून की जानकारी दी। छात्राओं ने सवाल उठाया कि हेल्प लाइन पर कॉल अगर रिसीव नहीं होती तो पुलिस कैसे मदद करेगी। यदि पुलिस ही कानून तोड़ने लगे तो उनके खिलाफ कौन कार्रवाई करेगा।
शनिवार को ग्रोवेल गर्ल्स स्कूल में सीओ बड़ौत रामानंद कुशवाहा ने छात्राओं को कानून की जानकारी दी। उन्होंने कहा कहा हौसला हर मुश्किल से बचाने में अचूक अस्त्र है। सावधानी और जागरूकता भी जरूरी है। किसी भी मुश्किल की स्थिति में हेल्प लाइन नंबर 1090 और 100 पर कॉल करें, पुलिस तुरंत मदद के लिए पहुंचेगी। इसके अलावा स्कूल आने जाने वाली छात्राएं स्कूल और अपने घर का नंबर भी अपने साथ रखे। इस दौरान स्कूल के प्रधानाचार्य कमलदीप जिंदल, संगीता अग्रवाल, मंजू शर्मा, नीता तोमर, रिया जैन और संदूरिया मौजूद रहीं।
क्या करें बेटियां
बड़ौत। रमाला थाने की एसआई चंद्र रेखा ने छात्राओं को सुरक्षा के टिप्स दिए। छात्राओं को खेलकूद और योगाभ्यास में शामिल होने की सलाह दी, इससे वह शारीरिक रूप से मजबूत बन सकें। सुनसान इलाकों से गुजरने से बचने और सड़क पर समूह में चलने और एक-दूसरे की मदद करने की बात कही। किसी भी असहज स्थिति को टालने के बजाए घर पर माता-पिता से शेयर करें। पेंसिल बॉक्स की मदद से खुद की सुरक्षा की जानकारी दी।
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तनु चौधरी : मानसिक रूप से यदि कोई किसी को टार्चर करता है तो उस पर क्या कार्रवाई होगी।
सीओ बड़ौत : इस तरह के मामलों में पुलिस काउंसिलिंग करती है। हेल्प लाइन की मदद ली जाती है। यदि बात नहीं बनतीं तो संबंधित धारा में मुकदमा दर्ज किया जाता है।
नित्या : यदि कोई पुलिस वाला ही किसी के साथ गलत हरकत करें तो सजा का क्या प्रावधान है।
सीओ बड़ौत : कानून सबके लिए बराबर है। पुलिसकर्मी को भी एक आम आदमी की तरह ही सजा दी जाती है। जिस तरह का कानून तोड़ा जाता है, उसी तरह की सजा मिलती है।
कीर्ति मलिक : यदि डायल 100 पर कॉल रिसीव नहीं होती और पुलिस नहीं पहुंचती तो किसकी जिम्मेदारी है।
सीओ बड़ौत : हेल्प लाइन सेवा पर कॉल रिसीव होती है। कई बार गलत नंबर भी लोग डायल कर देते हैं। हेल्प लाइन सेवा में मदद के समय को कम करने पर लखनऊ स्तर से ही काम किया जा रहा है।
निकिता : हमलावर अगर किसी का मुंह ही दबोच लें तो फिर क्या किया जाना चाहिए।
सीओ बड़ौत : इस तरह की स्थिति में अटैक कर के नाजुक अंगों पर जोर से चोट की जानी चाहिए। आंख, नाक, कान या होंठ पर प्रहार कर अटैक कर को चोटिल कर खुद को बचाया जा सकता है।
मनु तोमर : ट्रिपल राइडिंग पर पुलिस सख्त कार्रवाई क्यों नहीं करती।
सीओ बड़ौत : पुलिस नियमानुसार कानूनी कार्रवाई करती है। पहला मकसद लोगों को जागरूक करने और अपनी जान की हिफाजत की सीख देना होता है। पुलिस समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाती है।
प्रिंयाशी धनकड़ : ससुराल में किसी लड़की को प्रताड़ित किया जाता है तो क्या कानून है।
सीओ बड़ौत : इस तरह के मामले में हेल्प लाइन सेवाएं हैं। फैमिली कोर्ट अलग से हैं। दंपति या परिवार की काउंसिलिंग की प्रक्रिया होती है। मामला सुलझाने का प्रयास होता है।
हिमांशी तोमर : हेल्प लाइन का नंबर डायल करने के बाद कितने समय बाद पुलिस के पहुंचने का टाइम है, पुलिस देर से आती है तो क्या करेें।
सीओ बड़ौत : रिस्पांस टाइम 12 से 15 मिनट का होता है। हेल्प लाइन सेवा को सही पता बताया जाना जरूरी है। यदि हेल्प मिलने में देरी हो रही है तो अटैक कर को बातों में उलझकर समय निकालना चाहिए, पुलिस के पहुंचते ही मदद मिलेगी।
वैशाली तोमर : भ्रष्टाचार पर अंकुश कैसे लगाया जा सकता है।
सीओ बड़ौत : इस तरह की शिकायतें अधिकारियों के पास पहुंचते ही जांच कराई जाती है, दोषी मिलने पर कार्रवाई होती है। साथ ही लोगों को भी जागरूक किया जाता है कि किसी को रिश्वत न दें और कानून का पालन करें।
घर और समाज को करें जागरूक
बड़ौत। यातायात पुलिस की टीम ने छात्राओं को ट्रैफिक के नियम बताए। यातायात प्रभारी सुरेंद्र सिंह ने हेलमेट और सीट बेल्ट के प्रति जागरूक किया। यातायात पुलिसकर्मी इंद्राज, देवेंद्र और रोशन लाल आदि ने छात्राओं को यातायात नियम के प्रति जागरूक किया। साथ ही कहा अपने अभिभावकों व आसपास में रहने वालों को भी यातायात नियम का पालन करने के लिए प्रेरित करना चाहिए।
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शनिवार को ग्रोवेल गर्ल्स स्कूल में सीओ बड़ौत रामानंद कुशवाहा ने छात्राओं को कानून की जानकारी दी। उन्होंने कहा कहा हौसला हर मुश्किल से बचाने में अचूक अस्त्र है। सावधानी और जागरूकता भी जरूरी है। किसी भी मुश्किल की स्थिति में हेल्प लाइन नंबर 1090 और 100 पर कॉल करें, पुलिस तुरंत मदद के लिए पहुंचेगी। इसके अलावा स्कूल आने जाने वाली छात्राएं स्कूल और अपने घर का नंबर भी अपने साथ रखे। इस दौरान स्कूल के प्रधानाचार्य कमलदीप जिंदल, संगीता अग्रवाल, मंजू शर्मा, नीता तोमर, रिया जैन और संदूरिया मौजूद रहीं।
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क्या करें बेटियां
बड़ौत। रमाला थाने की एसआई चंद्र रेखा ने छात्राओं को सुरक्षा के टिप्स दिए। छात्राओं को खेलकूद और योगाभ्यास में शामिल होने की सलाह दी, इससे वह शारीरिक रूप से मजबूत बन सकें। सुनसान इलाकों से गुजरने से बचने और सड़क पर समूह में चलने और एक-दूसरे की मदद करने की बात कही। किसी भी असहज स्थिति को टालने के बजाए घर पर माता-पिता से शेयर करें। पेंसिल बॉक्स की मदद से खुद की सुरक्षा की जानकारी दी।
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तनु चौधरी : मानसिक रूप से यदि कोई किसी को टार्चर करता है तो उस पर क्या कार्रवाई होगी।
सीओ बड़ौत : इस तरह के मामलों में पुलिस काउंसिलिंग करती है। हेल्प लाइन की मदद ली जाती है। यदि बात नहीं बनतीं तो संबंधित धारा में मुकदमा दर्ज किया जाता है।
नित्या : यदि कोई पुलिस वाला ही किसी के साथ गलत हरकत करें तो सजा का क्या प्रावधान है।
सीओ बड़ौत : कानून सबके लिए बराबर है। पुलिसकर्मी को भी एक आम आदमी की तरह ही सजा दी जाती है। जिस तरह का कानून तोड़ा जाता है, उसी तरह की सजा मिलती है।
कीर्ति मलिक : यदि डायल 100 पर कॉल रिसीव नहीं होती और पुलिस नहीं पहुंचती तो किसकी जिम्मेदारी है।
सीओ बड़ौत : हेल्प लाइन सेवा पर कॉल रिसीव होती है। कई बार गलत नंबर भी लोग डायल कर देते हैं। हेल्प लाइन सेवा में मदद के समय को कम करने पर लखनऊ स्तर से ही काम किया जा रहा है।
निकिता : हमलावर अगर किसी का मुंह ही दबोच लें तो फिर क्या किया जाना चाहिए।
सीओ बड़ौत : इस तरह की स्थिति में अटैक कर के नाजुक अंगों पर जोर से चोट की जानी चाहिए। आंख, नाक, कान या होंठ पर प्रहार कर अटैक कर को चोटिल कर खुद को बचाया जा सकता है।
मनु तोमर : ट्रिपल राइडिंग पर पुलिस सख्त कार्रवाई क्यों नहीं करती।
सीओ बड़ौत : पुलिस नियमानुसार कानूनी कार्रवाई करती है। पहला मकसद लोगों को जागरूक करने और अपनी जान की हिफाजत की सीख देना होता है। पुलिस समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाती है।
प्रिंयाशी धनकड़ : ससुराल में किसी लड़की को प्रताड़ित किया जाता है तो क्या कानून है।
सीओ बड़ौत : इस तरह के मामले में हेल्प लाइन सेवाएं हैं। फैमिली कोर्ट अलग से हैं। दंपति या परिवार की काउंसिलिंग की प्रक्रिया होती है। मामला सुलझाने का प्रयास होता है।
हिमांशी तोमर : हेल्प लाइन का नंबर डायल करने के बाद कितने समय बाद पुलिस के पहुंचने का टाइम है, पुलिस देर से आती है तो क्या करेें।
सीओ बड़ौत : रिस्पांस टाइम 12 से 15 मिनट का होता है। हेल्प लाइन सेवा को सही पता बताया जाना जरूरी है। यदि हेल्प मिलने में देरी हो रही है तो अटैक कर को बातों में उलझकर समय निकालना चाहिए, पुलिस के पहुंचते ही मदद मिलेगी।
वैशाली तोमर : भ्रष्टाचार पर अंकुश कैसे लगाया जा सकता है।
सीओ बड़ौत : इस तरह की शिकायतें अधिकारियों के पास पहुंचते ही जांच कराई जाती है, दोषी मिलने पर कार्रवाई होती है। साथ ही लोगों को भी जागरूक किया जाता है कि किसी को रिश्वत न दें और कानून का पालन करें।
घर और समाज को करें जागरूक
बड़ौत। यातायात पुलिस की टीम ने छात्राओं को ट्रैफिक के नियम बताए। यातायात प्रभारी सुरेंद्र सिंह ने हेलमेट और सीट बेल्ट के प्रति जागरूक किया। यातायात पुलिसकर्मी इंद्राज, देवेंद्र और रोशन लाल आदि ने छात्राओं को यातायात नियम के प्रति जागरूक किया। साथ ही कहा अपने अभिभावकों व आसपास में रहने वालों को भी यातायात नियम का पालन करने के लिए प्रेरित करना चाहिए।