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दो सगे भाइयों को सात-सात साल की सजा
Updated Wed, 01 Aug 2018 01:08 AM IST
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बागपत। एडीजे स्पेशल (एससी/एसटी कोर्ट) रमेश चंद दिवाकर ने मोहल्ला व्यापारियान के इमरान हत्याकांड में दो सगे भाइयों को सात-सात साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई। जबकि एक आरोपी की पहले ही मौत हो चुकी है।
एडीजीसी चश्मवीर सिंह ने बताया कि 23 जुलाई 2007 की रात में करीब नौ बजे मोहल्ला व्यापारियान बागपत निवासी शहजाद (22) पुत्र फखरू को मोहल्ले के ही बाजा, गुफ्फा और गुलजार पुत्र अब्दुल सलाम घर से यह कहकर ले गए थे कि बाजा की भैंस चोरी हो गई है, उसे ढूंढने चलना है। इसके बाद वह घर नहीं लौटा था। तीनों आरोपी वापस घर पर लौट आए। परिजनों ने शहजाद के बारे में उनसे पूछा तो उन्होंने बताया कि उसको ठिकाने लगा दिया है। 24 जुलाई को युवक का शव दिल्ली-सहारनपुर हाइवे स्थित एक पब्लिक स्कूल के पास पड़ी मिला । मृतक की बहन इमराना ने भाई की जहर खिलाकर हत्या करने का आरोप लगाते हुए कोतवाली में बाजा, गुफ्फा और गुलजार के खिलाफ नामजद तहरीर दी, लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज तक नहीं की। इसके बाद बहन ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
एडीजीसी चश्मवीर सिंह ने बताया 13 मार्च 2008 को न्यायालय के आदेश पर बागपत कोतवाली में तीनों आरोपियों के खिलाफ धारा 304 आईपीसी के तहत मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर जेल भेजा। तीनों आरोपी जमानत पर बाहर आ गए। इनका मुकदमा एडीजे स्पेशल एससी/एसटी रमेश चंद दिवाकर की कोर्ट में चल रहा था। एक आरोपी बाजा की पहले ही मौत हो चुकी है। अभियोजन पक्ष की तरफ से तीन गवाह पेश किए। 12 जुलाई को दो आरोपी गुफ्फा और गुलजार पर दोष सिद्ध हो गया। दोष सिद्ध होते ही दोनों आरोपी कचहरी परिसर से भाग निकले। कोर्ट से दोनों के वारंट जारी किए। जब वे पेश नहीं हुए ने उनके घर की कुर्की के आदेश जारी किए। दोनों आरोपी अपने अधिवक्ता के माध्यम से कोर्ट में पेश हुआ। मंगलवार को सजा के प्रश्न पर सुनवाई हुई। एडीजे स्पेशल एससी/एसटी एक्ट ने दोनों आरोपियों को सात-सात साल की सश्रम कारावास एवं 10-10 हजार रुपये के अर्थ दंड से दंडित किया।
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एडीजीसी चश्मवीर सिंह ने बताया कि 23 जुलाई 2007 की रात में करीब नौ बजे मोहल्ला व्यापारियान बागपत निवासी शहजाद (22) पुत्र फखरू को मोहल्ले के ही बाजा, गुफ्फा और गुलजार पुत्र अब्दुल सलाम घर से यह कहकर ले गए थे कि बाजा की भैंस चोरी हो गई है, उसे ढूंढने चलना है। इसके बाद वह घर नहीं लौटा था। तीनों आरोपी वापस घर पर लौट आए। परिजनों ने शहजाद के बारे में उनसे पूछा तो उन्होंने बताया कि उसको ठिकाने लगा दिया है। 24 जुलाई को युवक का शव दिल्ली-सहारनपुर हाइवे स्थित एक पब्लिक स्कूल के पास पड़ी मिला । मृतक की बहन इमराना ने भाई की जहर खिलाकर हत्या करने का आरोप लगाते हुए कोतवाली में बाजा, गुफ्फा और गुलजार के खिलाफ नामजद तहरीर दी, लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज तक नहीं की। इसके बाद बहन ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
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एडीजीसी चश्मवीर सिंह ने बताया 13 मार्च 2008 को न्यायालय के आदेश पर बागपत कोतवाली में तीनों आरोपियों के खिलाफ धारा 304 आईपीसी के तहत मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर जेल भेजा। तीनों आरोपी जमानत पर बाहर आ गए। इनका मुकदमा एडीजे स्पेशल एससी/एसटी रमेश चंद दिवाकर की कोर्ट में चल रहा था। एक आरोपी बाजा की पहले ही मौत हो चुकी है। अभियोजन पक्ष की तरफ से तीन गवाह पेश किए। 12 जुलाई को दो आरोपी गुफ्फा और गुलजार पर दोष सिद्ध हो गया। दोष सिद्ध होते ही दोनों आरोपी कचहरी परिसर से भाग निकले। कोर्ट से दोनों के वारंट जारी किए। जब वे पेश नहीं हुए ने उनके घर की कुर्की के आदेश जारी किए। दोनों आरोपी अपने अधिवक्ता के माध्यम से कोर्ट में पेश हुआ। मंगलवार को सजा के प्रश्न पर सुनवाई हुई। एडीजे स्पेशल एससी/एसटी एक्ट ने दोनों आरोपियों को सात-सात साल की सश्रम कारावास एवं 10-10 हजार रुपये के अर्थ दंड से दंडित किया।
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