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सरूरपुर में शांतिधारा, अघ्रध चढ़ाए
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बागपत। अतिशय क्षेत्र सरूरपुर कलां गांव में चल रहे 48 दिवसीय भक्तामर महामंडल विधान एवं दीपार्चना के 46वें दिन श्रीजी का अभिषेक और शांतिधारा का आयोजन किया गया। भक्तामर महामंडल विधान में मांडले पर 48 अर्घ्य चढ़ाए। 48 दीप जलाकर दीपार्चना की गई।
विधान निदेशक नमन जैन ने प्रवचन के माध्यम से बताया कि संसार में जितने भी रोग है उन सभी की अनेक औषधि भी है, लेकिन शक का कोई इलाज नहीं है और भाग्य का कोई मिजाज नहीं है। रोग का इलाज हो सकता है किंतु जो रोगी न होते हुए भी अपने आप को रोगी मान बैठते हैं उन्हें निरोगी कौन कर सकता है? हमारा हक हमारी आत्मा पर ही है। आत्मा में कोई अलमारी नहीं है कि भौतिक धन को छुपाकर ले जा सकों। भौतिक धन तो यही छोड़ना पड़ता है। विधान आदित्य जैन सरूरपुर ने कराया। वैशाली, पूर्ती, मेघा, सिम्मी, शालू, गीता, संतोष, मंजू, सपना, जूली, ऊषा, पूजा, सुव्रत, अदिति, हंस कुमार जैन आदि रहे।
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विधान निदेशक नमन जैन ने प्रवचन के माध्यम से बताया कि संसार में जितने भी रोग है उन सभी की अनेक औषधि भी है, लेकिन शक का कोई इलाज नहीं है और भाग्य का कोई मिजाज नहीं है। रोग का इलाज हो सकता है किंतु जो रोगी न होते हुए भी अपने आप को रोगी मान बैठते हैं उन्हें निरोगी कौन कर सकता है? हमारा हक हमारी आत्मा पर ही है। आत्मा में कोई अलमारी नहीं है कि भौतिक धन को छुपाकर ले जा सकों। भौतिक धन तो यही छोड़ना पड़ता है। विधान आदित्य जैन सरूरपुर ने कराया। वैशाली, पूर्ती, मेघा, सिम्मी, शालू, गीता, संतोष, मंजू, सपना, जूली, ऊषा, पूजा, सुव्रत, अदिति, हंस कुमार जैन आदि रहे।
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