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बच्चों के लिए घातक है रोटा वायरस : डॉ. विभाष राजपूत
Updated Sat, 30 Jun 2018 01:04 AM IST
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बागपत। रोटा वायरस से बचाव के लिए सीएचसी में प्रशिक्षण शिविर का आयोजन हुआ। इसमें ब्लॉक के चिकित्साधिकारी, स्वास्थ्य पर्यवेक्षक और कार्यकर्ता पहुंचे। वक्ताओं ने कहा 18 जुलाई से रोटा वायरस वैक्सीन की शुरूआत होगी।
बागपत सीएचसी अधीक्षक डॉ. विभाष राजपूत ने बताया कि नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के अंतर्गत रोटा वायरस वैक्सीन की शुरूआत 18 जुलाई से की जाएगी। नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के अंतर्गत नौ जानलेवा बीमारियों से बचाव के टीके लगाए जाएंगे। इसमें डिप्थीरिया, काली खांसी, टिटनेस, दिमागी बुखार, निमोनिया, खसरा, हेपेटाइटिस बी, गल घोटू और गंभीर दस्त शामिल हैं। उन्होंने बताया कि रोटा वायरस पूरी दुनिया में केवल बच्चों ही पीड़ित होते हैं। विश्व में दस्त से होने वाली मृत्यु में से 22 प्रतिशत मृत्यु भारत में होती है। भारत में प्रतिवर्ष लगभग 78000 बच्चों की मौत दस्त के कारण होती है। इनमें से 59000 मृत्यु प्रथम दो वर्ष तक की उम्र में हो जाती है। रोटा वायरस वैक्सीन देने के बाद 60 प्रतिशत बीमारी का खात्मा हो जाता है। यह एक अत्यधिक संक्रामक वायरस है। आमतौर एक बच्चे से दूसरे बच्चे में दूषित पानी, दूषित खाने एवं गंदे हाथों के संपर्क में आने से फैलता है। यह वर्षभर में कभी भी हो सकता है। सर्दियों के मौसम में इसका संक्रमण अधिक देखा जाता है। रोटा वायरस वैक्सीन की पांच बूंदे छह, दस और 14 सप्ताह में पिलाई जाती है। अधीक्षक ने बताया कि बागपत ब्लॉक में नौ चरणों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें डॉ. विजय कुमार, डॉ. श्रवण गोस्वामी, डॉ. कुमार अभिषेक, ब्लॉक कार्यक्रम प्रबंधक आस मोहम्मद त्यागी, सुधीर कुमार मौजूद रहे।
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बागपत सीएचसी अधीक्षक डॉ. विभाष राजपूत ने बताया कि नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के अंतर्गत रोटा वायरस वैक्सीन की शुरूआत 18 जुलाई से की जाएगी। नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के अंतर्गत नौ जानलेवा बीमारियों से बचाव के टीके लगाए जाएंगे। इसमें डिप्थीरिया, काली खांसी, टिटनेस, दिमागी बुखार, निमोनिया, खसरा, हेपेटाइटिस बी, गल घोटू और गंभीर दस्त शामिल हैं। उन्होंने बताया कि रोटा वायरस पूरी दुनिया में केवल बच्चों ही पीड़ित होते हैं। विश्व में दस्त से होने वाली मृत्यु में से 22 प्रतिशत मृत्यु भारत में होती है। भारत में प्रतिवर्ष लगभग 78000 बच्चों की मौत दस्त के कारण होती है। इनमें से 59000 मृत्यु प्रथम दो वर्ष तक की उम्र में हो जाती है। रोटा वायरस वैक्सीन देने के बाद 60 प्रतिशत बीमारी का खात्मा हो जाता है। यह एक अत्यधिक संक्रामक वायरस है। आमतौर एक बच्चे से दूसरे बच्चे में दूषित पानी, दूषित खाने एवं गंदे हाथों के संपर्क में आने से फैलता है। यह वर्षभर में कभी भी हो सकता है। सर्दियों के मौसम में इसका संक्रमण अधिक देखा जाता है। रोटा वायरस वैक्सीन की पांच बूंदे छह, दस और 14 सप्ताह में पिलाई जाती है। अधीक्षक ने बताया कि बागपत ब्लॉक में नौ चरणों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें डॉ. विजय कुमार, डॉ. श्रवण गोस्वामी, डॉ. कुमार अभिषेक, ब्लॉक कार्यक्रम प्रबंधक आस मोहम्मद त्यागी, सुधीर कुमार मौजूद रहे।
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