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जीने के साथ मरना भी एक कला- अरूण मुनि
Updated Fri, 07 Jul 2017 12:59 AM IST
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बड़ौत (बागपत)।
जैन मुनि अरुण मुनि ने कहा जिस भगवान ने जीना सिखाया, उसने मरना भी सिखाया। उन्होंने बताया जहां जीना एक कला है, वहीं मरना भी एक कला है। बृहस्पतिवार को जैन स्थानक नई मंडी में आयोजित धर्मसभा में उन्होंने कहा मृत्यु कब आ जाए, इसका कुछ पता नहीं। मृत्यु से कभी डरना नहीं चाहिए। हर व्यक्ति जीवन में एक बार ही मरता है और मृत्यु का समय निश्चित नहीं होता है। उसे कोई तंत्र-मंत्र या साधु और तपस्वी टाल नहीं सकता। कहा कि बड़े से बड़ा उपदेश, महापुरुषों की वाणी चाहें तुम याद न रखो, परंतु एक बात अवश्य याद रखनी चाहिए कि मुझे भी एक दिन मरना है। उन्होंने कहा जब आचरण सूत्र के पन्ने खोलते हैं तो इनमें भगवान महावीर का समोशरण लगा हुआ दीखता है। मनुष्य अपने मन को केवल श्मशान घाट या सत्संग में ही शांत व स्थिर कर पाता हे। इसमें भोपाल जैन, हंस कुमार जैन, अभय जैन, भूषण जैन, सुभाष जैन, हरीश चंद, मनीष जैन, जयपाल जैन, सुशील जैन, शैल बाला, इंद्राणी, मेनों जैन आदि रहे।
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जैन मुनि अरुण मुनि ने कहा जिस भगवान ने जीना सिखाया, उसने मरना भी सिखाया। उन्होंने बताया जहां जीना एक कला है, वहीं मरना भी एक कला है। बृहस्पतिवार को जैन स्थानक नई मंडी में आयोजित धर्मसभा में उन्होंने कहा मृत्यु कब आ जाए, इसका कुछ पता नहीं। मृत्यु से कभी डरना नहीं चाहिए। हर व्यक्ति जीवन में एक बार ही मरता है और मृत्यु का समय निश्चित नहीं होता है। उसे कोई तंत्र-मंत्र या साधु और तपस्वी टाल नहीं सकता। कहा कि बड़े से बड़ा उपदेश, महापुरुषों की वाणी चाहें तुम याद न रखो, परंतु एक बात अवश्य याद रखनी चाहिए कि मुझे भी एक दिन मरना है। उन्होंने कहा जब आचरण सूत्र के पन्ने खोलते हैं तो इनमें भगवान महावीर का समोशरण लगा हुआ दीखता है। मनुष्य अपने मन को केवल श्मशान घाट या सत्संग में ही शांत व स्थिर कर पाता हे। इसमें भोपाल जैन, हंस कुमार जैन, अभय जैन, भूषण जैन, सुभाष जैन, हरीश चंद, मनीष जैन, जयपाल जैन, सुशील जैन, शैल बाला, इंद्राणी, मेनों जैन आदि रहे।