{"_id":"5b9eadaf867a55013b110928","slug":"121537125807-baghpat-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"उतम आर्जव धर्म को अंगीकार किया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उतम आर्जव धर्म को अंगीकार किया
Updated Mon, 17 Sep 2018 12:53 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बड़ौत (बागपत)। जैन अनुयायियों के दशलक्षण पर्व के तीसरे दिन जैन अनुयायियों ने उत्तम आर्जव धर्म को अंगीकार किया। दिगंबर जैन समाज समिति के तत्वावधान में बड़ा जैन मंदिर में अनुमान प्रसन्न ऋषि महाराज के सानिध्य में दिगंबर जैन युवा मंच द्वारा आयोजित तेरह दीप द्वीप महा मंडल विधान में भगवान चंद्र प्रभु का अभिषेक किया गया। इसके बाद पं. आशीष जैन के निर्देशन में मधुर संगीत लहरियों के बीच नित्य नियम की पूजा, दशलक्षण पर्व की पूजा विधि विधान से की गई। इसके बाद 13 द्वीप महामंडल विधान शुरू हुआ। इसमें सुदर्शन मेरू के पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण क्षेत्र समेत कुल सात पूजा की, इनमें जंबू वृक्ष, भरत क्षेत्र, रूपांचल, ऐरावत क्षेत्र आदि पूजा शामिल रही। विधान के बीच-बीच में अमर चंद जैन ने विधान की महत्ता पर प्रकाश डाला।
उधर, दिगंबर जैन छोटा मंदिर में प्रात: काल से ही भक्तों द्वारा सामूहिक पूजा की गई और भगवान का अभिषेक किया। दिगंबर जैन अतिथि भवन में श्रद्धालुओं ने पीत वस्त्र धारण करके दशलक्षण धर्म की पूजा अर्चना की। मीडिया प्रभारी अतुल जैन ने बताया कि राजेश कुमार व सचिन जैन भारती द्वारा श्री शांति विधान किया। इसमें प्रवीण जैन, अतुल जैन, विपुल जैन, सुरेंद्र जैन, सुभाष जैन, पंकज जैन आदि रहे।
परमात्मा-मनुष्य की बीच की दूरी हो आर्जव धर्म कहते है
बड़ौत। प्रसन्न ऋषि महाराज ने कहा कि परमात्मा और मनुष्य के बीच की निकटतम दूरी का नाम ही आर्जव धर्म है। आर्जव धर्म सरल, प्रभाविकता व बच्चों जैसे भोलेपन के लिए होता है। मानसिक बीमारी से ऊपर उठाने वाला आर्जव धर्म होता है। असीम आनंद में बौद्ध करने वाला आर्जव धर्म है।
विज्ञापन
उत्तम आर्जव धर्म की पूजा अर्चना की
बड़ौत। अजितनाथ दिगंबर जैन मंदिर कमेटी के तत्वावधान में आचार्य सुरत्न सागर महाराज के सानिध्य में विहर्ष सभागार सत्यवती धर्म सभा में उत्तम आर्जव धर्म की पूजा की गई। प्रात: ब्रह्मचारिणी मुध दीदी व सीमा दीदी के निर्देशन में इंद्र-इंद्राणियों ने अजितनाथ भगवान की प्रतिमा का प्रासुक जल से अभिषेक किया। शांति धारा का सौधर्म इन्द्र को प्राप्त हुआ। इसके बाद नित्य नियम की पूजन में नव देवता पूजन, शांतिनाथ पूजा, सोलहकरण, पंचपूर्ण व दशलक्षण धर्म की पूजा की और जैन श्रद्धालुओं द्वारा उत्तम आर्जव धर्म को अंगीकार किया गया। सौधर्म इन्द्र द्वारा मांडले पर अर्ध्य समर्पित किए । संगीतकार विकास म्यूजिक ग्रुप द्वारा भजनों की प्रस्तुति की। आचार्य सुरत्न सागर महाराज ने कहा कि आर्जव अथवा भाव की शुद्धता, जो सोचना सो कहना, जो कहना सो करना, उत्तम आर्जव कपट मिटाने का साधन है। अर्थात उत्तम आर्जव धर्म आ जाने से सरल हृदय व्यक्तियों के घर में लक्ष्मी का भी स्थायी वास रहता है। शाम को मंदिर में दिगंबर जैन बाल सदन के बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति की गई और उन्हें पुरस्कार दिया। इसमें सुभाष जैन, मुकेश जैन, वरदान जैन, अशोक, मदनलाल, सुरेश आदि रहे।
सौभाग्य प्राप्त हुआ
बड़ौत। शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में उत्तम आर्जव धर्म में शांति धारा का सौभाग्य आदिश जैन को प्राप्त हुआ। कल्याण मंदिर सतोत्र विधान संपन्न हुआ। विधानाचार्य पं. राजकुमार शास्त्री सागर द्वारा विधि विधानपूर्वक सम्पादित किया। मंदिर में रात्रि 8 से 9 बजे तक पं. राज कुमार शास्त्री ने विचार रखें। इसमें रमेश जग्गी, नवीन जैन बब्बल, विनोद जैन, अक्षय जैन आदि रहे।
विज्ञापन
उधर, दिगंबर जैन छोटा मंदिर में प्रात: काल से ही भक्तों द्वारा सामूहिक पूजा की गई और भगवान का अभिषेक किया। दिगंबर जैन अतिथि भवन में श्रद्धालुओं ने पीत वस्त्र धारण करके दशलक्षण धर्म की पूजा अर्चना की। मीडिया प्रभारी अतुल जैन ने बताया कि राजेश कुमार व सचिन जैन भारती द्वारा श्री शांति विधान किया। इसमें प्रवीण जैन, अतुल जैन, विपुल जैन, सुरेंद्र जैन, सुभाष जैन, पंकज जैन आदि रहे।
विज्ञापन
परमात्मा-मनुष्य की बीच की दूरी हो आर्जव धर्म कहते है
बड़ौत। प्रसन्न ऋषि महाराज ने कहा कि परमात्मा और मनुष्य के बीच की निकटतम दूरी का नाम ही आर्जव धर्म है। आर्जव धर्म सरल, प्रभाविकता व बच्चों जैसे भोलेपन के लिए होता है। मानसिक बीमारी से ऊपर उठाने वाला आर्जव धर्म होता है। असीम आनंद में बौद्ध करने वाला आर्जव धर्म है।
विज्ञापन
उत्तम आर्जव धर्म की पूजा अर्चना की
बड़ौत। अजितनाथ दिगंबर जैन मंदिर कमेटी के तत्वावधान में आचार्य सुरत्न सागर महाराज के सानिध्य में विहर्ष सभागार सत्यवती धर्म सभा में उत्तम आर्जव धर्म की पूजा की गई। प्रात: ब्रह्मचारिणी मुध दीदी व सीमा दीदी के निर्देशन में इंद्र-इंद्राणियों ने अजितनाथ भगवान की प्रतिमा का प्रासुक जल से अभिषेक किया। शांति धारा का सौधर्म इन्द्र को प्राप्त हुआ। इसके बाद नित्य नियम की पूजन में नव देवता पूजन, शांतिनाथ पूजा, सोलहकरण, पंचपूर्ण व दशलक्षण धर्म की पूजा की और जैन श्रद्धालुओं द्वारा उत्तम आर्जव धर्म को अंगीकार किया गया। सौधर्म इन्द्र द्वारा मांडले पर अर्ध्य समर्पित किए । संगीतकार विकास म्यूजिक ग्रुप द्वारा भजनों की प्रस्तुति की। आचार्य सुरत्न सागर महाराज ने कहा कि आर्जव अथवा भाव की शुद्धता, जो सोचना सो कहना, जो कहना सो करना, उत्तम आर्जव कपट मिटाने का साधन है। अर्थात उत्तम आर्जव धर्म आ जाने से सरल हृदय व्यक्तियों के घर में लक्ष्मी का भी स्थायी वास रहता है। शाम को मंदिर में दिगंबर जैन बाल सदन के बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति की गई और उन्हें पुरस्कार दिया। इसमें सुभाष जैन, मुकेश जैन, वरदान जैन, अशोक, मदनलाल, सुरेश आदि रहे।
सौभाग्य प्राप्त हुआ
बड़ौत। शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में उत्तम आर्जव धर्म में शांति धारा का सौभाग्य आदिश जैन को प्राप्त हुआ। कल्याण मंदिर सतोत्र विधान संपन्न हुआ। विधानाचार्य पं. राजकुमार शास्त्री सागर द्वारा विधि विधानपूर्वक सम्पादित किया। मंदिर में रात्रि 8 से 9 बजे तक पं. राज कुमार शास्त्री ने विचार रखें। इसमें रमेश जग्गी, नवीन जैन बब्बल, विनोद जैन, अक्षय जैन आदि रहे।