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मनुष्य ईश्वर की सर्व श्रेष्ठ रचना है- डॉ. ओमवीर
Updated Tue, 21 Nov 2017 01:14 AM IST
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बड़ौत (बागपत) ।
रेलवे रोड स्थित आर्य समाज मंदिर में यज्ञ हुआ। यज्ञ के ब्रह्मा रणतेज बहादुर और यज्ञमान प्रीतम सिंह वर्मा रहे। इस मौके पर डॉ. ओमवीर सिंह आर्य ने कहा कि इस भव सागर से पार जाने का मनुष्य का शरीर ही दिव्य रथ है। इस शरीर में ही परमात्मा के दर्शन कर संसार सागर पार हो सकते हैं। सब प्राणियों में मनुष्य ईश्वर की सर्व श्रेष्ठ रचना है। मनुष्य का शरीर तो साक्षात ईश्वर का मंदिर है। परम पिता परमेश्वर ने न जाने कितनी योनियों को जन्म दिया है। ये सब प्राणी भोग योनि में आते हैं और सब अपने-अपने कर्मानुसार फल भोगते हैं, परंतु मनुष्य की योनि भोग और कर्म योनि है। मनुष्य कर्म प्रधान प्राणी है। यज्ञ में डॉ. हरपाल सिंह, अंगिरस मुनि, राजपाल आर्य, रामबली राणा, विनोद भारद्वाज, गुलाब चंद, अरूण आर्य, रिति आर्य, वेदपाल आर्य, सुनील आर्य आदि उपस्थित रहे।
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रेलवे रोड स्थित आर्य समाज मंदिर में यज्ञ हुआ। यज्ञ के ब्रह्मा रणतेज बहादुर और यज्ञमान प्रीतम सिंह वर्मा रहे। इस मौके पर डॉ. ओमवीर सिंह आर्य ने कहा कि इस भव सागर से पार जाने का मनुष्य का शरीर ही दिव्य रथ है। इस शरीर में ही परमात्मा के दर्शन कर संसार सागर पार हो सकते हैं। सब प्राणियों में मनुष्य ईश्वर की सर्व श्रेष्ठ रचना है। मनुष्य का शरीर तो साक्षात ईश्वर का मंदिर है। परम पिता परमेश्वर ने न जाने कितनी योनियों को जन्म दिया है। ये सब प्राणी भोग योनि में आते हैं और सब अपने-अपने कर्मानुसार फल भोगते हैं, परंतु मनुष्य की योनि भोग और कर्म योनि है। मनुष्य कर्म प्रधान प्राणी है। यज्ञ में डॉ. हरपाल सिंह, अंगिरस मुनि, राजपाल आर्य, रामबली राणा, विनोद भारद्वाज, गुलाब चंद, अरूण आर्य, रिति आर्य, वेदपाल आर्य, सुनील आर्य आदि उपस्थित रहे।