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गन्ने की फसल में पोक्का बोइंग रोग का प्रकोप दिखा
Updated Fri, 25 May 2018 01:24 AM IST
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बागपत। गन्ने की फसल को पोक्का बोइंग रोग ने जकड़ना शुरू कर दिया है। किसानों की शिकायत मिलते ही जिला कृषि रक्षा अधिकारी डॉ. संतराम ने खेतों में निरीक्षण किया तो इसकी जानकारी मिली। उनका कहना है कि यह रोग पहले अगस्त में आता था, लेकिन इस बार मई में दिखाई देना शुरू हो गया है।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी डॉ. संतराम ने बताया कि पोक्का बोइंग रोग (फफुंदी रोग) ने गन्ने की फसल को नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया है। इससे किसानों को नुकसान पहुंचेगा। यह रोग पहले अगस्त में आया करता था, लेकिन इस बार मई में रोग आने से सही संकेत नहीं है। किसानों को इसके लिए ज्यादा सुरक्षा अपनानी होगी। यह रोग बीज जनित है। इसकी तीन अवस्था होती है। पहली इनकी पत्तियां पीली पड़ने लगती और सिकुड़ जाती है। दूसरी गन्ने की पौध का ऊपरी भाग तेजी से सड़ने लगता है। तीसरी अवस्था चाकू से कटने जैसी अवस्था आ जाती है। इसकी रोकथाम के लिए समय पर दवाओं का छिड़काव करना होगा। रोकथाम के लिए 15 दिन के अंतराल में कॉपर ऑक्सी क्लोराइड का दो बार छिड़काव चाहिए। इसके अलावा कृषि विशेषज्ञों की सलाह लेकर किसान रोग से फसल का बचाव करें।
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जिला कृषि रक्षा अधिकारी डॉ. संतराम ने बताया कि पोक्का बोइंग रोग (फफुंदी रोग) ने गन्ने की फसल को नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया है। इससे किसानों को नुकसान पहुंचेगा। यह रोग पहले अगस्त में आया करता था, लेकिन इस बार मई में रोग आने से सही संकेत नहीं है। किसानों को इसके लिए ज्यादा सुरक्षा अपनानी होगी। यह रोग बीज जनित है। इसकी तीन अवस्था होती है। पहली इनकी पत्तियां पीली पड़ने लगती और सिकुड़ जाती है। दूसरी गन्ने की पौध का ऊपरी भाग तेजी से सड़ने लगता है। तीसरी अवस्था चाकू से कटने जैसी अवस्था आ जाती है। इसकी रोकथाम के लिए समय पर दवाओं का छिड़काव करना होगा। रोकथाम के लिए 15 दिन के अंतराल में कॉपर ऑक्सी क्लोराइड का दो बार छिड़काव चाहिए। इसके अलावा कृषि विशेषज्ञों की सलाह लेकर किसान रोग से फसल का बचाव करें।
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