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....अपने मुकद्दर की नुमाईश नहीं करते हम
Updated Mon, 08 Jan 2018 01:33 AM IST
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बागपत । जहां तेरा रोशन है मालिक, यहां सभी रहनुमा दिखते हैं। अपने मुकद्दर की नुमाईंश नहीं करते हम, पर खुद अपनी तकदीर लिखते हैं हम...। मंजिल की ओर बढ़ रही दिव्यांग दंपति इसी अंदाज में आगे बढ़ी।
बड़ौत क्षेत्र के गांव औसिक्का निवासी कुर्बान, आंखों से दिव्यांग है। इनको दोनों आंखों से कुछ दिखाई नहीं देता है। उसका निकाह आठ साल पहले बागपत के पुराना कस्बा निवासी महिला रेशमा के साथ हुआ । रेशमा दोनों पैरों से दिव्यांग है। दिव्यांग दंपति के एक तीन वर्षीय बेटा है। रविवार को गौरीपुर-जवाहरनगर में कुर्बान अपनी पत्नी और बेटे के साथ रिश्तेदारी में गए हुए थे। रविवार को वह तीनों ट्राई साइकिल से गौरीपुर से अपने घर पर पहुंचे। रेशमा ट्राई साइकिल का हैंडल पकड़ रही थी। जबकि कुर्बान साइकिल का पैडल चला रहा था। वह कभी पैडल चला रहा था तो कभी पैदल चलकर साइकिल में धक्का लगा रहा था। वे हंसी-खुशी से अपने घर पर पहुंच गए। उनको जरा भी मलाल नहीं था कि वे दिव्यांग हैं।
कुर्बान बोला, हर मजदूरी कर लेता हूं
बागपत। कुर्बान का कहना है कि उसको जो भी मजदूरी मिलती है, उसको आराम से कर लेता है। कभी भट्ठे पर काम करता है तो कभी राज मिस्त्री के साथ काम करता है।
बेटे को पढ़ाने की इच्छा
बागपत। दंपति का कहना है कि उनको अपने बेटे को पढ़ाने-लिखाने की इच्छा है। इसके लिए उनको कितनी भी मेहनत करनी पड़े, पीछे नहीं हटेगा।
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बड़ौत क्षेत्र के गांव औसिक्का निवासी कुर्बान, आंखों से दिव्यांग है। इनको दोनों आंखों से कुछ दिखाई नहीं देता है। उसका निकाह आठ साल पहले बागपत के पुराना कस्बा निवासी महिला रेशमा के साथ हुआ । रेशमा दोनों पैरों से दिव्यांग है। दिव्यांग दंपति के एक तीन वर्षीय बेटा है। रविवार को गौरीपुर-जवाहरनगर में कुर्बान अपनी पत्नी और बेटे के साथ रिश्तेदारी में गए हुए थे। रविवार को वह तीनों ट्राई साइकिल से गौरीपुर से अपने घर पर पहुंचे। रेशमा ट्राई साइकिल का हैंडल पकड़ रही थी। जबकि कुर्बान साइकिल का पैडल चला रहा था। वह कभी पैडल चला रहा था तो कभी पैदल चलकर साइकिल में धक्का लगा रहा था। वे हंसी-खुशी से अपने घर पर पहुंच गए। उनको जरा भी मलाल नहीं था कि वे दिव्यांग हैं।
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कुर्बान बोला, हर मजदूरी कर लेता हूं
बागपत। कुर्बान का कहना है कि उसको जो भी मजदूरी मिलती है, उसको आराम से कर लेता है। कभी भट्ठे पर काम करता है तो कभी राज मिस्त्री के साथ काम करता है।
बेटे को पढ़ाने की इच्छा
बागपत। दंपति का कहना है कि उनको अपने बेटे को पढ़ाने-लिखाने की इच्छा है। इसके लिए उनको कितनी भी मेहनत करनी पड़े, पीछे नहीं हटेगा।