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पुरवा ने छीन ली खरबूजे की मिठास
Updated Thu, 24 May 2018 01:16 AM IST
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बागपत। कभी जिले की पहचान रहा देसी खरबूजा अब मौसम की मार झेल रहा है। पुरवा हवा के कारण खरबूजे की मिठास गायब हो गई है। यमुना में पानी नहीं आने से किसानों के सामने मुश्किलें खड़ी हो गई है। खरबूजे और अन्य फसलों की समय पर सिंचाई नहीं की जा सकी है।
यमुना खादर के खरबूजे के स्वाद की दूर तक पहचान रही है। दिल्ली और हरियाणा के अलावा अन्य राज्यों में भी जिले के खरबूजों की सप्लाई होती थी, लेकिन इस बार मौसम की ऐसी मार पड़ी कि खरबूजों का स्वाद ही बिगड़ गया है। पुरवा हवा के कारण खरबूजों में मिठास नहीं घुल सकी है। किसान ओमवीर सिंह, फखरू, जगदीश, चंदगीराम ने बताया कि देसी खरबूजा सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। पिछले कुछ सालों में हालांकि अन्य प्रजाति के खरबूजे का चलन बढ़ रहा है। किसान खरबूजे में होने वाले नुकसान को देखते हुए ज्यादा ध्यान तरबूज पर दे रहें है। यमुना में पानी नहीं आता है, जिस कारण फसलों की सिंचाई के लिए हर रोज पाच-छह लीटर डीजल का इस्तेमाल किया जा रहा है। डीजल महंगा हो जाने के कारण अब समस्या खड़ी हो रही है।
किसानों ने क्या कहा?
अफसर ने कहा कि बागपत के खरबूजे पर केवल मौसम की मार पड़ रही है। गर्मी के मौसम में जो वातावरण खरबूजे को चाहिए वह नहीं मिल रहा है। यमुना में पानी न आना भी बड़ी समस्या है।
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अली शेर ने कहा कि पूरे प्रदेश में बागपत का खरबूजा मशहूर था, लेकिन अब पूरी तरह पहचान खो चुका है। जिले की पहचान को मौसम का ग्रहण लग गया है। किसान दूसरी प्रजाति की बुआई ज्यादा कर रहे हैं।
रणबीर सिंह ने कहा बागपत का खरबूजा हमेशा पछवा में ही पककर मिठास देता था। जिस मौसम में इसकी बुआई होती है और फल आना शुरू होता है उस समय परवा हवा चल जाती है। जिससे मिठास कम हो गई।
मांगेराम बताते है कि प्रदेश के दोनो छोर पर बागपत के खरबूजे को नाम लेकर दुकानदार बेचते थे। अब कहीं चले जाए इसका नाम लेने वाला नहीं है। फल पर केवल मौसम से ही मिठास आती है। मौसम बदलने से प्रभाव पड़ा है।
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यमुना खादर के खरबूजे के स्वाद की दूर तक पहचान रही है। दिल्ली और हरियाणा के अलावा अन्य राज्यों में भी जिले के खरबूजों की सप्लाई होती थी, लेकिन इस बार मौसम की ऐसी मार पड़ी कि खरबूजों का स्वाद ही बिगड़ गया है। पुरवा हवा के कारण खरबूजों में मिठास नहीं घुल सकी है। किसान ओमवीर सिंह, फखरू, जगदीश, चंदगीराम ने बताया कि देसी खरबूजा सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। पिछले कुछ सालों में हालांकि अन्य प्रजाति के खरबूजे का चलन बढ़ रहा है। किसान खरबूजे में होने वाले नुकसान को देखते हुए ज्यादा ध्यान तरबूज पर दे रहें है। यमुना में पानी नहीं आता है, जिस कारण फसलों की सिंचाई के लिए हर रोज पाच-छह लीटर डीजल का इस्तेमाल किया जा रहा है। डीजल महंगा हो जाने के कारण अब समस्या खड़ी हो रही है।
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किसानों ने क्या कहा?
अफसर ने कहा कि बागपत के खरबूजे पर केवल मौसम की मार पड़ रही है। गर्मी के मौसम में जो वातावरण खरबूजे को चाहिए वह नहीं मिल रहा है। यमुना में पानी न आना भी बड़ी समस्या है।
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अली शेर ने कहा कि पूरे प्रदेश में बागपत का खरबूजा मशहूर था, लेकिन अब पूरी तरह पहचान खो चुका है। जिले की पहचान को मौसम का ग्रहण लग गया है। किसान दूसरी प्रजाति की बुआई ज्यादा कर रहे हैं।
रणबीर सिंह ने कहा बागपत का खरबूजा हमेशा पछवा में ही पककर मिठास देता था। जिस मौसम में इसकी बुआई होती है और फल आना शुरू होता है उस समय परवा हवा चल जाती है। जिससे मिठास कम हो गई।
मांगेराम बताते है कि प्रदेश के दोनो छोर पर बागपत के खरबूजे को नाम लेकर दुकानदार बेचते थे। अब कहीं चले जाए इसका नाम लेने वाला नहीं है। फल पर केवल मौसम से ही मिठास आती है। मौसम बदलने से प्रभाव पड़ा है।