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‘मत उंगलियां उठाओ सरहद पर...
Updated Sat, 09 Sep 2017 12:52 AM IST
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‘मत उंगलियां उठाओ सरहद पर, वहां भारत के भगवान रहते हैं’
बड़ौत (बागपत)। दिगंबर जैन समाज एवं पंच परमेष्ठी प्रचार सेवा समिति की ओर से बृहस्पतिवार को संजय मूर्ति पर रथयात्रा की पूर्व संध्या पर कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें पूरी रात कवियों ने हास्य व्यंग्य और सियासी माहौल पर रचनाएं पेश कर तालियां बंटोंरी। धार्मिक कविताओं से भी मंत्रमुग्ध किया।
कवि सम्मेलन का उद्घाटन सुधीर कुमार एवं आशीष जैन ने किया। मुख्य अतिथि के रूप में बड़ौत विधायक केपी मलिक, एसडीएम अरविंद कुमार द्विवेदी, सीओ रामानंद कुशवाहा उपस्थित रहे। कवि सम्मेलन का संचालन आशीष नवल ने किया और उन्होंने महावीर भगवान पर स्तुति की। इसके बाद गौरी मिश्रा ने सरस्वती वंदना से कवि सम्मेलन शुरू किया।
कवि हरिओम पंवार ने वीर रस की कविता सुनाकर रोंगटे खड़े कर दिए। उन्होंने सुनाया-‘उच्चारण हूं उन चौराहों का आंख लाल कर देखूंगा, सैनिकों के एक शीश के बदलें 20 शीश चाहूंगा’। मुंबई से आए सुनील व्यास ने कहा- ‘शहरी बनने के लिये हम भाईयों ने खानदानी खेत बार लिए हैं, जहां फसलें काटनी थीं, वहां प्लाट काट दिए हैं, नैनीताल से आई गौरी मिश्रा ने सुनाया- ‘न फूलों में नकलियों में न वो माली में आती थी जो रंगत मां के हाथों से सजी थाली में आती थी’।
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कवि रामबाबू ने फरमाया-‘जो वतन की खातिर मिटे उनको सलाम है.., पॉपुलर मेरठी ने कहा-‘तदबीर का खुश है, मुकद्दर से लड़ा है दुनिया उसे कहती है चालकबाज बड़ा है, खुद तीस का और दुल्हन साठ की, गिरती हुई दीवार के सहारे खड़ा है’ सुनाकर श्रोताओं का गुदगुदाया। जॉनी बैरागी ने काव्य पाठ किया-‘मत उंगलियां उठाया करो सरहद पर वहां भारत के भगवान रहते हैं’। इन पंक्तियों को सुनाया तो श्रोताओं में नया जोश भर गया। इसके अलावा सुदीप भोला, मुमताज नसीम, आशीष ने भी काव्य पाठ किया और पूरी रात श्रोताओं की वाह-वाह लूटी। इस आयोजन को सफल बनाने में पंच परमेष्ठी के संजय जैन, आशीष जैन, रवि, अक्षय, मोनू का सहयोग रहा।
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बड़ौत (बागपत)। दिगंबर जैन समाज एवं पंच परमेष्ठी प्रचार सेवा समिति की ओर से बृहस्पतिवार को संजय मूर्ति पर रथयात्रा की पूर्व संध्या पर कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें पूरी रात कवियों ने हास्य व्यंग्य और सियासी माहौल पर रचनाएं पेश कर तालियां बंटोंरी। धार्मिक कविताओं से भी मंत्रमुग्ध किया।
कवि सम्मेलन का उद्घाटन सुधीर कुमार एवं आशीष जैन ने किया। मुख्य अतिथि के रूप में बड़ौत विधायक केपी मलिक, एसडीएम अरविंद कुमार द्विवेदी, सीओ रामानंद कुशवाहा उपस्थित रहे। कवि सम्मेलन का संचालन आशीष नवल ने किया और उन्होंने महावीर भगवान पर स्तुति की। इसके बाद गौरी मिश्रा ने सरस्वती वंदना से कवि सम्मेलन शुरू किया।
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कवि हरिओम पंवार ने वीर रस की कविता सुनाकर रोंगटे खड़े कर दिए। उन्होंने सुनाया-‘उच्चारण हूं उन चौराहों का आंख लाल कर देखूंगा, सैनिकों के एक शीश के बदलें 20 शीश चाहूंगा’। मुंबई से आए सुनील व्यास ने कहा- ‘शहरी बनने के लिये हम भाईयों ने खानदानी खेत बार लिए हैं, जहां फसलें काटनी थीं, वहां प्लाट काट दिए हैं, नैनीताल से आई गौरी मिश्रा ने सुनाया- ‘न फूलों में नकलियों में न वो माली में आती थी जो रंगत मां के हाथों से सजी थाली में आती थी’।
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कवि रामबाबू ने फरमाया-‘जो वतन की खातिर मिटे उनको सलाम है.., पॉपुलर मेरठी ने कहा-‘तदबीर का खुश है, मुकद्दर से लड़ा है दुनिया उसे कहती है चालकबाज बड़ा है, खुद तीस का और दुल्हन साठ की, गिरती हुई दीवार के सहारे खड़ा है’ सुनाकर श्रोताओं का गुदगुदाया। जॉनी बैरागी ने काव्य पाठ किया-‘मत उंगलियां उठाया करो सरहद पर वहां भारत के भगवान रहते हैं’। इन पंक्तियों को सुनाया तो श्रोताओं में नया जोश भर गया। इसके अलावा सुदीप भोला, मुमताज नसीम, आशीष ने भी काव्य पाठ किया और पूरी रात श्रोताओं की वाह-वाह लूटी। इस आयोजन को सफल बनाने में पंच परमेष्ठी के संजय जैन, आशीष जैन, रवि, अक्षय, मोनू का सहयोग रहा।