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1.23 करोड़ खर्च, फिर भी खुले में शौच जाने को मजबूर आधी आबादी

Fri, 19 Nov 2021 10:15 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 19 Nov 2021 10:15 PM IST
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1.23 crore spent, yet half the population forced to defecate in the open
टीकरी कस्बे में सामुदायिक शौचालय की बदहाली। - फोटो : BARAUT
विश्व शौचालय दिवस
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बड़ौत ब्लॉक की 44 ग्राम पंचायतों में से 43 में देखरेख के लिए तैनात है केयर टेकर
कुछ को छोड़कर अधिकांश सामुदायिक शौचालयों में लटक रहे ताले
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। जिन लोगों के पास शौचालय बनवाने के लिए जमीन नहीं है, उनके लिए सरकार की ओर से सार्वजनिक प्रसाधन केन्द्र तैयार कराए हैं। बड़ौत ब्लॉक की बात करें तो छह माह पूर्व ब्लाक मुख्यालय के अंतर्गत पड़ने वाली 44 ग्राम पंचायतों में से 43 ग्राम पंचायतों मेें 1.23 करोड़ की लागत से सामुदायिक शौचालय बनाए गए थे। एक ग्राम पंचायत आरिफपुर खेड़ी में अभी तक सामुदायिक शौचालय नहीं बना है। बताया कि देखरेख के लिए आरिफपुर खेड़ी ग्राम पंचायत को छोड़कर सभी ग्राम पंचायत में केयर टेकर तैनात किए गए है। मगर, देखरेख तो दूर अधिकांश पर ताले ही लटके रहते है। इससे सरकार के स्वच्छ भारत मिशन को झटका लग रहा है।
प्रसाधन केन्द्र खोलने का समय भी निर्धारित
विभागीय अफसरों के अनुुसार सुबह चार बजे से आठ बजे तक, दिन में दोपहर बारह बजे से दो बजे तक व शाम के समय छह बजे से रात्रि आठ बजे तक केयर टेकर की देखरेख में शौचालय खोले जाते है। जबकि हकीकत इसके उल्टा है, अधिकांश ग्राम पंचायतों में पूरे-पूरे दिन शौचालयों पर ताले लटके रहते है।
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डीपीआरओ के निरीक्षण में खुली थी पोल
करीब दो माह पूर्व तत्कालीन डीपीआरओ बनवारी सिंह ने बावली सहित महावतपुर व रूस्तमपुर गांव में औचक निरीक्षण किया था। उस दौरान ज्यादा सामुदायिक शौचालय पर ताले लटके मिले थे। इस पर उन्होंने नाराजगी जताते हुए ग्राम सचिव से जवाब भी मांगा था।
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शौचालयों का नहीं मिल रहा लाभ
वाजिदपुर गांव में बनाएं गए शौचालय पर अधिकांश समय ताला लटका रहता है। वाजिदपुर गांव की वृद्ध महिला मंती का कहना है कि सार्वजनिक प्रसाधन केंद्र तैयार कराएं हैं। निर्माण में भी सरकार की मोटी रकम खर्च हुई है। इसके बाद भी लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। कहा कि घर पर सरकारी शौचालय के लिए आवेदन किया था, लेकिन न तो रुपये आए और न ही शौचालय बनाया गया। टीकरी कस्बे में सामुदायिक शौचालय बनाया गया था, लेकिन उस पर हर समय ताला लटका रहता है। आलम यह है कि सामुदायिक शौचालय के आसपास लंबी-लंबी घास भी खड़ी है।

शौचालयों की देखरेख करने के लिए महिलाओं की तैनाती की गई है। जिन पंचायतों में सार्वजनिक प्रसाधन केंद्र पर ताले लगे मिलते हैं तो संबंधित सचिव और एडीओ के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - ज्योति बाला, बीडीओ।
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