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मतदान बहिष्कार तक दी चेतावनी फिर भी बढ़ती जा रही मुश्किलें
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अहरौला। छुट्टा पशु किसानों के दुश्मन बने हुए हैं किसानों के लाख कोशिशों के बाद उनके साल भर का निवाला फसल का दाना घर पहुंचना मुश्किल सा लगता है। क्षेत्र के गहजी, शंभूपुर, कठही, बसही, केदारपुर गावों के किसानों में इस बात को लेकर चिंता व्याप्त है। किसानों ने मतदान का बहिष्कार तक करने की चेतावनी भी दी लेकिन इसके बाद भी उनकी समस्या का कोई समाधान नहीं निकला।
क्षेत्र के लक्ष्मी चौबे, राजाराम निषाद, जमुना निषाद, छविलाल निषाद, हृदय नारायण चौबे, प्रदीप चौबे, प्रवीन प्रकाश श्रीवास्तव, निर्मल राम, गया प्रसाद शर्मा, श्रीराम, शिवपूजन यादव, राजेश चौबे, भीम निषाद, प्रदीप सिंह, मनोज चौबे, साधु सिंह, नीरज सिंह, चेतनारायन सिंह, सत्यप्रकाश चौबे, सत्यनारायन यादव, सुभाष चौबे, छविलाल, जोगेंद्र गौड़, धारी निषाद, अजय चौबे, राजकुमार आदि किसानों का कहना है कि वह दिन में रखवाली के बाद भी जैसे खेतों से हटते हैं पशुओं का झुंड खेतों में पहुंच जाता है। रात में भी 10 बजे तक किसान पशुओं के झुंड को खेतों से निकालते हैं। रात में खेतों में जहरीले सांपों से भी खतरा बना रहता है। रात में उनके सो जाने के बाद पशु खेतों में आराम से पहुंच कर उनकी फसलों को निवाला बनाते हैं। किसानों का कहना है कि अगर हमारी फसलें नहीं बची तो दोगुनी कमाई दूर की बात है। हम लोगों के खाने के भी लाले पड़ जाएंगे। हम किसान ब्लॉक और तहसील के अधिकारियों से गुहार और सरकार से गुहार लगा रहे हैं कि वह पशुओं की वैकल्पिक व्यवस्था करें और गोशाला में ले जाएं। लेकिन शासन-प्रशासन ऑख और कान बंद किए हुए हैं अभी एक सप्ताह पहले किसानों ने छुट्टा पशुओं को लेकर विरोध प्रदर्शन भी किया। किसानों ने छुट्टा पशुओं के आतंक को लेकर मतदान बहिष्कार की भी चेतावनी दी है।
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क्षेत्र के लक्ष्मी चौबे, राजाराम निषाद, जमुना निषाद, छविलाल निषाद, हृदय नारायण चौबे, प्रदीप चौबे, प्रवीन प्रकाश श्रीवास्तव, निर्मल राम, गया प्रसाद शर्मा, श्रीराम, शिवपूजन यादव, राजेश चौबे, भीम निषाद, प्रदीप सिंह, मनोज चौबे, साधु सिंह, नीरज सिंह, चेतनारायन सिंह, सत्यप्रकाश चौबे, सत्यनारायन यादव, सुभाष चौबे, छविलाल, जोगेंद्र गौड़, धारी निषाद, अजय चौबे, राजकुमार आदि किसानों का कहना है कि वह दिन में रखवाली के बाद भी जैसे खेतों से हटते हैं पशुओं का झुंड खेतों में पहुंच जाता है। रात में भी 10 बजे तक किसान पशुओं के झुंड को खेतों से निकालते हैं। रात में खेतों में जहरीले सांपों से भी खतरा बना रहता है। रात में उनके सो जाने के बाद पशु खेतों में आराम से पहुंच कर उनकी फसलों को निवाला बनाते हैं। किसानों का कहना है कि अगर हमारी फसलें नहीं बची तो दोगुनी कमाई दूर की बात है। हम लोगों के खाने के भी लाले पड़ जाएंगे। हम किसान ब्लॉक और तहसील के अधिकारियों से गुहार और सरकार से गुहार लगा रहे हैं कि वह पशुओं की वैकल्पिक व्यवस्था करें और गोशाला में ले जाएं। लेकिन शासन-प्रशासन ऑख और कान बंद किए हुए हैं अभी एक सप्ताह पहले किसानों ने छुट्टा पशुओं को लेकर विरोध प्रदर्शन भी किया। किसानों ने छुट्टा पशुओं के आतंक को लेकर मतदान बहिष्कार की भी चेतावनी दी है।
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