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घरेलू हिंसा से जंग, आत्मनिर्भरता की मुहिम

Sat, 23 Jan 2021 11:56 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 23 Jan 2021 11:56 PM IST
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War on domestic violence campaign for self sufficiency
आजमगढ़। जनपद में महिलाओं और बालिकाओं के उत्थान को लेकर कई संगठन कार्य कर रहे हैं। इनके द्वारा महिलाओं और बालिकाओं के हक की आवाज को बुलंद किया जा रहा है। लेकिन इसमें से कुछ संगठन ऐसे हैं जिनके द्वारा किए गए कार्यों की सराहना आज हर कोई करता है। आज इन संगठनों ने अपनी मेहनत से वह मुकाम हासिल किया है जिनके दम पर लोग उन्हें जानते और पहचानते हैं।
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दो हजार से अधिक बालिकाओं का किया पुनर्वास
लाटघाट। सगड़ी तहसील क्षेत्र के श्री रामानंद सरस्वती पुस्तकालय जोकहरा की निदेशिका हिना देसाई को शायद ही कोई ऐसा हो जो न जानता हो। इनके द्वारा अब तक दो हजार से अधिक बालिकाओं के पुनर्वास में सहयोग किया है। 10 हजार से अधिक बालिकाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए जागृत किया गया है। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में पहुंचकर बालिकाओं को अपने साथ होने वाली हिंसा आदि का विरोध करने के बारे में जागरूक किया जाता है। इतना ही नहीं उनके वर्कशॉप में काम करने वाली लड़कियां आज मुंबई और दिल्ली में थिएटर या फिल्म में काम कर रही हैं। इसके साथ ही घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए भी वह संघर्षरत हैं। उनको पुस्तकालय पर लाकर आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई तरह का प्रशिक्षण भी दिया जाता है।
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मिजवां वेलफेयर सोसायटी बना रही बालिकाओं का भविष्य
मेजवां। भारत में हर साल 24 जनवरी को राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है। फूलपुर तहसील क्षेत्र के कैफी आजमी के पैतृक गांव मेजवां में वर्ष 1993 में उर्दू के मशहूर शायर कैफी आजमी मिजवां वेलफेयर सोसाइटी का गठन किया है। कैफी आजमी सिलाई सेंटर में 285 और चिकनकारी सेंटर में 600 से अधिक बालिकाएं काम कर रही हैं। तीन सालों में 700 से अधिक बालिकाओं को रोजगार दिया जा चुका है। कैफी आजमी गर्ल्स इंटर कालेज में 400 से अधिक बालिकाएं शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। अभिनेत्री शबाना आजमी के प्रयास से इन सभी बलिकाओं शिक्षा दी जाती है। पिछले दो वर्षों में 59 से अधिक बालिकाओं को नौकरी मिल चुकी है। मिजवां वेलफेयर सोसाइटी के प्रबंधक आशुतोष त्रिपाठी ने बताया कि कैफी आजमी और शबाना आजमी के प्रयास से चल रहे संस्थान में खास तौर से बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के तहत बालिकाओं को शिक्षित किया जाता है।
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