अहरौला। फूलपुर तहसील के पूरा रामजी ग्राम सभा के तरकुलहा में पोखरी के गाटों में फर्जी शिक्षण संस्था संचालित होने से नाराज ग्रामीणों ने सोमवार को विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने पदयात्रा निकालकर पोखरी से संस्था का नाम हटाकर उसे ग्राम सभा के खाते में दर्ज करने की मांग की। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ग्राम सभा की लगभग 52 एकड़ जमीन पर एक पूर्व विधायक के द्वारा फर्जी तरीके से जमीन को अपने नाम कर लिया गया। तमाम दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा करते हुए अधिकारियों को अपने पक्ष में करते हुए लगातार कागजों में अपने प्रभाव और धनबल का प्रयोग करते हुए पोखरी के जमीन पर एक एजुकेशन संस्था भी संचालित कर रहे हैं। जिसे लेकर बीते साल ग्रामीणों के द्वारा जिला विद्यालय निरीक्षक से तत्काल मान्यता रद्द करने की मांग की गई थी। शिकायतकर्ता तरकुलहा मंदिर के महंत अर्जुन दास, पुजारी राधे मोहन, राजधारी, संतराम, ग्राम प्रधान रेखा यादव आदि लोगों के द्वारा इसकी लड़ाई लड़ी जा रही है। ग्राम प्रधान रेखा देवी के नेतृत्व में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर छह में बाद दाखिल किया गया था। जिसमें बीते जुलाई में कोर्ट के द्वारा एसडीएम फूलपुर सहित पूर्व विधायक परिवार के पांच लोगों को नोटिस जारी कर एसडीएम फूलपुर से तत्काल पत्रावली को कोर्ट में पेश करने की निर्देश दिए थे। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार 1994 से हम लोग लड़ाई लड़ रहे हैं हाई कोर्ट से उक्त पूर्व विधायक पर जुर्माना भी लगाया गया है लेकिन सब कुछ अधिकारियों की कृपा पर ठंडे बस्ते में है। 2018 में हम लोगों का आंदोलन रंग लाया और 52 एकड़ जमीन से लगभग साढ़े तीन एकड़ जमीन खारिज कर ग्राम सभा के नाम दर्ज की गई और पूर्व विधायक सहित उनके परिवार के 13 लोगों के खिलाफ अहरौला थाने में मुकदमा भी दर्ज किया गया है। लेकिन अभी तक एसडीएम के द्वारा कोर्ट में रिपोर्ट पेश नहीं की गई इसलिए हम लोगों के द्वारा 26 जनवरी को सार्वजनिक रूप से पोखरी में चल रहे विद्यालय के साथ आत्मदाह करने की चेतावनी भी दी गई है। इसके लिए देश के राष्ट्रपति प्रधानमंत्री और मुख्य न्यायाधीश सहित तमाम लोगों को पत्र भेजा गया है और फिर 14 जनवरी को रिमाइंडर भी भेज दिया गया है। हमारी मांग हैं कि अब भी 46 एकड़ जमीन पूर्व विधायक के कब्जे में है जिसका कब्जा हटाकर तत्काल उसे ग्राम सभा में दर्ज कराया जाए। इस मौके पर पुजारी राधे मोहन, महंत अर्जुन दास, शिव शंकर, राजकुमार, सुलेखचंद, संतराम, मदन मोहन, रामअचल आदि उपस्थित थे।