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सड़कों पर काला धुआं उगल रहे वाहन बांट रहे बीमारी
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आजमगढ़। जिले की सड़कों पर वाहनों की जांच के नाम पर बाइक सवार के हेलमेट की खोज परिवहन विभाग के साथ पुलिस भी करती है। लेकिन सड़कों पर काला धुआं उगलने वाले वाहनों पर इनकी नजर नहीं जाती है। करीब 50 लाख की आबादी वाले इस शहर में करीब पांच प्रतिशत अनफिट वाहन सड़कों पर बिना रोक-टोक के दौड़ रहे हैं। जिससे निकलने वाला काला धुआं न सिर्फ शहर को प्रदूषित कर रहा है बल्कि लोगों के बीच मुफ्त में बीमारी भी बांट रहा है।
परिवहन विभाग के आंकड़े के मुताबिक जिले में पांच लाख 47 हजार 450 दो पहिया वाहन, 18 हजार 707 चार पहिया वाहन कार और 15 हजार 366 चार पहिया वाहन जीप है। वहीं 10 हजार से अधिक आटो संचालित हो रहे हैं। एआरटीओ विभाग की माने तो करीब पांच प्रतिशत वाहन अनफिट हैं। पिछले पांच सालों में इन वाहनों ने फिटनेस नहीं कराया। ऐसे में यह वाहन बिना रोक-टोक के विभिन्न पथों पर दौड़ लगाकर लोगों का फिटनेस बिगाड़ रहे हैं। जहरीला धुआं उगलते इन छोटे-बड़े वाहनों की स्थिति यह है कि शहर के व्यस्ततम मार्ग पर पैदल चलने वालों को नाक पर रुमाल रखना पड़ता है। यही अनफिट वाहन दुर्घटना का कारण भी बनते है। कहने को तो कागजों पर कई धुआं जांच केंद्र खुले हैं पर जिले में किसी भी स्थान पर इन जहर उगल रहे वाहनों की फिटनेस चेक करने वाले यातायात पुलिस या परिवहन विभाग के अधिकारी नजर नहीं आते। ये वाहन दुर्घटना को आमंत्रण तो देते ही हैं साथ ही लोगों को सांस संबंधी रोग भी बांट रहे हैं। आश्चर्यजनक तो यह भी है कि परिवहन विभाग के पास अनफिट वाहनों का कोई मुकम्मल आंकड़ा भी मौजूद नहीं है।
समय-समय पर अनफिट वाहनों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की जाती है। पिछले पांच सालों में करीब पांच प्रतिशत वाहनों का फिटनेस नहीं हो सका है। ऐसे में यह वाहन किस स्थिति में हैं यह बता पाना मुश्किल है। हालांकि इनमें से कई वाहन काट भी दिए गए हैं। इन वाहनों पर अंकुश लगाने के लिए अभियान चलाया जाएगा।
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संतोष सिंह, एआरटीओ, आजमगढ़।
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परिवहन विभाग के आंकड़े के मुताबिक जिले में पांच लाख 47 हजार 450 दो पहिया वाहन, 18 हजार 707 चार पहिया वाहन कार और 15 हजार 366 चार पहिया वाहन जीप है। वहीं 10 हजार से अधिक आटो संचालित हो रहे हैं। एआरटीओ विभाग की माने तो करीब पांच प्रतिशत वाहन अनफिट हैं। पिछले पांच सालों में इन वाहनों ने फिटनेस नहीं कराया। ऐसे में यह वाहन बिना रोक-टोक के विभिन्न पथों पर दौड़ लगाकर लोगों का फिटनेस बिगाड़ रहे हैं। जहरीला धुआं उगलते इन छोटे-बड़े वाहनों की स्थिति यह है कि शहर के व्यस्ततम मार्ग पर पैदल चलने वालों को नाक पर रुमाल रखना पड़ता है। यही अनफिट वाहन दुर्घटना का कारण भी बनते है। कहने को तो कागजों पर कई धुआं जांच केंद्र खुले हैं पर जिले में किसी भी स्थान पर इन जहर उगल रहे वाहनों की फिटनेस चेक करने वाले यातायात पुलिस या परिवहन विभाग के अधिकारी नजर नहीं आते। ये वाहन दुर्घटना को आमंत्रण तो देते ही हैं साथ ही लोगों को सांस संबंधी रोग भी बांट रहे हैं। आश्चर्यजनक तो यह भी है कि परिवहन विभाग के पास अनफिट वाहनों का कोई मुकम्मल आंकड़ा भी मौजूद नहीं है।
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समय-समय पर अनफिट वाहनों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की जाती है। पिछले पांच सालों में करीब पांच प्रतिशत वाहनों का फिटनेस नहीं हो सका है। ऐसे में यह वाहन किस स्थिति में हैं यह बता पाना मुश्किल है। हालांकि इनमें से कई वाहन काट भी दिए गए हैं। इन वाहनों पर अंकुश लगाने के लिए अभियान चलाया जाएगा।
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संतोष सिंह, एआरटीओ, आजमगढ़।