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वर्दी पर एक के बजाय दो स्टार
आशीष तिवारी, आजमगढ़
Updated Fri, 25 Mar 2016 11:43 PM IST
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फिलहाल पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।
- फोटो : Demo pic
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बिना वाजिब हक के कोई पुलिस की वर्दी पहने मिले तो उसकी जगह हवालात होती है पर यही बात खुद कानून के रखवालों पर लागू नहीं होती है। पद के लिहाज से पुलिस वर्दी पर लगने वाले तमगे तय हैं लेकिन मंडल में इसका पालन नहीं हो रहा है। इतना ही नहीं, डीआईजी इस मामले में एक बार खुद कार्रवाई कर चुके हैं, लेकिन कोई सुधरने का नाम नहीं ले रहा।
मंडल के तीनों जिलों में तैनात 500 दरोगा पुलिस नियमावली की अनदेखी करते हुए वर्दी पर एक स्टार की जगह दो स्टार लगा रहे हैं। ऐसे में न केवल क्षेत्रीय जनता गुमराह हो रही बल्कि कभी-कभी आलाधिकारी भी गफलत में पड़ जाते हैं। यह पहचानना मुश्किल हो जाता है कि थानाध्यक्ष या सेकेंड अफसर कौन है।
प्रमोशन मिलने के बाद से ही यह लोग जहां नियम का मजाक उड़ा रहे, वहीं आम लोगों की नजर में विभाग और सरकार की किरकिरी हो रही है। काफी दिनों से रुके प्रमोशन प्रणाली को लागू करते हुए प्रदेश सरकार ने कई कांस्टेबलों को हेडकांस्टेबल और हेडकांस्टेबलों को प्रमोशन देकर एचसीपी (विशेष श्रेणी दरोगा) बना दिया। आजमगढ़ मंडल के तीनों जिलों आजमगढ़ में 319, मऊ में 70 और बलिया जिले में 110 प्रमोशन पाने वाले एचसीपी नियमों की अनदेखी करते हुए अपनी वर्दी पर एक पीला स्टार लगाने के बजाय दो पीला स्टार लगा रहे हैं। काले रंग का जूता की जगह लाल रंग का जूता पहन रहे हैं।
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थानों पर तैनात ये एचसीपी ड्यूटी के दौरान डंडा लेकर चलने से परहेज करते हैं। पर्याप्त मात्रा में असलहा न होने की वजह से इन्हें शस्त्र दिया नहीं गया है। ऐसे में यह लोग बगैर हथियार ही ड्यूटी कर रहे हैं। थानों की मौजूदा स्थिति पर नजर दौड़ाएं तो कोतवाली तक की कमान उपनिरीक्षक संभाल रहे हैं। नियमानुसार उपनिरीक्षक की वर्दी पर पीले कलर के दो स्टार रहते हैं। ऐसे में थानाध्यक्ष के साथ या बगल में बैठने वाले इन एचसीपी की वर्दी पर भी दो स्टार होने से लोगों को खासी परेशानी हो रही है। उदाहरण के तौर पर एक माह पूर्व डीआईजी आजमगढ़ मंडल लालगंज तहसील दिवस में गए थे।
जनशिकायत पर उनके समक्ष देवगांव कोतवाली पर तैनात एचसीपी डीआईजी के समक्ष पहुंच गए। डीआईजी ने उन्हें फटकारते हुए लोगों के सामने ही एक स्टार उतरवा दिया। इस तरह की कई घटनाओं के बावजूद इनके स्टार नहीं उतर सके। देवगांव कोतवाली में कुल 14 एचसीपी तैनात हैं। कोतवाल ने लिखित रूप से सभी को वर्दी पर एक स्टार लगाने की चेतावनी दी है लेकिन लोग आदतों से बाज नहीं आ रहे।
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मंडल के तीनों जिलों में तैनात 500 दरोगा पुलिस नियमावली की अनदेखी करते हुए वर्दी पर एक स्टार की जगह दो स्टार लगा रहे हैं। ऐसे में न केवल क्षेत्रीय जनता गुमराह हो रही बल्कि कभी-कभी आलाधिकारी भी गफलत में पड़ जाते हैं। यह पहचानना मुश्किल हो जाता है कि थानाध्यक्ष या सेकेंड अफसर कौन है।
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प्रमोशन मिलने के बाद से ही यह लोग जहां नियम का मजाक उड़ा रहे, वहीं आम लोगों की नजर में विभाग और सरकार की किरकिरी हो रही है। काफी दिनों से रुके प्रमोशन प्रणाली को लागू करते हुए प्रदेश सरकार ने कई कांस्टेबलों को हेडकांस्टेबल और हेडकांस्टेबलों को प्रमोशन देकर एचसीपी (विशेष श्रेणी दरोगा) बना दिया। आजमगढ़ मंडल के तीनों जिलों आजमगढ़ में 319, मऊ में 70 और बलिया जिले में 110 प्रमोशन पाने वाले एचसीपी नियमों की अनदेखी करते हुए अपनी वर्दी पर एक पीला स्टार लगाने के बजाय दो पीला स्टार लगा रहे हैं। काले रंग का जूता की जगह लाल रंग का जूता पहन रहे हैं।
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थानों पर तैनात ये एचसीपी ड्यूटी के दौरान डंडा लेकर चलने से परहेज करते हैं। पर्याप्त मात्रा में असलहा न होने की वजह से इन्हें शस्त्र दिया नहीं गया है। ऐसे में यह लोग बगैर हथियार ही ड्यूटी कर रहे हैं। थानों की मौजूदा स्थिति पर नजर दौड़ाएं तो कोतवाली तक की कमान उपनिरीक्षक संभाल रहे हैं। नियमानुसार उपनिरीक्षक की वर्दी पर पीले कलर के दो स्टार रहते हैं। ऐसे में थानाध्यक्ष के साथ या बगल में बैठने वाले इन एचसीपी की वर्दी पर भी दो स्टार होने से लोगों को खासी परेशानी हो रही है। उदाहरण के तौर पर एक माह पूर्व डीआईजी आजमगढ़ मंडल लालगंज तहसील दिवस में गए थे।
जनशिकायत पर उनके समक्ष देवगांव कोतवाली पर तैनात एचसीपी डीआईजी के समक्ष पहुंच गए। डीआईजी ने उन्हें फटकारते हुए लोगों के सामने ही एक स्टार उतरवा दिया। इस तरह की कई घटनाओं के बावजूद इनके स्टार नहीं उतर सके। देवगांव कोतवाली में कुल 14 एचसीपी तैनात हैं। कोतवाल ने लिखित रूप से सभी को वर्दी पर एक स्टार लगाने की चेतावनी दी है लेकिन लोग आदतों से बाज नहीं आ रहे।