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Azamgarh News: दो किसानों ने शुरू की ड्रैगन फ्रूट की खेती, कमा रहे लाखों
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आजमगढ़। पारंपरिक खेती के साथ ही किसान अब औद्यानिक खेती के लिए भी आगे आ रहे हैं। स्ट्राबेरी के साथ ही ड्रैगन फ्रूट की खेती की शुरुआत हो गई है। जिले के दो किसान ड्रैगन फ्रूट की खेती कर लाखों कमा रहे हैं। वहीं शासन की तरफ ड्रैगन फ्रूट की खेती को बढ़ावा देने के लिए 2025 से सब्सिडी की राशि भी बढ़ा दी गई है।
जिले में दो साल पहले अहरौला ब्लॉक के कोतवालीपुर में किसान राजेश सिंह ने पौने दो एकड़ और जहानागंज ब्लॉक के भोपतपुर में किसान अशोक गौड़ ने दो हेक्टेयर में ड्रैगन फ्रूट की शुरुआत की। ड्रैगन फ्रूट की दो प्रजातियां एक थाइलैंड रेड और दूसरा वियतनाम व्हाइट है। जिले के दोनों किसान थाइलैंड रेट प्रजाति की खेती किए हुए हैं। प्रति हेक्टेयर लागत करीब नौ लाख रुपये आता है। एक बार लागत लगाकर 20 से 25 सालों तक देखरेख कर फल प्राप्त किया जा सकता है। पहली तोड़ाई कर किसान लाखों रुपये कमा चुके हैं। अब अगस्त, सितंबर तक दूसरी बार फल निकलेंगे।
किसान राजेश सिंह ने बताया कि पौने दो एकड़ में 1200 ड्रैगन फ्रूट के पौधे लगाकर खेती शुरू की। इसमें बीच में चंदन के पौधे भी लगाए गए हैं। 16 माह बाद पहली बार फल आया था। बाहर से मांग आई थी लेकिन लोकल व्यापारी ही खरीद ले गए। इस बार से अधिक फल निकलेंगे तो आय भी अच्छी होगी।
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अब किसानों को मिलेगी 2.70 लाख की सब्सिडी
जिला उद्यान अधिकारी हरिशंकर राम ने बताया कि किसानों को ड्रैगन फ्रूट की खेती करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। पहले 30 हजार रुपये ही सब्सिडी मिलती थी। ड्रैगन फ्रूट की खेती पर अधिक लागत को देखते हुए केंद्र सरकार ने 2025 से सब्सिडी की राशि बढ़ाकर 2.70 लाख रुपये कर दी है। प्रति पिलर पर चार पौधे लगाए जाते हैं। इस पर करीब 800 रुपये खर्च आता है। 15 से 20 टन प्रति हेक्टेयर फल निकलता है। ड्रैगन फ्रूट की खेती व्यावसायिक खेती है। क्योंकि मार्केट में इसका अच्छा दाम मिलता है। किसान ड्रैगन की खेती कर लाखों कमा सकते हैं।
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जिले में दो साल पहले अहरौला ब्लॉक के कोतवालीपुर में किसान राजेश सिंह ने पौने दो एकड़ और जहानागंज ब्लॉक के भोपतपुर में किसान अशोक गौड़ ने दो हेक्टेयर में ड्रैगन फ्रूट की शुरुआत की। ड्रैगन फ्रूट की दो प्रजातियां एक थाइलैंड रेड और दूसरा वियतनाम व्हाइट है। जिले के दोनों किसान थाइलैंड रेट प्रजाति की खेती किए हुए हैं। प्रति हेक्टेयर लागत करीब नौ लाख रुपये आता है। एक बार लागत लगाकर 20 से 25 सालों तक देखरेख कर फल प्राप्त किया जा सकता है। पहली तोड़ाई कर किसान लाखों रुपये कमा चुके हैं। अब अगस्त, सितंबर तक दूसरी बार फल निकलेंगे।
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किसान राजेश सिंह ने बताया कि पौने दो एकड़ में 1200 ड्रैगन फ्रूट के पौधे लगाकर खेती शुरू की। इसमें बीच में चंदन के पौधे भी लगाए गए हैं। 16 माह बाद पहली बार फल आया था। बाहर से मांग आई थी लेकिन लोकल व्यापारी ही खरीद ले गए। इस बार से अधिक फल निकलेंगे तो आय भी अच्छी होगी।
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अब किसानों को मिलेगी 2.70 लाख की सब्सिडी
जिला उद्यान अधिकारी हरिशंकर राम ने बताया कि किसानों को ड्रैगन फ्रूट की खेती करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। पहले 30 हजार रुपये ही सब्सिडी मिलती थी। ड्रैगन फ्रूट की खेती पर अधिक लागत को देखते हुए केंद्र सरकार ने 2025 से सब्सिडी की राशि बढ़ाकर 2.70 लाख रुपये कर दी है। प्रति पिलर पर चार पौधे लगाए जाते हैं। इस पर करीब 800 रुपये खर्च आता है। 15 से 20 टन प्रति हेक्टेयर फल निकलता है। ड्रैगन फ्रूट की खेती व्यावसायिक खेती है। क्योंकि मार्केट में इसका अच्छा दाम मिलता है। किसान ड्रैगन की खेती कर लाखों कमा सकते हैं।