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घाघरा की कटान से ग्रामीण भयभीत
अमर उजाला ब्यूरो/आजमगढ
Updated Sun, 31 Jul 2016 11:52 PM IST
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बाढ़
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सगड़ी तहसील में उफनाई घाघरा का जलस्तर रविवार को स्थिर रहा लेकिन बाढ़ से घिरे गांवों में कटान तेज होने के भय से लोग सुरक्षित स्थानों पर जाने को मजबूर हैं। लोग कीमती सामानों को समेटने लगे हैं। कुछ लोगों ने तो अपनी रिश्तेदारियों में शरण ले लिया है।
शनिवार की शाम चार बजे बदरहुवा नाले पर घाघरा का जलस्तर 71.96 और डिघिया नाले पर 71.10 दर्ज किया। जबकि रविवार को शाम चार बजे बदरहुवा पर जलस्तर 71.96 और डिघिया पर 71.10 दर्ज किया गया। घाघरा के स्थिर होने से अब कटान तेज हो गई है। हरैया ब्लाक के देवारा खास राजा गांव के मुराली का पुरवा गांव अब घाघरा नदी के कटान के जद मे आ गया है।
इस गांव के मुराली, परसन, लालबचन, रामवृक्ष, रामकवल, लालधर अपने सामान समेटकर रौनापार नई बस्ती और रामदरश बिसरा गोला गोरखपुर जा रहे हैं। इनका कहना है कि सरकार की तरफ से कोई व्यवस्था नहीं की गई है। हम लोग स्वयं की व्यवस्था से अपना सामान लेकर सुरक्षित स्थान पर जाने को मजबूर हैं। घाघरा नदी के तट पर बसने वाले कई लोगों की खेती योग्य जमी इससे पहले आई बाढ़ में नदी में समाहित हो चुकी है। इस बार जलस्तर बढ़ने के बाद घटाव की स्थिति में तेजी से कटान होती है जिसको लेकर लोग भयभीत हैं। बाढ़ के पानी से घिरे गांवों में जिला प्रशासन की ओर से कोई खासव्यवस्था नहीं की गई है।
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नाव का पर्याप्त इंतजाम न होने से लोगों को आने जाने में दिक्कत हो रही है। उधर, उपजिलाधिकारी सगडी चंद्र प्रकाश सरोज का कहना हो कि बंधे के दक्षिण प्राइमरी स्कूल के परिसर में बाढ़ पीड़ितों को ठहराने की व्यवस्था की गई है।
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शनिवार की शाम चार बजे बदरहुवा नाले पर घाघरा का जलस्तर 71.96 और डिघिया नाले पर 71.10 दर्ज किया। जबकि रविवार को शाम चार बजे बदरहुवा पर जलस्तर 71.96 और डिघिया पर 71.10 दर्ज किया गया। घाघरा के स्थिर होने से अब कटान तेज हो गई है। हरैया ब्लाक के देवारा खास राजा गांव के मुराली का पुरवा गांव अब घाघरा नदी के कटान के जद मे आ गया है।
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इस गांव के मुराली, परसन, लालबचन, रामवृक्ष, रामकवल, लालधर अपने सामान समेटकर रौनापार नई बस्ती और रामदरश बिसरा गोला गोरखपुर जा रहे हैं। इनका कहना है कि सरकार की तरफ से कोई व्यवस्था नहीं की गई है। हम लोग स्वयं की व्यवस्था से अपना सामान लेकर सुरक्षित स्थान पर जाने को मजबूर हैं। घाघरा नदी के तट पर बसने वाले कई लोगों की खेती योग्य जमी इससे पहले आई बाढ़ में नदी में समाहित हो चुकी है। इस बार जलस्तर बढ़ने के बाद घटाव की स्थिति में तेजी से कटान होती है जिसको लेकर लोग भयभीत हैं। बाढ़ के पानी से घिरे गांवों में जिला प्रशासन की ओर से कोई खासव्यवस्था नहीं की गई है।
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नाव का पर्याप्त इंतजाम न होने से लोगों को आने जाने में दिक्कत हो रही है। उधर, उपजिलाधिकारी सगडी चंद्र प्रकाश सरोज का कहना हो कि बंधे के दक्षिण प्राइमरी स्कूल के परिसर में बाढ़ पीड़ितों को ठहराने की व्यवस्था की गई है।