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एक छत तले तीस हजार पुस्तकों का संगम
ब्यूरो/अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Mon, 01 Feb 2016 11:46 PM IST
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शिब्ली नेशनल इंटर कॉलेज और शुरुआत समिति के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को शिब्ली नेशनल इंटर कॉलेज में पुस्तक मेले का शुभारंभ हुआ। इस दौरान 30 हजार पुस्तकें लोगों के अवलोकन और खरीदारी के लिए रखी गईं। मेले का उद्घाटन जिलाधिकारी सुहास एलवाई ने किया। इस अवसर पर छात्रों ने आजमगढ़ के सांस्कृतिक धरोहरों का चित्रांकन किया। साथ ही लोगों ने अपनी पसंद की पुस्तकों की खरीदारी की। मेले में 30 से अधिक प्रकाशकों ने स्टाल लगाया।
उद्घाटन करने के बाद एलवाई ने कहा कि साहित्य विवेक देता है, आजमगढ़ की रवायत हिंदी के साथ उर्दू अदब की है। आजमगढ़ के सपनों को मूर्त करने में साहित्य की वृहत्तर भूमिका है। यह परिसर आजादी की लड़ाई से लेकर समकालीन समय तक अपनी सकारात्मक भूमिका निभा रहा है।
मेेले में हिस्सा ले रहे प्रकाशकों का स्वागत करते हुए बोले कि पुस्तक मेला व्यापार नहीं है, पुस्तक मेला ज्ञान प्रवाह का केंद्र है। प्रख्यात पत्रकार और मीडिया विश्लेषक उर्मिलेश ने कहा कि आज मीडिया के संस्थान आम आदमी की समस्याओं को उठाएं। जिंदगी की छोटी-छोटी दुविधा बड़े-बड़े संकट को दावत दे रही है।
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कहा कि पिछले 50 वर्षों में जितनी तेजी से दुनिया बदली है, मानव इतिहास के हजारों वर्षों में इतना तकनीकी परिवर्तन नहीं हुआ था, उन्होंने कहा कि हमें तकनीक का विरोधी नहीं होना चाहिए, बल्कि हमें तकनीक के वैज्ञानिक इस्तेमाल का माहौल बनाना होगा।
कहा कि भारतीय मीडिया वैश्विक बाजार के दौर में है, वैश्विक शक्ति तय कर रही है कि मीडिया का स्वरूप कैसा होगा। पुस्तक मेलों का आयोजन सांस्कृतिक पुनर्निर्माण की कोशिश है। विषय पर प्रकाश डालाते हुए शिब्ली एकेडमी के फखरुल इस्लाम ने कहा कि साहित्य जनतंत्र की स्थापना की कसौटी है, साहित्य रचना धर्मिता को विस्तार देता है, साहित्य जन सरोकार की कसौटी है।
कहा कि यह मेला आजमगढ़ की सृृजन की परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास है। मौलाना उमेर सिद्दीकी ने कहा कि किताब वैकल्पिक मीडिया है, विश्व बाजार के दौर में किताब ही है जो समाज की कड़वी सच्चाई को साहित्य सृजन के माध्यम से प्रस्तुत कर रही है। कहा कि किताबें सामाजिक जड़ता को तोड़ती है। प्राचार्य सुहैल अहमद ने कहा कि यह मेला विद्यार्थियों के आकर्षण का केंद्र है। यह मनुष्यता के विकास का उत्सव है, यह मुहिम पिछले 14 वर्षों से निरंतर जारी है।
विधायक आलमबदी ने कहा कि यह सात दिवसीय उत्सव साधारण उत्सव नहीं है। कार्यक्रम को सपा जिलाध्यक्ष हवलदार यादव, पत्रकार बनवारी लाल जालान, जगदीश चंद्र बरनवाल, कन्हैया लाल आदि ने संबोधित किया। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता यूनियन बैंक के रीजनल हेड कैलाश ने किया। उन्होंने कहा कि बदलती दुनिया में सामाजिक समृद्धि का रास्ता पुस्तकें हैं।
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उद्घाटन करने के बाद एलवाई ने कहा कि साहित्य विवेक देता है, आजमगढ़ की रवायत हिंदी के साथ उर्दू अदब की है। आजमगढ़ के सपनों को मूर्त करने में साहित्य की वृहत्तर भूमिका है। यह परिसर आजादी की लड़ाई से लेकर समकालीन समय तक अपनी सकारात्मक भूमिका निभा रहा है।
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मेेले में हिस्सा ले रहे प्रकाशकों का स्वागत करते हुए बोले कि पुस्तक मेला व्यापार नहीं है, पुस्तक मेला ज्ञान प्रवाह का केंद्र है। प्रख्यात पत्रकार और मीडिया विश्लेषक उर्मिलेश ने कहा कि आज मीडिया के संस्थान आम आदमी की समस्याओं को उठाएं। जिंदगी की छोटी-छोटी दुविधा बड़े-बड़े संकट को दावत दे रही है।
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कहा कि पिछले 50 वर्षों में जितनी तेजी से दुनिया बदली है, मानव इतिहास के हजारों वर्षों में इतना तकनीकी परिवर्तन नहीं हुआ था, उन्होंने कहा कि हमें तकनीक का विरोधी नहीं होना चाहिए, बल्कि हमें तकनीक के वैज्ञानिक इस्तेमाल का माहौल बनाना होगा।
कहा कि भारतीय मीडिया वैश्विक बाजार के दौर में है, वैश्विक शक्ति तय कर रही है कि मीडिया का स्वरूप कैसा होगा। पुस्तक मेलों का आयोजन सांस्कृतिक पुनर्निर्माण की कोशिश है। विषय पर प्रकाश डालाते हुए शिब्ली एकेडमी के फखरुल इस्लाम ने कहा कि साहित्य जनतंत्र की स्थापना की कसौटी है, साहित्य रचना धर्मिता को विस्तार देता है, साहित्य जन सरोकार की कसौटी है।
कहा कि यह मेला आजमगढ़ की सृृजन की परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास है। मौलाना उमेर सिद्दीकी ने कहा कि किताब वैकल्पिक मीडिया है, विश्व बाजार के दौर में किताब ही है जो समाज की कड़वी सच्चाई को साहित्य सृजन के माध्यम से प्रस्तुत कर रही है। कहा कि किताबें सामाजिक जड़ता को तोड़ती है। प्राचार्य सुहैल अहमद ने कहा कि यह मेला विद्यार्थियों के आकर्षण का केंद्र है। यह मनुष्यता के विकास का उत्सव है, यह मुहिम पिछले 14 वर्षों से निरंतर जारी है।
विधायक आलमबदी ने कहा कि यह सात दिवसीय उत्सव साधारण उत्सव नहीं है। कार्यक्रम को सपा जिलाध्यक्ष हवलदार यादव, पत्रकार बनवारी लाल जालान, जगदीश चंद्र बरनवाल, कन्हैया लाल आदि ने संबोधित किया। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता यूनियन बैंक के रीजनल हेड कैलाश ने किया। उन्होंने कहा कि बदलती दुनिया में सामाजिक समृद्धि का रास्ता पुस्तकें हैं।