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सिस्टम ही कुपोषित, कैसे मिटे कुपोषण का कलंक
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आजमगढ़। कुपोषण को खत्म करने के लिए सरकार करोड़ों रूपये खर्च कर काम कर रही है, लेकिन इसके बावजूद कुपोषण जिले के लिए कलंक बना हुआ है। जिले में आज भी हजारों बच्चे कुपोषण से जूझ रहे हैं। कुपोषण की इस हकीकत को भले ही जिम्मेदार लाख छुपाने की कोशिश करे, लेकिन हकीकत सबकी आंखों के सामने नासूर जैसी बन चुकी है।
प्रदेश सरकार कुपोषण को दूर करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन तमाम कोशिशों के बाद भी कुपोषण पूरी तरह खत्म नहीं हो पा रहा है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और ग्राम प्रधानों की लापरवाही की वजह से योजना का लाभ कुपोषित, अति कुपोषित और गर्भवती महिलाओं तक नहीं पहुंच पा रहा है। इस योजना में कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों को देसी घी, दूध, दही और फल का वितरण किया जाता है। गर्भवती महिलाओं को आहार उपलब्ध कराया जाता है, लेकिन कई पोषण मिशन सिर्फ कागजों में ही चल रहा है। अधिकारी भी गांवों का दौरा नहीं कर रहे हैं। ऐसे में तमाम योजनाएं धड़ाम हो गई हैं।
इस मामले में जिला कार्यक्रम अधिकारी मनोज मौर्या ने बताया कि कुपोषण को मिटाने के लिए विभाग पूरी लगन से मेहनत कर रहा है। बच्चों व गर्भवती और धात्री महिलाओं को योजना का लाभ दिया जाता है। जहां तक रही बात आंकड़े की तो अभी हमारे पास पुराने आंकड़े हैं। एक अप्रैल को नया आंकड़ा दे सकेंगे।
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एक नजर विभागीय आंकड़ों पर
छह माह से तीन वर्ष बच्चे - 275666 बच्चे पंजीकृत
तीन से छह वर्ष बच्चे - 248006 बच्चे पंजीकृत
गर्भवती व धात्री महिलाएं - 11092 महिलाएं पंजीकृत
अति कुपोषण (लाल श्रेणी) - 12305 बच्चे
कुपोषित (पीली श्रेणी) - 48225 बच्चे
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प्रदेश सरकार कुपोषण को दूर करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन तमाम कोशिशों के बाद भी कुपोषण पूरी तरह खत्म नहीं हो पा रहा है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और ग्राम प्रधानों की लापरवाही की वजह से योजना का लाभ कुपोषित, अति कुपोषित और गर्भवती महिलाओं तक नहीं पहुंच पा रहा है। इस योजना में कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों को देसी घी, दूध, दही और फल का वितरण किया जाता है। गर्भवती महिलाओं को आहार उपलब्ध कराया जाता है, लेकिन कई पोषण मिशन सिर्फ कागजों में ही चल रहा है। अधिकारी भी गांवों का दौरा नहीं कर रहे हैं। ऐसे में तमाम योजनाएं धड़ाम हो गई हैं।
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इस मामले में जिला कार्यक्रम अधिकारी मनोज मौर्या ने बताया कि कुपोषण को मिटाने के लिए विभाग पूरी लगन से मेहनत कर रहा है। बच्चों व गर्भवती और धात्री महिलाओं को योजना का लाभ दिया जाता है। जहां तक रही बात आंकड़े की तो अभी हमारे पास पुराने आंकड़े हैं। एक अप्रैल को नया आंकड़ा दे सकेंगे।
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एक नजर विभागीय आंकड़ों पर
छह माह से तीन वर्ष बच्चे - 275666 बच्चे पंजीकृत
तीन से छह वर्ष बच्चे - 248006 बच्चे पंजीकृत
गर्भवती व धात्री महिलाएं - 11092 महिलाएं पंजीकृत
अति कुपोषण (लाल श्रेणी) - 12305 बच्चे
कुपोषित (पीली श्रेणी) - 48225 बच्चे