आजमगढ़। साहित्यकार डाॅ. कन्हैया सिंह की द्वितीय पुण्यतिथि पर रविवार को देर शाम हरिऔध कला केंद्र में स्मृति सभा व अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। सर्वप्रथम लोगाें ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर अपनी श्रद्धांजलि दी। इसके बाद डॉ. विनम्रसेन ने, बंद आंखों से आप आज मुझे रोज़ दिख जाते हैं, आज भी बाबा रोज़ बहुत याद आते हैं के साथ कवि सम्मेलन का शुभारंभ किया। लखनऊ से आए अभय निर्भीक ने, गावों की गलियां व्याकुल हो सोन चिरैया ढूंढ रही हैं, आज़मगढ़ की आंखें अपना सिंह कन्हैया ढूंढ रही हैं। गाकर साहित्य की क्षति की पीड़ा को व्यक्त किया। दिल्ली से आए अभिसार शुक्ल गीता ने, शूलों का दुर्भाग्य अमरता,पुष्पों को झड़ना पड़ता है। अर्जुन सबको अपना-अपना धर्मयुद्ध लड़ना पड़ता है, पंक्तियां सुनाकर साहित्यकार के जीवन के द्वंद को उज़ागर किया। इंदौर से आए कवि अमन अक्षर ने उन्हीं आंखों को चश्मे की कहीं ज्यादा ज़रूरत है, जिन्हें मां-बाप का टूटा हुआ चश्मा नहीं दिखता। सुनाकर आज के समाज को बुजुर्गियत के महत्व का आईना दिखाया। युवा कवियत्री मनु वैशाली ने, तुम कह रहे हो वैसे गांव में क्या रखा है। गाकर गांवों के महत्व को प्रकट किया। संचालन कर रहे युवा कवि संक्षेप अक्षत ने, लोकवचन का मूल्य बचाते मर्यादित अलबेले हैं, क्या रामराज्य के हर निर्णय में दोषी राम अकेले हैं। सुनाकर सबको व्यवस्था के प्रश्न पर सोचने को मजबूर कर दिया। अंत में राज्यमंत्री दानिश आज़ाद अंसारी को सम्मानित यिका गया। इस मौके पर भाजपा जिलाध्यक्ष ध्रुव सिंह, अखिलेश मिश्र गुड्डू, लक्ष्मण मौर्या, आरपी राय, पूर्व सांसद संतोष सिंह, सत्येंद्र राय, डॉ. अशोक सिंह, डॉ. भक्तवत्सल आदि मौजूद थे।