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इन 24 गांवों की ढाल बनती हैं महिलाएं

Fri, 07 Jul 2017 11:42 PM IST
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azamgarh Updated Fri, 07 Jul 2017 11:42 PM IST
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The shield of these 24 villages becomes women
घर से बरामद गैलनों की जांच करते डीआईजी उदय शंकर जायसवाल। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
लाटघाट/सगड़ी। रौनापार थाना क्षेत्र के करीब 24 गांवों में अवैध शराब का धंधा बड़े पैमाने पर किया जाता है। इनमें कई गांव घाघरा के किनारे स्थित हैं जहां बनी शराब न सिर्फ जिले में बल्कि घाघरा पार गोरखपुर समेत अन्य जिलों में सप्लाई की जाती है।
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इलाके के कुछ गांवों में पुलिस ने छापेमारी कर शराब, लहन और शराब बनाने के उपकरण कई बार बरामद कर चुकी है लेकिन इस अवैध धंधे पर पूरी तरह से रोक नहीं लग पाई। केवटहिया और ओढ़रा सलेमपुर में शराब पीने से हुई आठ  लोग की मौत के बाद पुलिस प्रशासन और आबकारी विभाग के अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।  
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रौनापार क्षेत्र के केवटहिया गांव सहित आसपास के इलाके के करीब दो दर्जन गांवों में घर-घर शराब बनाई और बेची जाती है। इन गांव में अपाहिज, बूढ़े और बच्चे शराब बेचते हैं जबकि पुलिस या आबकारी टीम के आने पर महिलाएं उनसे भिड़ कर मोर्च संभालती हैं। कार्रवाई में महिलाओं के आ जाने की वजह से टीम के बैरंग लौट जाना पड़ता है।
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इसी का परिणाम है कि गांव में कच्ची शराब का कारोबार कुटीर उद्योग का रूप ले लिया है। करीब तीन हजार की आबादी वाले इस गांव के अधिकतर लोग ईंट भट्ठे पर मजदूरी, करते हैं या  घर में शराब बनाकर बेचते हैं। यहां तक कि घर की महिलाओं की भी इस कारोबार में भागीदारी होती है। जब कोई अधिकारी या पुलिस टीम छापेमारी के लिए पहुंचती है तो गांव की महिलाएं महिलाएं आगे आकर उनसे भिड़ जाती हैं।

ऐसे मामलों से परेशान आबकारी विभाग की तरफ से करीब डेढ़ दर्जन विकलांगों को चिह्नित किया है जिनका काम शराब बेचना है। ये पहले दिन भर भीख मांगते थे। लेकिन जब से बाद में इस पेशे से जुड़ गए और शाम तक अच्छी-खासी रकम पा लेते हैं।



इसके अलावा घाघरा नदी के तटवर्ती इलाकों और देवारा क्षेत्र के महुला, सहबदिया, गांगेपुर, इस्माइलपुर, काघभार, बैजाबारी, बेलकुंडा, बघावर, हाजीपुर, खोजौली, ओड़रा सलेमपुर, बनकटा आदि गांवों में देशी शराब बनाकर बेची जाती है।
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