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Azamgarh News: मुबाकरपुर की राॅ मैंगो साड़ी बनी महिलाओं की पहली पसंद
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16 बुनकर मोहम्मद शाकिब। संवाद
रेशमी नगरी के हैंडलूम पर बुनी जा रही बनारसी साड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी
अमिलो। रेशमी नगरी मुबारकपुर की रा मैंगो साड़ी आज महिलाओं की पहली पसंद बन रही है। पिछले ढाई दशकों से मंदी की मार झेल रहे बुनकरों के लिए यह साड़ी काफी फायदेमंद साबित हो रही है। इस साड़ी के लुक और डिजाइन को सबसे ज्यादा महिलाएं पसंद करती हैं। हैंडलूम पर तैयार इस साड़ी का रंग सफेद होता है। तैयार साड़ी रा मैंगो पहले रोला फिर डाई करने बाद बाजार में बिक्री करने के लिए शहरों के शोरूम की शोभा बढ़ाती है।
बनारसी साड़ी की चमकीली डिजाइन और हुनर की बदौलत मुबारकपुर भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में अपनी पहचान रखता है। पिछले ढाई दशकों से मुबारकपुर रेशमी साड़ी का धंधा लगातार मंदी की मार झेल रहा है। मंदी की मार से उबरने के लिए बाजार में नया कलर डिजाइन तैयार करना मुबारकपुर के बुनकरों की मजबूरी है। मुबारकपुर में नया आकर्षक लुक रा मैंगो नाम की साड़ी खूब पसंद की जा रही है। रा मैंगो साड़ी देखने में सफेद है। इसे कढ़ुआ साड़ी के नाम से भी जाना जाता है। यह हथकरघा पर तैयार होती है। इसकी बुनाई, कढ़ाई हाथ से करने में चार से पांच दिन का समय लगता है। सिल्क बाइ सिल्क बनारसी साड़ी मुबारकपुर में बुनकर तैयार करते हैं। यह साड़ी सात हजार से लेकर आठ हजार रुपये तक की कीमत पर बाजार में उपलब्ध है।
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पहले इसे हथकरघा पर तैयार किया जाता है। सफेद दिखने वाली साड़ी रा मैंगो को तीन दिन में बुनकर तैयार होने के बाद एक दिन रोला, फिर एक दिन डाई करने में लगता है। इस तरह कुल पांच दिन का समय लगता है। इसके बाद ग्राहकों को बेचने के लिए उनकी मांग पर बनारस सहित अन्य शहरों को भेजी जाती है। शरीफ अहमद, बुनकर मुबारकपुर।
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नया डिजाइन बदल-बदल कर साड़ी बुनी जाती है, ताकि वह इसे मंदी से उबर सकें। इसकी मजदूरी ढाई हजार से लेकर साढ़े तीन हजार रुपये तक आती है। ग्राहकों की मांग पर बनारस साड़ी का मेल डिजाइन तैयार किया जाता है। वर्तमान में रा मैंगो साड़ी महिलाओं को पसंद बनी हुई है। मोहम्मद शाकिब, बुनकर।
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संवाद न्यूज एजेंसी
अमिलो। रेशमी नगरी मुबारकपुर की रा मैंगो साड़ी आज महिलाओं की पहली पसंद बन रही है। पिछले ढाई दशकों से मंदी की मार झेल रहे बुनकरों के लिए यह साड़ी काफी फायदेमंद साबित हो रही है। इस साड़ी के लुक और डिजाइन को सबसे ज्यादा महिलाएं पसंद करती हैं। हैंडलूम पर तैयार इस साड़ी का रंग सफेद होता है। तैयार साड़ी रा मैंगो पहले रोला फिर डाई करने बाद बाजार में बिक्री करने के लिए शहरों के शोरूम की शोभा बढ़ाती है।
बनारसी साड़ी की चमकीली डिजाइन और हुनर की बदौलत मुबारकपुर भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में अपनी पहचान रखता है। पिछले ढाई दशकों से मुबारकपुर रेशमी साड़ी का धंधा लगातार मंदी की मार झेल रहा है। मंदी की मार से उबरने के लिए बाजार में नया कलर डिजाइन तैयार करना मुबारकपुर के बुनकरों की मजबूरी है। मुबारकपुर में नया आकर्षक लुक रा मैंगो नाम की साड़ी खूब पसंद की जा रही है। रा मैंगो साड़ी देखने में सफेद है। इसे कढ़ुआ साड़ी के नाम से भी जाना जाता है। यह हथकरघा पर तैयार होती है। इसकी बुनाई, कढ़ाई हाथ से करने में चार से पांच दिन का समय लगता है। सिल्क बाइ सिल्क बनारसी साड़ी मुबारकपुर में बुनकर तैयार करते हैं। यह साड़ी सात हजार से लेकर आठ हजार रुपये तक की कीमत पर बाजार में उपलब्ध है।
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पहले इसे हथकरघा पर तैयार किया जाता है। सफेद दिखने वाली साड़ी रा मैंगो को तीन दिन में बुनकर तैयार होने के बाद एक दिन रोला, फिर एक दिन डाई करने में लगता है। इस तरह कुल पांच दिन का समय लगता है। इसके बाद ग्राहकों को बेचने के लिए उनकी मांग पर बनारस सहित अन्य शहरों को भेजी जाती है। शरीफ अहमद, बुनकर मुबारकपुर।
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नया डिजाइन बदल-बदल कर साड़ी बुनी जाती है, ताकि वह इसे मंदी से उबर सकें। इसकी मजदूरी ढाई हजार से लेकर साढ़े तीन हजार रुपये तक आती है। ग्राहकों की मांग पर बनारस साड़ी का मेल डिजाइन तैयार किया जाता है। वर्तमान में रा मैंगो साड़ी महिलाओं को पसंद बनी हुई है। मोहम्मद शाकिब, बुनकर।

16 बुनकर मोहम्मद शाकिब। संवाद