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दूसरी जमीन देने पर सरकारी जमीन का कब्जा वैध!

Sat, 09 Dec 2017 11:45 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,आजमगढ़
ब्यूरो,अमर उजाला,आजमगढ़ Updated Sat, 09 Dec 2017 11:45 PM IST
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The possession of government land on the second land is valid!
demo pic - फोटो : अमर उजाला
संदीप सौरभ सिंह
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आजमगढ़। सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करके बनाए गए स्कूल को प्रबंधकों से अन्य स्थान पर जमीन लेकर नियमित करने के मंडलायुक्त के आदेश पर सवालिया निशान लग गए हैं। कानून के जानकार बताते हैं कि विशेष स्थितियों में भी शासन ही इस तरह का निर्णय ले सकता है।

स्थानीय स्तर पर अधिकारी ऐसा फैसला नहीं कर सकते। मामला नैठी गांव में नवीन परती की जमीन कब्जा कर स्कूल बनाने का है। जिलाधिकारी कोर्ट ने स्कूल को गिराने और दोषियों पर एफआईआर कराने के आदेश दिए थे, वहीं इस आदेश का रिवीजन अपने कोर्ट में दाखिल होने के बाद स्कूल की ओर से पेश एक शिकायत पर कमिश्नर ने कोर्ट के बाहर स्कूल के बगल में उतनी ही जमीन देने पर नियमितीकरण के आदेश दे दिए।
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कमिश्नर इसके पीछे सरकार के आदेश का हवाला दे रहे हैं, लेकिन इससे सरकार के ही सरकारी जमीनों से अवैध कब्जा हटाने की मुहिम पर सवाल खड़े हो गए हैं। शासन के निर्देश पर जनपद में भूमाफियाओं के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत अभिलेखों की जांच में सदर तहसील के नैठी गांव स्थित .096 हेक्टेअर भूमि नवीन परती की भूमि पर अभिलेखों में हेराफेरी कर फर्जी इंद्राज के सहारे किसान जूनियर हाईस्कूल के नाम कराने का मामला प्रकाश में आया था।
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बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी श्रीप्रकाश राय ने अपनी जांच आख्या जिलाधिकारी न्यायालय में पेश की। 13 नवंबर को जिलाधिकारी ने उक्त भूमि से विद्यालय का नाम निरस्त कर ग्रामसभा के नवीन परती खाते में दर्ज कराते हुए दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों और लाभार्थियों के विरुद्घ एफआईआर दर्ज कराने का आदेश दिए। जमीन को वास्तविक रूप में लाने के लिए स्कूल को गिराया भी जाना था।

आदेश के खिलाफ विद्यालय के संस्थापक और प्रधानाचार्य रामनयन यादव ने 20 नवंबर को मंडलायुक्त न्यायालय में रिवीजन दाखिल की। साथ ही मंडलायुक्त को एक प्रार्थना पत्र दिया।

प्रार्थना पत्र में बताया गया कि जिलाधिकारी के आदेश के खिलाफ कमिश्नर के कोर्ट में रिवीजन दाखिल है। विद्यालय 1965 से संचालित है। इसलिए सरकारी जमीन के बदले वो उतनी जमीन देने को तैयार हैं।

निस्तारण तक ध्वस्तीकरण के आदेश रोक दिए जाएं। कमिश्नर ने कोर्ट के बाहर ही स्कूल के बगल में उतनी जमीन देने पर इसके नियमितीकरण के आदेश दे दिए। भूमि न देने पर विद्यालय को गिराने को कहा। कोर्ट के बाहर हुए इस आदेश पर एसडीएम सदर की ओर से विद्यालय को गिराने की कार्रवाई रोक दी गई और शिकायत क ा निस्तारण कर दिया गया।

सरकारी जमीनों पर 10 वर्ष या उससे पहले हुए निर्माण के जनहित से जुड़े मामलों में उतनी ही कीमत की जमीन देने पर नियमितीकरण के आदेश सरकार की तरफ से हैं। इस बारे में मंडल के सभी जिलाधिकारियों को भी मेरे द्वारा निर्देशित किया गया है। जमीन न देने पर ही कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। -के. रविंद्र नायक, मंडलायुक्त

शासन के निर्देश पर जनपद में भूमाफियाओं के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। नैठी में भी ऐसा मामला था। इसमें कोर्ट में जमीन की अमल दरामद निरस्त कर वास्तविक स्वरूप में दर्ज करने और दोषियों पर एफआईआर के निर्देश दिए गए हैं। -चंद्रभूषण सिंह, जिलाधिकारी

जिला स्तर पर कब्जा की गई जमीन को बदलने का कोई नियम नहीं है। उक्त मामले में मंडलायुक्त के निर्देश की प्रति मेरे पास भी आई थी। इस पर मैंने लिखा है कि ये शासन स्तर से ही संभव है। -श्री प्रकाश राय, बंदोबस्त अधिकारी (चकबंदी)

सरकारी जमीनों से अवैध कब्जा हटवाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट से सख्त आदेश जारी हैं। कब्जा की गई जमीन के बदले जमीन देने का कोई कानून मेरे संज्ञान में नहीं है। -हरिकिशन राय, अधिवक्ता सिविल कोर्ट


राजस्व परिषद की ओर से छह माह पहले जनहित में विद्यालय और अस्पताल जैसे मामले में जमीन के बदले जमीन लेने के आदेश दिए गए थे, लेकिन बदलाव शासन स्तर से ही होना था। बंजर, नवीन परती, चारागाह आदि की जमीन को लेकर राजस्व परिषद का आदेश बहुत क्लीयर नहीं है। -सत्यानंद राय, शासकीय अधिवक्ता कमिश्नरी
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