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सरकारी रेट पर भारी पड़ गया मार्केट रेट
अमर उजाला ब्यूरो/आजमगढ
Updated Mon, 27 Jun 2016 11:58 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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सरकार की ओर से गेहूं खरीद के लिए निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष मात्र सात प्रतिशत की ही खरीदारी हो सकी है। सरकार द्वारा निर्धारित रेट से अधिक मार्केट मूल्य अधिक होने के कारण किसानों ने क्रय केंद्रों पर गेहूं की बिक्री नहीं की।
बताते चलें कि सरकार द्वारा एक अप्रैल से 15 जून तक गेहूं खरीद का समय निर्धारित किया गया था। गेहूं का मूल्य सरकार ने 1525 रुपये तय किया। कृषि विभाग ने भी अच्छी फसल होने का आंकड़ा प्रस्तुत किया। कृषि विभाग के आंकड़े को देखते हुए शासन ने जनपद में 55 हजार मीट्र्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया। गेहूं खरीद के लिए जनपद में 38 क्रय केंद्र बनाए गए थे। शुरू में तो सबकुछ ठीक ठाक रहा। शुरुआती महीने में विभाग ने खरीद के निर्धारित लक्ष्य को हासिल कर लिया लेकिन दूसरे महीने में लक्ष्य हासिल करने में काफी परेशानियां सामने आने लगी। तब विभाग मोबाइल टीम का गठन किया जो किसानों से उनके घर जाकर गेहूं की खरीद करने लगी।
इसके साथ पल्लेदारी को भी बंद कर दिया गया लेकिन इसके बाद भी 15 मई के बाद किसान सरकारी रेट पर गेहूं बेचने को तैयार नहीं थे। इसका कारण था मार्केट रेट का अधिक होना। सरकारी रेट जहां 1525 रुपये निर्धारित था। दूसरी ओर मार्केट रेट 15 मई के बाद 1600 रुपये प्रति कुंतल पहुंच गया। जिसका परिणाम था कि विभाग निर्धारित लक्ष्य 55 हजार मीट्रिक टन के मुकाबले मात्र 3850 मीट्रिक टन गेहूं की ही खरीद कर सका।
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पूरे प्रदेश में लक्ष्य के सापेक्ष गेहूं की खरीद काफी कम हुई है। क्योंकि कृषि विभाग ने सरकार को जो आंकड़ा प्रस्तुत किया था। उससे 20 से 25 प्रतिशत पैदावार कम हुई। हमने सारी व्यवस्था की ताकि लक्ष्य के करीब पहुंच सकें लेकिन 15 मई के बाद मार्केट रेट सरकारी रेट से ज्यादा हो गया। इसके कारण हम लक्ष्य के सापेक्ष मात्र सात प्रतिशत की ही खरीदारी कर सके। - सुनील भारती, डिप्टी आरएमओ
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बताते चलें कि सरकार द्वारा एक अप्रैल से 15 जून तक गेहूं खरीद का समय निर्धारित किया गया था। गेहूं का मूल्य सरकार ने 1525 रुपये तय किया। कृषि विभाग ने भी अच्छी फसल होने का आंकड़ा प्रस्तुत किया। कृषि विभाग के आंकड़े को देखते हुए शासन ने जनपद में 55 हजार मीट्र्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया। गेहूं खरीद के लिए जनपद में 38 क्रय केंद्र बनाए गए थे। शुरू में तो सबकुछ ठीक ठाक रहा। शुरुआती महीने में विभाग ने खरीद के निर्धारित लक्ष्य को हासिल कर लिया लेकिन दूसरे महीने में लक्ष्य हासिल करने में काफी परेशानियां सामने आने लगी। तब विभाग मोबाइल टीम का गठन किया जो किसानों से उनके घर जाकर गेहूं की खरीद करने लगी।
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इसके साथ पल्लेदारी को भी बंद कर दिया गया लेकिन इसके बाद भी 15 मई के बाद किसान सरकारी रेट पर गेहूं बेचने को तैयार नहीं थे। इसका कारण था मार्केट रेट का अधिक होना। सरकारी रेट जहां 1525 रुपये निर्धारित था। दूसरी ओर मार्केट रेट 15 मई के बाद 1600 रुपये प्रति कुंतल पहुंच गया। जिसका परिणाम था कि विभाग निर्धारित लक्ष्य 55 हजार मीट्रिक टन के मुकाबले मात्र 3850 मीट्रिक टन गेहूं की ही खरीद कर सका।
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पूरे प्रदेश में लक्ष्य के सापेक्ष गेहूं की खरीद काफी कम हुई है। क्योंकि कृषि विभाग ने सरकार को जो आंकड़ा प्रस्तुत किया था। उससे 20 से 25 प्रतिशत पैदावार कम हुई। हमने सारी व्यवस्था की ताकि लक्ष्य के करीब पहुंच सकें लेकिन 15 मई के बाद मार्केट रेट सरकारी रेट से ज्यादा हो गया। इसके कारण हम लक्ष्य के सापेक्ष मात्र सात प्रतिशत की ही खरीदारी कर सके। - सुनील भारती, डिप्टी आरएमओ