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अभी तक नहीं खुला स्टेडियम का ताला, खिलाड़ी परेशान
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आजमगढ़। जनपद में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। लेकिन विगत दो सालों से स्टेडियम बंद चल रहा है। जिसके कारण जनपद के होनहार खिलाड़ियों के समक्ष कई समस्याएं खड़ी हो गई हैं। जूनियर और सब जूनियर टीम में शामिल होने के लिए तैयारी में जुटे कई खिलाड़ी अब ओवर एज हो गए हैं। ऐसे में अब वह जूनियर व सब जूनियर टीम के लिए ट्रायल नहीं दे सकेंगे। खिलाड़ियों का कहना है कि सरकार कोरोना के कारण ओवरएज हो चुके खिलाड़ियों को उम्र में छूट प्रदान करे।
नगर के सुखदेव पहलवान स्पोर्ट्स स्टेडियम जनपद का इकलौता स्टेडियम है। इस स्टेडियम ने कई होनहार खिलाड़ियों को पैदा किया है। जिन्होंने देश के साथ ही अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। लेकिन दुखद तो यह है कि कोरोना ने यहां प्रतियोगी खेलों की तैयारी में जुटे खिलाड़ियों को गहरी चोट दी है। विगत दो सालों से स्टेडियम में न तो किसी प्रशिक्षक की तैनाती हुई है और ना ही खिलाड़ियों का कोई ट्रायल हुआ है। मार्च महीने से स्टेडियम में बंद ताला अभी तक नहीं खुला है। खिलाड़ी चाहकर भी यहां प्रैक्टिस नहीं कर पा रहे हैं। कई खिलाड़ी तो ऐसे हैं जो जूनियर और सब जूनियर टीम में शामिल होने के लिए तैयारी में जुटे थे। लेकिन कोरोना के कारण विगत दो सालों से ट्रायल नहीं हुए जिसके कारण कई खिलाड़ी ओवरएज हो गए हैँ। अब वह जूनियर और सब जूनियर टीम में शामिल नहीं हो सकते हैं। अब ऐसे खिलाड़ियों की चाहत है कि सरकार उन्हें कोरोना काल को देखते हुए उम्र में कुछ छूट प्रदान करे ताकि वह अपने सपने को पूरा कर सकें। खिलाड़ी अजीत विश्वकर्मा ने कहा कि बैंडमिंटन में सब जूनियर की तैयारी कर रहा था। लेकिन कोरोना के कारण दो साल बर्बाद हो गए। अब मैं ओवरएज भी हो गया हूं। ऐसे में समझ नहीं आ रहा कि क्या करूं। सरकार से आस है कि वह कोरोना को देखते हुए हम लोगों को उम्र में कुछ छूट प्रदान करें।
कुल 22 खेलों के ट्रायल होते हैं। कोरोना के कारण एक भी ट्रायल का आयोजन नहीं हो सका। अभी तक स्टेडियम को खोलने का भी निर्णय नहीं लिया गया है। रही बात प्रशिक्षकों की तो इनकी तैनाती इस वर्ष की जानी है या नहीं इसका फैसला निदेशालय को लेना है।
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आरपी सिंह, प्रभारी क्षेत्रीय क्रीड़ाधिकारी।
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नगर के सुखदेव पहलवान स्पोर्ट्स स्टेडियम जनपद का इकलौता स्टेडियम है। इस स्टेडियम ने कई होनहार खिलाड़ियों को पैदा किया है। जिन्होंने देश के साथ ही अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। लेकिन दुखद तो यह है कि कोरोना ने यहां प्रतियोगी खेलों की तैयारी में जुटे खिलाड़ियों को गहरी चोट दी है। विगत दो सालों से स्टेडियम में न तो किसी प्रशिक्षक की तैनाती हुई है और ना ही खिलाड़ियों का कोई ट्रायल हुआ है। मार्च महीने से स्टेडियम में बंद ताला अभी तक नहीं खुला है। खिलाड़ी चाहकर भी यहां प्रैक्टिस नहीं कर पा रहे हैं। कई खिलाड़ी तो ऐसे हैं जो जूनियर और सब जूनियर टीम में शामिल होने के लिए तैयारी में जुटे थे। लेकिन कोरोना के कारण विगत दो सालों से ट्रायल नहीं हुए जिसके कारण कई खिलाड़ी ओवरएज हो गए हैँ। अब वह जूनियर और सब जूनियर टीम में शामिल नहीं हो सकते हैं। अब ऐसे खिलाड़ियों की चाहत है कि सरकार उन्हें कोरोना काल को देखते हुए उम्र में कुछ छूट प्रदान करे ताकि वह अपने सपने को पूरा कर सकें। खिलाड़ी अजीत विश्वकर्मा ने कहा कि बैंडमिंटन में सब जूनियर की तैयारी कर रहा था। लेकिन कोरोना के कारण दो साल बर्बाद हो गए। अब मैं ओवरएज भी हो गया हूं। ऐसे में समझ नहीं आ रहा कि क्या करूं। सरकार से आस है कि वह कोरोना को देखते हुए हम लोगों को उम्र में कुछ छूट प्रदान करें।
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कुल 22 खेलों के ट्रायल होते हैं। कोरोना के कारण एक भी ट्रायल का आयोजन नहीं हो सका। अभी तक स्टेडियम को खोलने का भी निर्णय नहीं लिया गया है। रही बात प्रशिक्षकों की तो इनकी तैनाती इस वर्ष की जानी है या नहीं इसका फैसला निदेशालय को लेना है।
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आरपी सिंह, प्रभारी क्षेत्रीय क्रीड़ाधिकारी।