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Azamgarh News: फरवरी में ही होने लगा अप्रैल की गर्मी का अहसास, गेहूं की फसल पर संकट

Tue, 04 Feb 2025 11:46 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 04 Feb 2025 11:46 PM IST
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The heat of April started being felt in February itself, wheat crop in danger
आजमगढ़। शीतलहर का दौर खत्म होते ही सूरज के तेवर तल्ख होते जा रहे हैं। इससे गेहूं की फसल पर खतरा मंडरा रहा है। गेहूं और जौ की फसल के लिए अधिकतम 23 डिग्री सेल्सियस तापमान की आवश्यकता होती है। पिछले तीन दिन से तापमान अधिकतम 25 से 26 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है।
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मौसम में तेजी से हुए बदलाव से किसानों को गेहूं की पैदावार कम होने की चिंता सताने लगी है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि 120 से 135 दिन में पकने वाली गेहूं की प्रजातियों में 20 से 30 फीसदी तक पैदावार घट सकती है। जिले में रबी सीजन में 2.70 लाख हेक्टेयर में फसलों की बोआई की गई है। इनमें से 1.36 लाख हेक्टेयर गेहूं की फसल बोई गई है। जिस प्रकार से फरवरी के पहले हफ्ते में मौसम ने अपने तेवर को दिखाए हैं, इसने किसानों की चिंता की बढ़ा दी है।
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विगत पांच सालों के चार फरवरी के तापमान पर नजर डालें पांच सालों में इस वर्ष चार फरवरी सबसे अधिक गर्म रही है। किसान हरेंद्र सिंह का कहना है कि अगर इसी तरह से तापमान बढ़ता रहा तो जल्द ही लू चलने लगी और गेहूं जल्दी ही सूख जाएगा, इससे दाने हल्के हो जाएंगे। किसान हरिश्चंद्र ने कहा कि गेहूं की फसल पर बढ़ते तापमान का असर पड़ेगा। कितना पानी कोई चलाएगा। अगर खेत की नमी गायब हुई तो गेहूं जल्दी सूख जाएगा।
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इस प्रकार करें फसल का बचाव :
जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि गेहूं और जौ की फसलों को बढ़ते तापमान के प्रभाव से बचाने के लिए दाना भराव और दाना निर्माण की अवस्था पर सैलिसिलिक अम्ल 7.5 ग्राम प्रति 100 लीटर का फॉलियर स्प्रे करना चाहिए। सैलिसिलिक अम्ल का पहला छिड़काव झंदा पत्ती अवस्था और दूसरा छिड़काव दूधिया अवस्था पर करने से लाभ मिलता है।

इससे गेहूं को प्रतिकूल परिस्थितियों में लड़ने की शक्ति मिलती है और निर्धारित समय पर पकने में मदद करता है। इससे उत्पादन में गिरावट नहीं होती है। गेहूं व जौ की फसल में जरूरत के अनुसार बार-बार हल्की सिचाई करें। इसके अलावा 0.1 प्रतिशत पोटेशियम नाइट्रेट का 15 दिन के अंतराल पर दो बार छिड़काव भी कर सकते हैं।
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