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पहले मौसम ने, अब दुर्व्यवस्था ने तोड़ी कमर
ब्यूरो/अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Fri, 11 Dec 2015 12:01 AM IST
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सूखे की मार झेल रहे किसान अब अनाज बेचने को लेकर हलकान हैं। जिम्मेदारों की उपेक्षा के चलते गुरुवार को अधिकतर धान केंद्रों पर ताले लटकते हुए मिले। इससे परेशान किसा औने पौने दाम पर बिचौलियों को धान बेचने को मजबूर हैं।
बूढ़नपुर क्षेत्र के अतरैठ, सरैया, बूढऩपुर धान क्रय केंद्रों पर गुरुवार को ताला लटका हुआ था। केंद्र पर तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों का कहीं पता नहीं था।
धान बेचने के लिए हलकान किसान क्रय पर लटके ताले केा देख वापस लौट जा रहे हैं। किसानों का पूरा कार्य फसल को बेंचकर ही होता है। जब धान की फसल को किसान बेचेगा तो वह गेहूं की बुआई के लिए खाद और बीज का इंतजाम करेगा। ऐसे में क्रय केंद्रों पर लटके तालों ने किसानों की मुसीबतें बढ़ा दी है। वह अपनी मेहनत की उपज को औने पौने दाम पर बिचौलियों को बेचने को बेचने को मजबूर है।
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सरकार द्वारा धान का निर्धारित मूल्य 1410 रुपये प्रति कुंतल निर्धारित किया गया है। जबकि बिचौलिया द्वारा इसे किसानों से आठ सौ रुपये प्रति कुंतल की दर से खरीद रहे हैं। गिरिजेश वर्मा ने कहा कि सरकारी मूल्य पर अगर धान बिकता तो अच्छी आमदनी हो जाती लेकिन अभी तक कहीं पर कोई लेबी नहीं चल रही है।
शेरवा निवासी शोभा वर्मा ने बताया कि अधिकारी कर्मचारी इतने लापरवाह हैं कि जैसे किसानों की समस्या से उनको कोई मतलब नहीं है। मनोज ने कहा कि किसान किसी तरह से इस सूखे में धान पैदा किया किन्तु उसकी उम्मीद और मेहनत पर पानी फिर रहा है। अगर लेबी नहीं चली तो हम सभी किसान रोड पर उतरने के लिए बाध्य होंगे।
पंचायत चुनाव में व्यस्तता के नाते खरीद केंद्रों पर वह लोग ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। 13 दिसंबर को मतगणना के बाद धान क्रय केंद्रों का निरीक्षण किया जाएगा। अगर कहीं क्रय केंद्र बंद मिले तो केंद्र प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- राम गोपाल सिंह, एसडीएम बूढ़नपुर
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बूढ़नपुर क्षेत्र के अतरैठ, सरैया, बूढऩपुर धान क्रय केंद्रों पर गुरुवार को ताला लटका हुआ था। केंद्र पर तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों का कहीं पता नहीं था।
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धान बेचने के लिए हलकान किसान क्रय पर लटके ताले केा देख वापस लौट जा रहे हैं। किसानों का पूरा कार्य फसल को बेंचकर ही होता है। जब धान की फसल को किसान बेचेगा तो वह गेहूं की बुआई के लिए खाद और बीज का इंतजाम करेगा। ऐसे में क्रय केंद्रों पर लटके तालों ने किसानों की मुसीबतें बढ़ा दी है। वह अपनी मेहनत की उपज को औने पौने दाम पर बिचौलियों को बेचने को बेचने को मजबूर है।
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सरकार द्वारा धान का निर्धारित मूल्य 1410 रुपये प्रति कुंतल निर्धारित किया गया है। जबकि बिचौलिया द्वारा इसे किसानों से आठ सौ रुपये प्रति कुंतल की दर से खरीद रहे हैं। गिरिजेश वर्मा ने कहा कि सरकारी मूल्य पर अगर धान बिकता तो अच्छी आमदनी हो जाती लेकिन अभी तक कहीं पर कोई लेबी नहीं चल रही है।
शेरवा निवासी शोभा वर्मा ने बताया कि अधिकारी कर्मचारी इतने लापरवाह हैं कि जैसे किसानों की समस्या से उनको कोई मतलब नहीं है। मनोज ने कहा कि किसान किसी तरह से इस सूखे में धान पैदा किया किन्तु उसकी उम्मीद और मेहनत पर पानी फिर रहा है। अगर लेबी नहीं चली तो हम सभी किसान रोड पर उतरने के लिए बाध्य होंगे।
पंचायत चुनाव में व्यस्तता के नाते खरीद केंद्रों पर वह लोग ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। 13 दिसंबर को मतगणना के बाद धान क्रय केंद्रों का निरीक्षण किया जाएगा। अगर कहीं क्रय केंद्र बंद मिले तो केंद्र प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- राम गोपाल सिंह, एसडीएम बूढ़नपुर