आजमगढ़। साहित्य, संस्कृति, शिक्षा और समसामयिक विमर्शों को समर्पित ‘अलेख’ नामक नयी साहित्यिक पत्रिका के प्रथम अंक का लोकार्पण रविवार को स्कूल में हुआ। समारोह में वक्ताओं ने पत्रिका को विचार, संस्कृति और शिक्षा के प्रति समर्पित बताया। शुभारंभ दीप प्रज्वलन और रोशनी गोंड द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ। अतिथियों का पारंपरिक स्वागत व सम्मान किया गया। समारोह में साहित्यिक जगत से जुड़े कई विद्वान, शिक्षक, लेखक और विचारक मौजूद रहे। स्वागत गीत के बाद अंशू अस्थाना ने सभी आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए भावपूर्ण स्वागत भाषण दिया। गीत के माध्यम से पत्रिका के प्रति शुभकामनाएं व्यक्त कीं और रचनात्मक ऊर्जा से ओत-प्रोत विचार रखे। पत्रिका की परिकल्पना, उद्देश्य और विकास यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कंचन मौर्या ने बताया कि ''''अलेख'''' केवल एक पत्रिका नहीं, बल्कि एक वैचारिक आंदोलन है, जो समाज को साहित्य और शिक्षा के माध्यम से जोड़ने का प्रयास कर रही है। पत्रिका की राष्ट्रीय स्तर पर संभावनाओं और चुनौतियों पर अरुण मौर्या ने विचार रखते हुए कहा कि ''अलेख'' का स्वर एक दिन देशभर में साहित्यिक आवाज बन सकता है, यदि इसके मूल्यों और दृष्टिकोण को सहेजा जाए। डॉ. मनीषा मिश्रा ने पत्रिका की शैक्षिक उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह प्रयास विद्यार्थियों, प्रतियोगी परीक्षार्थियों से लेकर समाज के हर वर्ग के लिए उपयोगी सिद्ध हो सकता है। मुख्य अतिथि अमरनाथ राय ने इसे युवा लेखकों और विचारकों के लिए एक प्रेरणादायक मंच बताया और कहा कि इस तरह के प्रयास साहित्यिक संस्कृति को जीवंत बनाए रखने में सहायक होते हैं। अंत में अजय विक्रम ने सभी अतिथियों, वक्ताओं और आयोजन से जुड़े सभी सहयोगियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।