डॉक्टर पर दर्ज केस निरस्त कर
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प्रेसवार्ता के दौरान आइएमए के अध्यक्ष डा. निर्मल श्रीवास्तव ने कहा कि प्रसव पीड़ा से पीडि़त महिला सबीना परवीन को 12 मार्च की शाम को संजीवनी नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया। नर्सिंग होम की चिकित्सक डा. अर्चना मैसी इसके पूर्व महिला के छह बच्चों की नार्मल डिलवरी करा चुकी हैं। जब उन्होंने उक्त मरीज को देखा तो पाया बच्चा पूर्व में ही मर चुका था। मरीज की जान को बचाने के लिए बच्चे के सिर को काटकर निकाला गया।
आपरेशन के बाद बच्चे के सिर और धड़ को सिलकर उसके परिजनों को सौंप दिया गया। यह जो भी आपरेशन किया गया मेडिकल प्रक्रिया के तहत किया गया। ऐसे में चिकित्सक के एफआईआर दर्ज करना गलत है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी इस बात की पुष्टि हो चुकी है कि बच्चे की मौत पूर्व में ही हो चुकी थी। प्रेसवार्ता के बाद आइएमए के सदस्यों ने पुलिस अधीक्षक से उनके आवास पर मुलाकात की और चिकित्सक पर दर्ज मुकदमे को निरस्त करने की मांग की। मौके पर सचिव डा. अशोक कुमार सिंह, डा. ओपी रविकुल, डा. आरके सिंह, डा. खालिद, डा. एजे उस्मानी, डा. हेमबाला यादव, डा. आनंद सिंह, डा. विपिन यादव, डा. नंदलाल यादव, डा. अमित सिंह, डा. हरिराम, डा. अर्चना मैसी मौजूद थीं।