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जिस रूप में करेंगे भक्ति उस रूप में मिलेंगे परमात्मा
ब्यूरो/अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Sun, 03 Jan 2016 11:54 PM IST
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मऩुष्य जैसा कर्म करता है उसी के अनुसार उसे फल की प्राप्ति होती है। जिस रूप में भक्त भगवान की भक्ति करता है परमात्मा उसे उसी रूप में प्राप्त होता है। उक्त बातें पंडित सीताराम नाम शरण जी महाराज ने शनिवार को मुसेपुर स्थित गेस्ट हाउस में आयोजित श्रीराम कथा के दौरान कही।
उन्होंने कहा कि भगवान का व्यापक स्वरूप है और वह कण-कण में विराजमान है। इसी प्रकार राम की महिमा भी सर्वत्र व्याप्त है। विभिन्न धर्मों के लोग विविध प्रकार से अपनी आराधना भले ही करते हैं लेकिन परमात्मा एक है। सबके पूजा करने का विधान अलग-अलग होता है। अपने-अपने कर्मों का परिणाम मनुष्य या संसार का प्राणी स्वयं भोगता है।परमात्मा का अंश मनुष्यों के साथ ही संसार के समस्त प्राणियों में समाविष्ट रहता है।
यदि कोई संसार का प्राणी अनैतिक या नैतिक कार्य करता है वह सब परमात्मा की दृष्टि में रहता है। इस संसार में प्राणी मुठ्ठी बांधकर आता है और हाथ खोलकर इस संसार से चला जाता है। वह न कुछ लेकर आता है और नाही कुछ लेकर जाता है।
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इसलिए मनुष्य को सदैव परमार्थ में अपने जीवन को लगाना चाहिए। जहां तक हो सके लोगों की मदद करनी चाहिए। इस मौके पर राम विलास साहू, तारा देवी, प्यारेलाल मोदनवाल, अमित चौरसिया, छन्नू सिंह, गजाधर पांडेय, डा. आरके पांडेय, अरविंद पांडेय आदि उपस्थित थे।
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उन्होंने कहा कि भगवान का व्यापक स्वरूप है और वह कण-कण में विराजमान है। इसी प्रकार राम की महिमा भी सर्वत्र व्याप्त है। विभिन्न धर्मों के लोग विविध प्रकार से अपनी आराधना भले ही करते हैं लेकिन परमात्मा एक है। सबके पूजा करने का विधान अलग-अलग होता है। अपने-अपने कर्मों का परिणाम मनुष्य या संसार का प्राणी स्वयं भोगता है।परमात्मा का अंश मनुष्यों के साथ ही संसार के समस्त प्राणियों में समाविष्ट रहता है।
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यदि कोई संसार का प्राणी अनैतिक या नैतिक कार्य करता है वह सब परमात्मा की दृष्टि में रहता है। इस संसार में प्राणी मुठ्ठी बांधकर आता है और हाथ खोलकर इस संसार से चला जाता है। वह न कुछ लेकर आता है और नाही कुछ लेकर जाता है।
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इसलिए मनुष्य को सदैव परमार्थ में अपने जीवन को लगाना चाहिए। जहां तक हो सके लोगों की मदद करनी चाहिए। इस मौके पर राम विलास साहू, तारा देवी, प्यारेलाल मोदनवाल, अमित चौरसिया, छन्नू सिंह, गजाधर पांडेय, डा. आरके पांडेय, अरविंद पांडेय आदि उपस्थित थे।