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शहीद की प्रतिमा को किया क्षतिग्रस्त
ब्यूरो, अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Wed, 01 Apr 2015 10:55 PM IST
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बाजार के मवेशीखाना पर लगाई गई शहीद कृष्ण कुमार सिंह की प्रतिमा को बुधवार को मनबढ़ों ने क्षतिग्रस्त कर दिया। इसकी तहरीर देने जब परिवार के लोग थाने पहुंचे तो उनकी तहरीर नहीं ली गई। जब इसकी जानकारी पुलिस अधीक्षक को हुई तो उन्होंने फोन कर थानाध्यक्ष को तहरीर लेकर मामला दर्ज करने का आदेश दिया।
बोडो उग्रवादियों के हमले में शहीद हुए सेना के जवान कृष्ण कुमार सिंह की प्रतिमा जहानागंज बाजार में मवेशीखाना पर लगाई गई है। बुधवार की भोर में लगभग 4.30 बजे काला कपड़ा पहने एक व्यक्ति वहां पर पहुंचा और प्रतिमा को तोड़ने लगा। आवाज सुनकर शहीद जवान के भाई विजय सिंह और रामसिंगार की आंख खुल गई। मूर्ति को एक व्यक्ति द्वारा तोड़ा जाता देख उन्होंने शोर मचाना शुरू कर दिया। शोर सुनकर वह युवक वहां से भाग गया।
मौके पर पहुंचे लोगों ने उसकी तलाश शुरू की लेकिन वह नहीं मिला। उजाला होने पर परिवार के लोग तहरीर लेकर थाने पहुंचे लेकिन थानाध्यक्ष रामनरेश यादव ने तहरीर लेने से इनकार कर दिया। तब विजय सिंह ने इसकी सूचना पुलिस अधीक्षक आकाश कुलहरि को दी। एसपी के निर्देश पर थानाध्यक्ष ने तहरीर ली। बताते चलें कि कृष्ण कुमार सिंह 1987 में सेना में भर्ती हुए थे। 16 अगस्त 1993 को नागालैंड में बोडो उग्रवादियों से मुठभेड़ के दौरान शहीद हो गए थे। इसके बाद 16 अगस्त 2001 को उनकी प्रतिमा स्थापित की गई।
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बोडो उग्रवादियों के हमले में शहीद हुए सेना के जवान कृष्ण कुमार सिंह की प्रतिमा जहानागंज बाजार में मवेशीखाना पर लगाई गई है। बुधवार की भोर में लगभग 4.30 बजे काला कपड़ा पहने एक व्यक्ति वहां पर पहुंचा और प्रतिमा को तोड़ने लगा। आवाज सुनकर शहीद जवान के भाई विजय सिंह और रामसिंगार की आंख खुल गई। मूर्ति को एक व्यक्ति द्वारा तोड़ा जाता देख उन्होंने शोर मचाना शुरू कर दिया। शोर सुनकर वह युवक वहां से भाग गया।
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मौके पर पहुंचे लोगों ने उसकी तलाश शुरू की लेकिन वह नहीं मिला। उजाला होने पर परिवार के लोग तहरीर लेकर थाने पहुंचे लेकिन थानाध्यक्ष रामनरेश यादव ने तहरीर लेने से इनकार कर दिया। तब विजय सिंह ने इसकी सूचना पुलिस अधीक्षक आकाश कुलहरि को दी। एसपी के निर्देश पर थानाध्यक्ष ने तहरीर ली। बताते चलें कि कृष्ण कुमार सिंह 1987 में सेना में भर्ती हुए थे। 16 अगस्त 1993 को नागालैंड में बोडो उग्रवादियों से मुठभेड़ के दौरान शहीद हो गए थे। इसके बाद 16 अगस्त 2001 को उनकी प्रतिमा स्थापित की गई।
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