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Azamgarh News: जांच में दोषी पाए गए सठियांव के ब्लाॅक मिशन मैनेजर, सेवा समाप्त
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आजमगढ़। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) में सठियांव ब्लाॅक में लाखों का गबन करने वाले ब्लाक मिशन मैनेजर (बीएमएम) की सेवा समाप्त कर दी गई है। उक्त मामले में ग्राम पंचायत अवांव, केरमा और लोहरा की महिलाओं ने शिकायत की थी। जांच में ब्लॉक मिशन मैनेजर (बीएमएम) संदीप गुप्ता प्रथम दृष्टया दोषी मिले।
इसे लेकर राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ग्राम्य विकास उप्र. के संयुक्त मिशन निदेशक जनमेजय शुक्ला ने तत्काल प्रभाव से सेवा समाप्त कर दी। उक्त मामले में आयुक्त आजमगढ़ मंडल के निर्देश पर खंड विकास अधिकारी सठियांव और अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में जांच की गई थी। जांच में बीएमएम द्वारा महिला स्वयं सहायता समूहों से अवैध वसूली, मानदेय वितरण में गड़बड़ी और अभद्र व्यवहार जैसी गंभीर बातें सामने आईं थीं।
जांच में पाया गया था कि शिकायतकर्ता मोनू सिंह से बीमा के नाम पर 8,000 लिए गए, जबकि बीएमएम इस पर कोई उत्तर नहीं दे सके। इसी तरह प्रीति तिवारी ने पदाधिकारियों के मनमाने बदलाव और बैंक सखी सुगंता देवी को लाभ पहुंचाने की शिकायत की, जो सही पाई गई। प्रमिला देवी ने आरोप लगाया कि उनके समूह से 50,000 निकाले गए, जिसमें से 45,000 बीएमएम ने खुद रख लिए।
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प्रियंका कुमारी ने वीडियो साक्ष्य प्रस्तुत किया जिसमें मानदेय से 9,000 बीएमएम को दिए जाने की पुष्टि हुई। सहायक विकास अधिकारी ने भी माना कि बार-बार समूहों की महिलाएं इनके खिलाफ शिकायत करती रही हैं। सुगंता देवी को बार-बार मानदेय दिलाना और अन्य बैंक सखियों का भुगतान रोकना भी गड़बड़ी का हिस्सा माना गया। जांच अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि संदीप गुप्ता द्वारा प्रस्तुत आख्या मनगढ़ंत है और तथ्यात्मक साक्ष्य पेश नहीं किए गए। इस आधार पर बीएमएम संदीप गुप्ता प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए हैं और प्रकरण आवश्यक कार्रवाई के लिए उच्च अधिकारियों को प्रेषित कर दिया गया है।
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इसे लेकर राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ग्राम्य विकास उप्र. के संयुक्त मिशन निदेशक जनमेजय शुक्ला ने तत्काल प्रभाव से सेवा समाप्त कर दी। उक्त मामले में आयुक्त आजमगढ़ मंडल के निर्देश पर खंड विकास अधिकारी सठियांव और अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में जांच की गई थी। जांच में बीएमएम द्वारा महिला स्वयं सहायता समूहों से अवैध वसूली, मानदेय वितरण में गड़बड़ी और अभद्र व्यवहार जैसी गंभीर बातें सामने आईं थीं।
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जांच में पाया गया था कि शिकायतकर्ता मोनू सिंह से बीमा के नाम पर 8,000 लिए गए, जबकि बीएमएम इस पर कोई उत्तर नहीं दे सके। इसी तरह प्रीति तिवारी ने पदाधिकारियों के मनमाने बदलाव और बैंक सखी सुगंता देवी को लाभ पहुंचाने की शिकायत की, जो सही पाई गई। प्रमिला देवी ने आरोप लगाया कि उनके समूह से 50,000 निकाले गए, जिसमें से 45,000 बीएमएम ने खुद रख लिए।
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प्रियंका कुमारी ने वीडियो साक्ष्य प्रस्तुत किया जिसमें मानदेय से 9,000 बीएमएम को दिए जाने की पुष्टि हुई। सहायक विकास अधिकारी ने भी माना कि बार-बार समूहों की महिलाएं इनके खिलाफ शिकायत करती रही हैं। सुगंता देवी को बार-बार मानदेय दिलाना और अन्य बैंक सखियों का भुगतान रोकना भी गड़बड़ी का हिस्सा माना गया। जांच अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि संदीप गुप्ता द्वारा प्रस्तुत आख्या मनगढ़ंत है और तथ्यात्मक साक्ष्य पेश नहीं किए गए। इस आधार पर बीएमएम संदीप गुप्ता प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए हैं और प्रकरण आवश्यक कार्रवाई के लिए उच्च अधिकारियों को प्रेषित कर दिया गया है।