{"_id":"65847cd014b584247e0ff699","slug":"the-artwork-of-mejwans-daughters-is-enhancing-the-beauty-of-mumbai-international-airport-terminal-2-azamgarh-news-c-258-1-svns1002-8983-2023-12-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Azamgarh News: मेजवां की बेटियों की कलाकृति मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट टर्मिनल-टू की बढ़ा रही शोभा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Azamgarh News: मेजवां की बेटियों की कलाकृति मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट टर्मिनल-टू की बढ़ा रही शोभा
विज्ञापन
मुंबई इंटर नेशनल एयरपोर्ट टर्मिनल-टू पर कैरोसेल 12 पर मेजवां की बेटियों की कलाकृतियां शोभा बढ़ा रहीं हैं। मेजवां वेलफेयर सोसायटी में काम करने वाली बेटियों द्वारा 20 मीटर के कपड़े पर स्व. कैफी आजमी द्वारा लिखे गए नज्म औरत उठ मेरी जान मेरे साथ ही चलना है तुझे... वहां पर शोभा बढ़ा रहे हैं। कपड़े पर मेजवां गांव और चिकनकारी सेंटर में काम करने वाली 60 बेटियों के जीवन की कहानी अंग्रेजी और उर्दू में लिखी गई है।
देश के प्रसिद्ध कवि और गीतकार कैफी आजमी से जुड़ी यादें लोगों को आज भी तरोताजा कर देती हैं। गांव की बेटियों के लिए भी उनकी कलम प्रेरणा का काम करती थी। देश के प्रसिद्ध गीतकार स्व. कैफी आजमी और उनकी पत्नी शौकत कैफी को चाहने वाली मशहूर फैशन डिजाइनर रितु कुमार और मनीष अरोड़ा द्वारा मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट टर्मिनल-टू पर कैरोसेल के पास ''एक मूक क्रांति'' को प्रदर्शित करने वाली कलाकृति लगाई गई है, जो एयरपोर्ट की शोभा बढ़ा रही है। उक्त कलाकृतियों को आजमगढ़ के एक छोटे से गांव मेजवां में संचालित मेजवां वेलफेयर सोसायटी की छांव में शबाना आजमी की प्रेरणा से संचालित चिकनकारी सेंटर में काम करने वाली बेटियों ने उकेरा है। उन्होंने अंग्रेजी और उर्दू में मेजवां गांव और अपने जीवन संघर्ष के साथ ही स्व. कैफी आजमी की नज्म ''उठ मेरी जान मेरे साथ ही चलना है तुझे..., को कढ़ाई के माध्यम से 20 मीटर के कपड़े में बुना है। एयरपोर्ट पर पहुंचने वाले लोग नज्म आज भी पढ़कर यादें तरोताजा कर लेते हैं।
अंग्रेजी और उर्दू में लिखे गए ये नज्म
''उठ मेरी जान मेरे साथ ही चलना है तुझे,
कद्र अब तक तेरी तारीख़ ने जानी ही नहीं, तुझमें शोले भी हैं बस अश्क़ फिशानी ही नहीं,
तू हक़ीकत भी है दिलचस्प कहानी ही नहीं,
तेरी हस्ती भी है इक चीज़ जवानी ही नहीं,
अपनी तारीख़ का उन्वान बदलना है तुझे,
उठ मेरी जान मेरे साथ ही चलना है तुझे,''
उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जनपद का एक छोटा सा गांव मेजवां आज हर जगह चर्चित है। कारण कि मेजवां की बेटियां आज सशक्त हो रहीं हैं। उनकी कलाकृति अलग-अलग प्रदेशों व और देशों में पहुंचने लगी हैं। मेजवां वेलफेयर सोसायटी द्वारा संचालित चिकनकारी सेंटर का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को सशक्त करना है। - संयोगिता, इंचार्ज चिकनकारी सेंटर मेजवां।
विज्ञापन
विज्ञापन
देश के प्रसिद्ध कवि और गीतकार कैफी आजमी से जुड़ी यादें लोगों को आज भी तरोताजा कर देती हैं। गांव की बेटियों के लिए भी उनकी कलम प्रेरणा का काम करती थी। देश के प्रसिद्ध गीतकार स्व. कैफी आजमी और उनकी पत्नी शौकत कैफी को चाहने वाली मशहूर फैशन डिजाइनर रितु कुमार और मनीष अरोड़ा द्वारा मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट टर्मिनल-टू पर कैरोसेल के पास ''एक मूक क्रांति'' को प्रदर्शित करने वाली कलाकृति लगाई गई है, जो एयरपोर्ट की शोभा बढ़ा रही है। उक्त कलाकृतियों को आजमगढ़ के एक छोटे से गांव मेजवां में संचालित मेजवां वेलफेयर सोसायटी की छांव में शबाना आजमी की प्रेरणा से संचालित चिकनकारी सेंटर में काम करने वाली बेटियों ने उकेरा है। उन्होंने अंग्रेजी और उर्दू में मेजवां गांव और अपने जीवन संघर्ष के साथ ही स्व. कैफी आजमी की नज्म ''उठ मेरी जान मेरे साथ ही चलना है तुझे..., को कढ़ाई के माध्यम से 20 मीटर के कपड़े में बुना है। एयरपोर्ट पर पहुंचने वाले लोग नज्म आज भी पढ़कर यादें तरोताजा कर लेते हैं।
विज्ञापन
अंग्रेजी और उर्दू में लिखे गए ये नज्म
''उठ मेरी जान मेरे साथ ही चलना है तुझे,
कद्र अब तक तेरी तारीख़ ने जानी ही नहीं, तुझमें शोले भी हैं बस अश्क़ फिशानी ही नहीं,
तू हक़ीकत भी है दिलचस्प कहानी ही नहीं,
तेरी हस्ती भी है इक चीज़ जवानी ही नहीं,
अपनी तारीख़ का उन्वान बदलना है तुझे,
उठ मेरी जान मेरे साथ ही चलना है तुझे,''
उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जनपद का एक छोटा सा गांव मेजवां आज हर जगह चर्चित है। कारण कि मेजवां की बेटियां आज सशक्त हो रहीं हैं। उनकी कलाकृति अलग-अलग प्रदेशों व और देशों में पहुंचने लगी हैं। मेजवां वेलफेयर सोसायटी द्वारा संचालित चिकनकारी सेंटर का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को सशक्त करना है। - संयोगिता, इंचार्ज चिकनकारी सेंटर मेजवां।
विज्ञापन