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ताजिया पर पड़ी महंगाई की मार
ब्यूरो/अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Mon, 19 Oct 2015 12:34 AM IST
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मुहर्रम का महीना शुरू हो गया। ऐसे में ताजिया निर्माण भी जोरों पर हैं। लेकिन ताजिया निर्माण भी महंगाई की मार से नहीं बच सका है। कारीगरों की मानें तो अब वह दाम नहीं मिलता जो पहले मिला करता था। जबकि इसके निर्माण में काफी समय लगता है और लागत भी अधिक आती है।
मुहल्ला बाज बहादुर निवासी ताजिया कारीगर अल अली और आलमगीर ने बताया कि उनके यहां दो से लेकर 12 फुट तक के ताजिए बनाए जाते हैं। दो फुट का ताजिए बनाने में जहां दो से तीन घंटे लगते है वही छह फुट के ताजिए में दो दिन और 12 फुट के ताजिए में तीन से चार दिन का समय लगता है।
जिसमें दो फुट के ताजिए का मूल्य डेढ़ सौ रुपया, छह फुट का साढ़े पांच से छह सौ रुपया और 12 फुट के ताजिए का मूल्य बारह सौ से 14 सौ रुपये तक होता है। अब बढ़ती महंगाई को देखते हुए ग्राहक उतना मूल्य देने में आनाकानी करते हैं।
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कारीगरों ने बताया कि हमारे यहां जहानागंज, तरवां, मेहनगर, जीयनपुर, बिलरियागंज और अन्य जनपद के लोग ताजिया आर्डर पर बनवाते है और बना बनाया हुआ ताजिया भी ले जाते है।
बनाए गए ताजिए को लोग मोहर्रम की आठ तारीख से ले जाना शुरु कर देते है। क्यों कि सभी ताजिए नौ तारीख को इमाम चौक पर बैठाए जाते हैं और इन्हें यौमे आशूरा (दसवीं मुहर्रम) को कर्बला में लोग जूलूस के रूप में ले जाकर ठंडा करते हैं।
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मुहल्ला बाज बहादुर निवासी ताजिया कारीगर अल अली और आलमगीर ने बताया कि उनके यहां दो से लेकर 12 फुट तक के ताजिए बनाए जाते हैं। दो फुट का ताजिए बनाने में जहां दो से तीन घंटे लगते है वही छह फुट के ताजिए में दो दिन और 12 फुट के ताजिए में तीन से चार दिन का समय लगता है।
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जिसमें दो फुट के ताजिए का मूल्य डेढ़ सौ रुपया, छह फुट का साढ़े पांच से छह सौ रुपया और 12 फुट के ताजिए का मूल्य बारह सौ से 14 सौ रुपये तक होता है। अब बढ़ती महंगाई को देखते हुए ग्राहक उतना मूल्य देने में आनाकानी करते हैं।
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कारीगरों ने बताया कि हमारे यहां जहानागंज, तरवां, मेहनगर, जीयनपुर, बिलरियागंज और अन्य जनपद के लोग ताजिया आर्डर पर बनवाते है और बना बनाया हुआ ताजिया भी ले जाते है।
बनाए गए ताजिए को लोग मोहर्रम की आठ तारीख से ले जाना शुरु कर देते है। क्यों कि सभी ताजिए नौ तारीख को इमाम चौक पर बैठाए जाते हैं और इन्हें यौमे आशूरा (दसवीं मुहर्रम) को कर्बला में लोग जूलूस के रूप में ले जाकर ठंडा करते हैं।